Home haryana प्रवासी पक्षियों के संरक्षण व संवर्धन में योगदान दें, कृत्रिम प्रकाश प्रवासी पक्षियों के लिए घातक: डॉ. तरसेम कौशिक

प्रवासी पक्षियों के संरक्षण व संवर्धन में योगदान दें, कृत्रिम प्रकाश प्रवासी पक्षियों के लिए घातक: डॉ. तरसेम कौशिक

by ND HINDUSTAN
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न्यूज डेक्स संवाददाता

कुरुक्षेत्र। आज पूरी दुनिया विश्व प्रवासी पक्षी दिवस 2022 मना रही है जिसका उद्देश्य आमजन को प्रवासी पक्षियों तथा उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण व संवर्धन के प्रति जागरूक करना है। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हथीरा के जीवविज्ञान प्राध्यापक डॉ तरसेम कौशिक ने बताया कि प्रति वर्ष मई व अक्टूबर माह के द्वितीय शनिवार को विश्व प्रवासी पक्षी दिवस के रूप में मनाया जाता है। डॉ तरसेम कौशिक के अनुसार प्रवासी पक्षियों का संरक्षण करना आसान नहीं है क्योंकि प्रवासी पक्षी वर्ष में दो अलग अलग स्थानों पर रहते हैं।

प्रवासी पक्षी अपने प्राकृतिक स्थल (प्रजनन स्थल) से शीतकालीन प्रवास के लिए दुर्गम यात्राएं करते हैं। अतः प्रवासी पक्षियों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए परम आवश्यक है कि उनके फ्लाईवे को ही संरक्षित कर दिया जाए। हरियाणा सहित सम्पूर्ण भारतवर्ष विभिन्न प्रवासी पक्षियों का अस्थायी निवास है जहाँ हजारों/लाखों की संख्या में प्रवासी पक्षी शीतकालीन प्रवास के लिए आते हैं। डॉ तरसेम कौशिक ने बताया कि इस वर्ष विश्व प्रवासी पक्षी दिवस 2022 का थीम प्रवासी पक्षियों पर प्रकाश प्रदूषण का प्रभाव रखा गया है जिसका उद्देश्य प्रवासी पक्षियों को रात के समय बिना किसी परेशानी के यात्रा करने देना है ताकि प्रवासी पक्षी अपने मूल निवास पर लौट सकें तथा पुनः शीतकालीन प्रवास के लिए आ सकें। रात को रोशनी बंद करें, प्रवासी पक्षियों को सुरक्षित घर जाने दें। प्रकाश प्रदूषण प्रवासी पक्षियों के लिए घातक है।

हजारों प्रवासी पक्षी लंबी दूरी की दुर्गम यात्राओं के दौरान कृत्रिम प्रकाश के कारण प्रवासी पक्षी या तो अपने गंतव्य से भटक जाते हैं या फिर किसी वस्तु से टकरा जाते हैं। डॉ तरसेम कौशिक ने बताया कि पिछले कुछ दशकों से वैश्विक प्रकाश प्रदूषण में 1 से 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है जिसके कारण प्रवासी पक्षियों को प्रव्रजन में कठिनाई आई है। अफ्रीकी युरेशियन प्रवासी जलपक्षियों के संरक्षण पर संयुक्त राष्ट्र समझौता (यूएन संधि) के तत्वावधान में वर्ष 2006 से विश्व प्रवासी पक्षी दिवस मनाया जाता है ताकि प्रवासी पक्षियों के प्रजनन, गैर प्रजनन तथा प्रव्रजन से समय रुकने वाले स्थलों के संरक्षण के प्रति जनजागरण अभियान चलाए जा सकें। डॉ तरसेम कौशिक ने बताया कि घर की छतों पर पक्षियों के लिए भोजन पानी की व्यवस्था तथा अपने घर आँगन में पेड़ पौधे लगाकर हम भी विश्व प्रवासी पक्षी दिवस की संकल्पना को चिरतार्थ कर सकते हैं।

प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के लिए आवश्यक है कि हम प्राकृतिक तालाबों, जोहड़ों, नदियों व जलाशयों को भी संरक्षित करें क्योंकि प्रवासी पक्षी शीतकालीन प्रवास के दौरान भोजन प्राप्त करते हैं। डॉ तरसेम कौशिक ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से प्रवासी पक्षियों की संख्या में बेतहाशा कमी आई है जिसका कारण उनके प्राकृतिक आवासों का नष्ट होना है। अतः प्रवासी पक्षियों के संरक्षण व संवर्धन के लिए आवश्यक है कि हम प्रवासी पक्षियों के रहन सहन, भोजन पानी व उनके प्रवास के बारे में समाज में जनजागृति फैलाएं।

विश्व प्रवासी पक्षी दिवस के अवसर पर हम सभी को यह संकल्प करना होगा कि हम प्रवासी पक्षियों के संरक्षण व संवर्धन के लिए समाज को जागरूक करेंगे तथा प्रवासी पक्षियों के प्राकृतिक आवासों को भी संरक्षित करेंगे। अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब शीतकालीन प्रवास के लिए भ्रमण करने वाले प्रवासी पक्षी उसी तरह से नष्ट हो जाएंगे जैसे कभी केवलादेव पक्षी अभ्यारण्य में शीतकालीन प्रवास के लिए भ्रमण करने वाली साइबेरियन क्रेन नष्ट हो चुकी है। प्रवासी पक्षी प्रकृति के अग्रदूत होते हैं। प्रवासी पक्षी आपसी भाईचारे की भावना को प्रचारित करते हैं क्योंकि प्रवासी पक्षियों के लिए किसी भी देश की सीमा, भाषा व परिस्थितियां मायने नहीं रखती। प्रवासी पक्षियों के संरक्षण व संवर्धन के लिए सम्पूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र को ही संरक्षित करना होगा तभी विश्व प्रवासी पक्षी दिवस मनाने की संकल्पना फलीभूत होगी।

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