Home haryana ब्रिटिश हुकूमत में पाबंदियों के बावजूद भी कलम की ताकत नहीं हुई कमः मुकुल कुमार

ब्रिटिश हुकूमत में पाबंदियों के बावजूद भी कलम की ताकत नहीं हुई कमः मुकुल कुमार

by ND HINDUSTAN
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प्रेस क्लब द्वारा स्वतंत्रता आंदोलन में मीडिया की भूमिका पर संगोष्ठी का आयोजन 

स्वतंत्रता आंदोलन को पढ़ते हैं तो लगता है कि पत्रकारिता के इतिहास को पढ़ रहे हैंः डॉ. अशोक

कोरोना काल में सराहनीय कार्य के लिए प्रेस क्लब कुरुक्षेत्र ने पत्रकारों को किया सम्मानित

न्यूज डेक्स संवाददाता

कुरुक्षेत्र। प्रेस क्लब कुरुक्षेत्र द्वारा आजादी का अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में स्वतंत्रता आंदोलन में मीडिया की भूमिका विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। हरियाणा कला परिषद के सहयोग से कला कृति भवन में आयोजित इस संगोष्ठी में उपायुक्त मुकुल कुमार ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। वहीं वशिष्ठ अतिथि के रूप में लाडवा के एसडीएम एवं कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सीईओ अनुभव मेहता, हरियाणा कला परिषद के अतिरिक्त निदेशक महावीर गुड्डू व वरिष्ठ पत्रकार राजेश शांडिल्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार विजय सभ्रवाल ने की और मंच संचालन क्लब के महासचिव देवीलाल बारना ने किया।

वहीं मुख्य वक्ता के रूप में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान के सहायक प्रोफेसर डॉ. अशोक शर्मा ने स्वतंत्रता के आंदोलन में मीडिया की भूमिका से सभी को अवगत कराया। प्रधान रामपाल शर्मा व वरिष्ठ उपाध्यक्ष अशोक यादव ने कार्यक्रम में सभी का स्वागत किया और क्लब की गतिविधियों के बारे में बताया। प्रेस क्लब की ओर से सभी अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया तथा अजय जौली ब्यूरो चीफ अमर उजाला ने कार्यक्रम में आए मुख्यातिथि व पत्रकारों का आभार व्यक्त किया। कोरोना काल में सराहनीय कार्य करने पर क्लब की ओर से उपायुक्त मुकुल कुमार ने पत्रकारों को सम्मानित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाबीर गुड्डू द्वारा किए गए शंखनाद के बीच उपायुक्त मुकुल कुमार ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प अर्पिक करे किया। 

 उपायुक्त मुकुल कुमार ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में मीडिया ने जिस प्रकार से भूमिका निभाई वह सराहनीय थी। मीडिया के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। क्रांतिकारी पत्रकारों ने अपने अपने माध्यम से लोगों में आजादी की अलख जगाने का काम किया। ब्रिटिश हुकूमत में मीडिया पर कई प्रकार की पाबंदियां लगा दी गईं, लेकिन इन पाबंदियों के बावजूद भी कलम की ताकत कम नहीं हुई। स्वतंत्रता संग्राम में हर क्रांतिकारी बिना किसी भय के मीडिया के द्वारा अपने विचारों को लोगों तक तक पहुंचाता रहा। इन विचारों ने जब लोगों को एकजुट करने कर काम किया तो ब्रिटिश हुकुमत को समझ आ गया कि अब वो दिन दूर नहीं जब भारत आजाद हो जाएगा। उपायुक्त ने संगोष्ठी आयोजित करने के लिए प्रेसक्लब की प्रशंसा की और आयोजकों को बधाई दी। 

संगोष्ठी में मुख्य वक्ता कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान के सहायक प्रोफेसर डॉ. अशोक शर्मा ने संबोधित करते हुए कहा कि पत्रकारिता का इतिहास गौरवशाली रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन को पढ़ते हैं तो ऐसा लगता है कि पत्रकारिता के इतिहास को पढ़ रहे हैं, वही जब पत्रकारिता के इतिहास को पढ़ते हैं तो ऐसा लगता है कि स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को पढ़ा जा रहा है। दोनों में कोई भी फर्क नहीं है। स्वतंत्रता आंदोलन की लड़ाई में सभी क्रांतिकारी पत्रकार बन गए थे। सभी ने अपने-अपने समाचार पत्रों के माध्यम से देशवासियों को जागृत करने का काम किया। क्रांतिकारियों द्वारा पत्रकारिता के माध्यम से आजादी के लिए लड़े जा रहे सभी आंदोलनों को लीड किया गया।

