48 कोस के तीर्थों को बनेगी डाक्यूमेंट्री फिल्म, तीर्थों का जिंगल भी होगा तैयार-केडीबी
न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र, 12 सितंबर। हरियाणा पब्लिसिटी सेल के चेयरमैन रॉकी मितल ने कहा कि कुरुक्षेत्र 48 कोस के तीर्थों के इतिहास को बारीकि से पूरा विश्व जानेगा, इसके लिए 48 कोस के तीर्थों पर एक डाक्यमेंट्री फिल्म तैयार की जाएगी। इतना ही नहीं सोशल मीडिया के माध्यम से 48 कोस के तीर्थों का प्रचार-प्रसार करने के लिए जिंगल भी तैयार किए जाएंगे। इस डाक्यूमेंट्री फिल्म बनाने का कार्य शीघ्र ही शुरु कर दिया जाएगा।
चेयरमैन रॉकी मितल शनिवार को कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के कार्यालय में डाक्यूेंट्री फिल्म बनाने के मामले को लेकर पदाधिकारियों और अधिकारियों से विचार-विमर्श कर रहे थे। इससे पहले केडीबी के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने चेयरमैन रॉकी मितल को कुरुक्षेत्र 48 कोस के तीर्थों के बारे में विस्तार से जानकारी दी और एक-एक तीर्थ के इतिहास और पौराणिक महत्व के बारे में बताया है।
चेयरमैन ने 48 कोस के तीर्थों की फीडबैक लेने के उपरांत बातचीत करते हुए कहा कि कुरुक्षेत्र का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है, इस पावन धरा पर भगवान श्रीकृष्ण ने गीता के उपदेश दिए और इसी पावन धरा से बहने वाली सरस्वती नदी के तट पर वेदों की रचना हुई और इससे पूरे विश्व को शिक्षा, संस्कार और ज्ञान की ज्योति मिली। इतना ही नहीं इस ऐतिहासिक भूमि के कण-कण में पौराणिक महत्व छिपा हुआ है। इस पौराणिक महत्व और इतिहास को आने वाली पीढ़ी सहजता से जाने और पूरा विश्व इसके इतिहास से आत्मसात हो सके, इसके लिए केडीबी के प्रयासों से एक नई योजना तैयार की गई है।
उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र 48 कोस के तीर्थों को लेकर अब एक डाक्यूमेंट्री फिल्म बनाने का कार्य किया जाएगा। इसके लिए केडीबी के मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा व अन्य अधिकारियों से बातचीत की जा चुकी है। इस डाक्यूमेंट्री फिल्म को बनाने का कार्य शीघ्र शुरु कर दिया जाएगा। इस भूमि के 48 कोस के प्रत्येक तीर्थ पर जाकर शुटिंग की जाएगी और अच्छी गुणवता की वीडियो बनाने के लिए ड्रोन के साथ-साथ अन्य आधुनिक तकनीकी का प्रयोग किया जाएगा। इन तीर्थों को लेकर लगभग एक घंटे की फिल्म तैयार करने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इन तीर्थों के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए बेहतरीन जिंगल भी तैयार किए जाएंगे। इस कार्य को आगामी सप्ताह में शुरु करने का प्रयास किया जाएगा। इसका पूरा खाका तैयार कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार कुरुक्षेत्र को पर्यटन के विश्व मानचित्र पर लाने का प्रयास कर रही है। इसके लिए केन्द्र सरकार ने कुरुक्षेत्र को श्रीकृष्ण सर्किट में शामिल किया और इस सर्किट के प्रथम चरण के लिए 97.50 करोड़ रुपए की राशि भी जारी की, इससे ज्योतिसर और अन्य तीर्थों पर विकास कार्य चल रहे है।
इतना ही नहीं केन्द्र सरकार ने कुरुक्षेत्र के तीर्थों के विकास के लिए दूसरे चरण में भी लगभग 100 करोड़ रुपए की राशि जारी करने का प्रस्ताव तैयार किया है। चेयरमैन ने कहा कि सिर्फ ज्योतिसर में ही करीब 100 करोड़ रुपए की राशि खर्च की जाएगी ताकि इस भूमि पर आने वाले व्यक्ति को महाभारत और कुरुक्षेत्र के बारे में जानने का अवसर मिले।