Home haryana हमें गीता जी के एक-एक शब्द को अपने जीवन में धारण करने की जरूरत, जो धारण कर लेगा उसकी बुराईयां समाप्त हो जाएंगी : गृह मंत्री अनिल विज 

हमें गीता जी के एक-एक शब्द को अपने जीवन में धारण करने की जरूरत, जो धारण कर लेगा उसकी बुराईयां समाप्त हो जाएंगी : गृह मंत्री अनिल विज 

by ND HINDUSTAN
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गीता जी को अपना रहनुमा बनाओं, आपके जीवन, मरण, दुख हर प्रश्न का उत्तर गीता जी में दिया गया : मंत्री अनिल विज 

अम्बाला शहर पुलिस लाईन मैदान में गृह मंत्री अनिल विज ने देर शाम दिव्य गीता सत्संग समारोह में शिरकत की और श्रद्धालुओं को संबोधित किया, उन्होंने आरती में भी हिस्सा लिया 

न्यूज डेक्स संवाददाता

अंबाला।
हरियाणा के गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि हमें भागवत गीता जी के एक-एक शब्द को अपने जीवन में धारण करने की जरूरत है, जो इसे धारण कर लेगा उसकी बुराईयां स्वयं समाप्त हो जाएंगी। मंत्री अनिल विज शनिवार देर शाम अम्बाला शहर पुलिस लाईन ग्राउंड में आयोजित दिव्य गीता सत्संग समारोह में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गीता जी को पढ़कर उसे अपने जीवन में धारण करने की जरूरत है और जो धारण कर लेगा उसके भीतर सभी कौरव भाग जाएंगे। आवश्यकता पढ़ने और धारण करने की है, यदि पढ़ लिया और धारण नहीं किया तो भी व्यर्थ है। उन्होंने कहा गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज लगातार अमृत की ज्ञान वर्षा कर रहे हैं और यदि हमने उस अमृत की एक बूंद का भी पान कर लिया तो हमारा जीवन सफल हो जाएगा। सत्संग समारोह में गृह मंत्री अनिल विज ने आरती में हिस्सा लिया और इस दौरान स्वामी ज्ञानानंद महाराज द्वारा उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। 

आज भी हमें बुराईयों से युद्ध करने की जरूरत : मंत्री अनिल विज 

गृह मंत्री अनिल विज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि धर्म तीन शब्दों से बना है, ध से धारण करना, र से रास्ता और म जो मुक्ति और मोक्ष दिला दे। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन से कहा था कि युद्ध कर-युद्ध कर, वह महाभारत आज भी जारी है। महाभारत के सभी पात्र आज भी जीवित हैं, आज के कृष्ण आप लोग स्वयं है, यह शरीर आप का रथ है, इंद्रिया आपके रथ के घोड़े हैं और गीता का ज्ञान गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी से हमें लगातार प्राप्त हो रहा है कि हमें युद्ध करना है। आज जो बुराईयां हैं, आज भी दुयोर्धन शकुनी रूपी हमारे भीतर बुराईयां है जिनके खिलाफ हमें युद्ध करना है। हमें अपना जीवन और इस संसार को हमें निर्मल बनाना है। वह सबकुछ जो इसको निर्मल बनाने में बाधक है वह कौरवों की सेना है और हमें उनको खत्म करना है। 

‘’फकद शास्त्र को बना रहनुमा, तुझे करना है क्या और न करना है’’ : अनिल विज 

गृह मंत्री अनिल विज ने कहा कि गीता जी में हर प्रश्न का उत्तर दिया हुआ है, भगवान श्रीकृष्ण ने कहा भी है ‘’तस्मात् शास्त्रं प्रमाणं ते कार्याकार्यव्यवस्थितौ, फकद शास्त्र को बना रहनुमा, तुझे करना है क्या और न करना है क्या, इस शास्त्र को अपना रहनुमा बना।‘’ उन्होंने कहा गीता जी को अपना रहनुमा बना, आपके जीवन, मरन, दुख हर प्रश्न का उत्तर गीता जी में दिया गया है। गीता जी के पहले श्लोक‘’धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सव:, मामका पाण्डवाक्ष्चैव किमकुर्वत संजय’’। कुरुक्षेत्र को धर्मक्षेत्र बताया और हमारा सौभाग्य है कि इस युग में हमारे पथ प्रदर्शक बनने के लिए गीता के ज्ञाता एवं गीता को जिन्होंने धारण कर अपनाया, वह गीता मनीषी मानव कल्याण के लिए लगातार अपनी वाणी से मानव जाति को जागृत करने के लिए अपना यज्ञ जारी रखे हुए हैं। 

मन की दुविधाएं है उनसे मुक्त होकर समाज का निर्माण करें : अनिल विज 

गृह मंत्री अनिल विज ने कहा कि हमें ऐसी दुनिया का निर्माण करना है जहां चारों ओर चिंताओं से मुक्त एक ऐसा समाज बनाए, ऐसा देश और ऐसा विश्व बनाएं कि जहां जीवन का हम निर्वाह कर सकें। गीता जी को सुनने के बाद उनपर मनन करना जरूरी है। कुछ लोग गीता को अपने घर के मंदिर में रख देते हैं और रोज धूप-बत्ती करते हैं जिससे उन्हें कोई लाभ होने वाला नहीं। उन्हें एक सज्जन मिलें जिन्होंने गले में कंठी में गीता बना रखी थी और एक सज्जन सराहने के नीचे गीता रखकर सोते हैं, इससे कोई लाभ होने वाला नहीं है। गीता को पढ़ना चाहिए। एक राजा ने अपना गुरू बनाना था और उसने कहा जिसको गीता आती होगी उसे ही वह अपना गुरू बनाएगा। कई लोग आए किसी ने कहा कि उन्होंने सैकड़ों तो किसी ने हजारों बार गीता को पढ़ने की बात कही। मगर राजा ने उन्हें पुन: आने को कहा, वह फिर आए तो कोई नहीं आया। राजा ने मंत्री से कहा कि वह चलकर देखते हैं कि जो कह रहा है कि उसने हजार बार गीता पढ़ी अब उसका क्या हुआ। राजा उसकी कुटिया में गया तो सन्नाटा था, भीतर एक साधु गीता सामने रखकर ज्ञान मुद्रा में था और उसकी समाधि लगी थी। राजा ने कहा कि इसने गीता पढ़ ली और जिसने गीता को पढ़ लिया है, जो ज्ञान अज्ञान से परे पढ़कर हो जाता है उसी ने असल में गीता को जाना है। गीता के एक-एक शब्द को धारण करने की जरूरत है। 

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