इसमें बाल गंगाधर तिलक, गणेशशंकर विद्यार्थी और महात्मा गांधी की अहम भूमिका रही। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान संध्या, कर्मयोगी, प्रताप, स्वदेश, हरिजन, बॉम्बे, आज, हिंदुस्तान टाइम, सर्च लाइट पटना, दा हिंदुस्तान टाइम्स, रिवोल्यूशन, बदमाश अंग्रेज सरकार, मराठा व स्वराज जैसी अखबार निकाले गए। डॉ. अशोक ने कहा कि पत्रकारिता का इतिहास 241 वर्ष का हो गया है, इसलिए समय-समय पर इसका मूल्यांकन भी जरूरी है। आज हमें अपने अतीत को जानने की आवश्यकता है। भारत में 29 जनवरी 1731 को पहला अखबार बंगाल गजट निकाला गया। वह ऐसा समय था जब कोई भी समाचार पत्र 2-4 माह से ज्यादा नहीं टिक पाता था, लेकिन उस समय जो भी पत्रकार थे वे एक मिशन पर थे। वे अच्छे लेखक के साथ-साथ बहुत सी साहसी भी थे और किसी भी कीमत पर झुकते नहीं थे। डॉ. अशोक ने कहा कि पत्रकारिता क्षेत्रीय भाषाओं से शुरू हुई थी।

‌लाडवा के एसडीएम एवं केडीबी के सीईओ अनुभव मेहता ने संबोधित करते हुए कहा कि जिस समय ब्रिटिश हुकूमत द्वारा देशवासियों का शोषण किया जा रहा था, उस समय मीडिया ने अपनी अमह भूमिका अदा की। देश में प्रिंटिग प्रेस ब्रिटिश सरकार लेकर आई और भारतवासियों ने उन्हीं के विरुद्ध इसे इस्तेमाल किया। कार्यक्रम में हरियाणा कला परिषद के सहायक निदेशक महावीर गुड्डू ने मैं हरियाणा की बेटी हूं कविता प्रस्तुत की और पत्रकारों का मनोरंजन किया। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार विजय सभ्रवाल, राजेश शांडिल्य, प्रदीप आर्य, सौरभ चौधरी और विकास बतान(दैनिक भास्कर) ने भी देश की आजादी में मीडिया की भूमिका पर अपने-अपने विचार व्यक्त किए। 

कार्यक्रम में जिला जनसूचना अधिकारी डॉ. नरेंद्र सिंह, सहायक जन सूचना अधिकारी बलराम, दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ जगमोहिंद्र सरोहा, दैनिक भास्कर के वरिष्ठ संवाददाता विकास बतान, दैनिक जागरण से स‌तविंद्र सैनी, विनोद चौधरी, विनीश गौड़, अनुज, अमर उजाला से भारत भूषण शर्मा, सुनील धीमान, रवि संबरवाल, पंजाब केसरी से विनोद अरोड़ा, जग मार्ग के ब्यूरो चीफ बाबू राम तुषार, दैनिक सवेरा के ब्यूरो चीफ जसबीर दुग्गल, आज तक से संवाददाता चंद्रप्रकाश शर्मा, जगत क्रांति के ब्यूरो चीफ चंद्रमणी अत्री, हरियाणा न्यूज के वरिष्ठ संवाददाता भारत साबरी, कुरुक्षेत्र क्रांति के संपादक देशराज भटनागर, कुरुक्षेत्र मीडिया के संपादक राजेंद्र स्नेही सहित कुरुक्षेत्र तंज के संपादक अरविंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, खबरें अभी तक के संवाददाता विक्रम सिंह, गोल्डन किरण की संपादक अदिति पासवान,पंजाब केसरी दिल्ली से जरनैल रंगा, सटीक बात के संवाददाता राहुल शर्मा, मक्खन सिंह, कुलवंत सिंह बग्गा, नवोदित, तुषार सैनी, नीतू चौहान, सुमित सैनी, सुनील, शिवानी, दिलबाग सिंह, अजय ठाकुर, दीपक पाठक, सुशील कुमार, चंद्र अग्रवाल, रविंद्र कुमार, विनोद कुमार, अरविंद शर्मा, राधिका, जसबीर सिंह जस्सी, शमशेर सैनी, रणजीत आर्य, गगन सांगर, शेखर, रवि बत्तरा, प्रिंस और नागेंद्र शर्मा सहित अनेक पत्रकारों उपस्थित रहे। 

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