जीवन में हर पल शिक्षक में होती है शिक्षक की उपस्थिति, समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचारक है अध्यापक
टीचर्स दे पर समग्र शिक्षा द्वारा शिक्षक अभिवादन कार्यक्रम का आयोजन, स्पेशल टीचर्स व वोकेशनल टीचर्स रहे उपस्थित
न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र। विधायक सुभाष सुधा ने कहा कि कुरुक्षेत्र में जल्द ही शिक्षा सदन का निर्माण किया जाएगा, जिसमें शिक्षा विभाग में सभी अधिकारियों के कार्यालय एक साथ होंगे। विभाग की लम्बे समय से शिक्षा सदन की मांग कर रहा है। अधिकारी प्रस्ताव तैयार करें, सरकार से जल्द स्वीकृति की जिम्मेदारी उनकी होगी। विधायक सुभाष सुधा विद्याभारती के सभागार में शिक्षक अभिवादन कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि के रुप में संबोधित कर रहे थे। विधायक सुभाष सुधा ने कहा कि जीवन में शिक्षक का किरदार बहुत खास होता है, वे किसी के जीवन में उस बैकग्राउंड म्यूजक़ि कि तरह होते हैं। जिसकी उपस्थिति मंच पर तो नहीं दिखती, परंतु उसके होने से नाटक में जान आजाती है। ठीक इसी प्रकार हमारे जीवन मे एक शिक्षक की भी भूमिका होती है। चाहें आप जीवन के किसी भी पड़ाव पर हों, शिक्षक की आवश्यकता सबको पड़ती है। भारत में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिन है। वे भारत के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति थे जो इन पदों पर आसीन होने से पहले एक शिक्षक थे। पहला शिक्षक दिवस भारत में 1962 में मनाया गया था।
उन्होंने कहा कि अध्यापक दिवस पर यूं तो हर साल अनेकों कार्यक्रम होते हैं, लेकिन यह कार्यक्रम अनूठा व खास है। इस कार्यक्रम में सामान्य स्कूल टीचर्स की अपेक्षा विशेष आवश्यकता वाले दिव्यांग बच्चों व स्कूल न जा सकने वाले विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले अध्यापक उपस्थित हैं। यह अध्यापक विशेष रूप से आदरणीय हैं मैं कई बार अधिकारियों से ऐसे अध्यापकों के साथ संवाद करने की इच्छा जाहिर कर चुका हूं। यह अवसर मेरे लिए भी खास हो गया है। दिव्यांग व दाखिल न ले पाने वाले बच्चों को शिक्षा देना व मुख्यधारा में लाने का प्रयास करना एक पुनीत कार्य है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने नई शिक्षा नीति लागू कर शिक्षा को व्यवसायिक शिक्षा के साथ जोडक़र अनूठी पहल की है, जिससे विद्यार्थियों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। शिक्षक जीवन व शिक्षा का आधार है, यही कारण है कि यह दिन शिक्षकों को सम्मान और आभार प्रकट करने के लिए समर्पित किया गया है।
डॉ. बीआर अम्बेडकर अध्ययन केंद्र के उप निदेशक डॉ प्रीतम सिंह ने कहा कि अध्यापक सही मायनों में राष्ट्र निर्माता होता है। नरेंद्र को विवेकानंद बनाने वाला गुरु रामकृष्ण परमहंस होता है, जिसने धर्म की प्रतिष्ठा विश्व में स्थापित की। शिवाजी को महान बनाने के पीछे समर्थ गुरु रामदास है। भारत को राष्ट्र के रूप में एकजुट करने के लिए चन्द्रगुप्त का निर्माण करने वाला शिक्षक चाणक्य है। गुरु सकारात्मक विचार का संचार करता है। उत्थान व प्रलय शिक्षक की गोद में पलते हैं। शिक्षक विद्यार्थियों के जीवन के वास्तविक कुम्हार होते हैं जो न सिर्फ हमारे जीवन को आकार देते हैं बल्कि हमें इस काबिल बनाते हैं कि हम पूरी दुनिया में अंधकार होने के बाद भी प्रकाश की तरह जलते रहें। शिक्षक दिवस एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है, यह वह दिन है जिसे हम अपने शिक्षकों के प्रयासों और कार्यों के सम्मान के रुप में मनाते हैं। शिक्षण का कार्य विश्व के सबसे कठिन कार्यों में से एक है क्योंकि उनके उपर नौजवानो को शिक्षा देने की जिम्मेदारी होती है। एक अच्छा शिक्षक हमेशा अपने विद्यार्थियों के रुचि को ध्यान में रखता है और उनकी क्षमताओं को पहचानता है। उन्हे उनके विषय या कार्यो के कौशल को निखारने की शिक्षा देता है।
उन्होंने कहा कि कुछ बच्चे विभिन्न कारणों से दिव्यांग हो जाते हैं, लेकिन स्पेशल टीचर्स उन्हें भी सक्षम बनाते हैं। इन्हीं अध्यापकों के चलते आज भारत दुनियाभर में एक बड़ी शक्ति के रूप में उभर रहा है। भारत अब दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। आज हम सबको देश के इस अमृत काल में अपनी भूमिका की तय करनी चाहिए और पूरी तन्मयता से देश के विकास में योगदान देना होगा। डीपीसी विनोद कौशिक ने अतिथियों का स्वागत किया और बताया कि समग्र शिक्षा द्वारा यह सराहनीय पहल की गई है। कार्यक्रम में सभी अध्यापकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति, व्यावसायिक शिक्षा व आउट ऑफ स्कूल बच्चों की शिक्षा जैसे विषयों पर वीडियो भी प्रदर्शित किए गए हैं। विभाग बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार प्रयासरत है। इन अध्यापकों की भूमिका के चलते विभाग नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एपीसी संजय कौशिक ने बताया कि कार्यक्रम में जिले में कार्यरत सभी 210 ब्लॉक रिसोर्स पर्सन, एबीआरसी, स्पेशल टीचर्स, ओतबीफ़ स्कूल बच्चों के लिए नियुक्त एजुकेशन वालंटियर्स, म्यूजिक टीचर्स उपस्थित रहे। लगभग 4 घंटे चले कार्यक्रम में सभी ने अपने अनुभव भी सांझा किए। इस अवसर सतबीर कौशिक, प्रिंसिपल रामपल सरोहा, वीरेंद्र वालिया, रीटा बठला, डॉ राम मेहर अत्रि सहित अनेक अधिकारी उपस्थित थे।