नाट्य मेला में मंचित हुआ नाटक खामोश, दिखाई नारी की मनोदशा
न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र। कला सीखने तथा प्रस्तुत करने की कोई उम्र नहीं होती। अपने भीतर छुपी प्रतिभा को कलाकार जब मंच पर प्रस्तुत करते हैं तो दृश्य वास्तव में प्रशंसनीय होता है। ऐसा ही कुछ कला कीर्ति भवन की भरतमुनि रंगशाला में देखने को मिला। मौका था हरियाणा कला परिषद द्वारा आजादी का अमृतमहोत्सव के दौरान प्रारम्भ किए गए नाट्य मेला में नाटक मंचन का। जिसमें कला सृष्टि मंच के कलाकारों ने बृज शर्मा के लेखन और निर्देशन में नाटक खामोश प्रस्तुत किया। इस मौके पर हरियाणा कला परिषद के निदेशक संजय भसीन, चित्कारा विश्वविद्यालय के प्रोफैसर आशुतोष मिश्रा, नारायण कालड़ा, सौरभ चौधरी, डा. शालिनी व भाजपा की वरिष्ठ नेत्री शंकुतला शर्मा आदि उपस्थित रहे। मंच का संचालन विकास शर्मा द्वारा किया गया।
नाटक खामोश में एक प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए कलाकार अदालत में चल रहे मुकदमे पर आधारित नाटक तैयार करते हैं। कलाकारों द्वारा अदालत के माध्यम से महिलाओं के मन की पीड़ा को दर्शकों तक पहुंचाने का काम किया गया। कलाकारों ने दिखाया कि ये अदालत आम अदालतों की तरह नहीं है। इसे नाटक का रूप दिया गया है। जिसमें कलाकार नाटक के संवाद पढ़ते हैं। मगर उन्हें ये डायलॉग्स अपने जीवन से जुड़े लगते हैं। वो हैरान होते हैं कि किरदारों के साथ जो हुआ है, उस पर अदालत के फैसलें ने मरहम लगाने की अपेक्षा नमक डालने का कार्य किया। प्रत्येक पात्र अपने साथ घटी घटनाओं को याद करते हुए अदालत के फैंसले पर सवाल खड़ा कर देता है।
नाटक की तैयारी के बहाने कलाकार अपने साथ घटी घटना की पीड़ा बयान करना चाहता है। नाटक में इसी तरह से हर किरदार की अपनी एक कहानी सामने आती है। जो काफी दर्द लिए है। महिलाओं की मनोदशा को दिखाता नाटक अंत में सवालिया निशान लगा देता है कि अदालत में सबूतों के आधार पर फैंसले दे दिए जाते हैं, जिसमें कभी कभी कसूरवार बरी हो जाता है और बेकसूर मारा जाता है। नाटक में बृज शर्मा, शिवकुमार किरमच, मधु मल्होत्रा, रेणू खुग्ग्गर, अन्नपूर्णा शर्मा, दीपक, नीरज आश्री, सरिता दहिया, आशी खेत्रपाल, सुनील, दीपक कौशिक, रिंकू छाबड़ा आदि ने भूमिकाएं निभाई।