Home Kurukshetra News शहीद लेफ्टिनेंट कर्नल नारायण सिंह की याद में बनाया जाये शहीद स्मारक-राणा

शहीद लेफ्टिनेंट कर्नल नारायण सिंह की याद में बनाया जाये शहीद स्मारक-राणा

by ND HINDUSTAN
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79 वर्षीय बेटी ने हमारीपुर के कार्यक्रम में की मांग – स्मारक के लिए अपनी तरफ से भेंट की पहली ईंट

न्यूज डेक्स जम्मू कश्मीर

जम्मू/सांबा। शहीद लेफ्टिनेंट कर्नल नारायण सिंह की 79 वर्षीय बेटी शर्मिष्ठा पिता की याद में सांबा में शहीद स्मारक बनाने की मांग कर रही है।एक ईंट शहीदों के नाम अभियान  कर्तव्यनिष्ठ संस्था की ओर से इस विषय पर बैठक आयोजित की गई।इसमें उन्होंने अभियान केसंयोजक संजीव राणा को शहीद स्मारक अभियान के लिए अपनी तरफ से एक पहली ईंट भी सौंपी। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर केलिए सबसे पहले उनके पिता ने ही अपनी जान कुर्बान की थीजिसके चलते उनके पिता को सम्मान मिलना चाहिए और शहीद कादर्जा दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि लोगों को पता होने चाहिए कि जम्मू कश्मीर की रक्षा के लिए सबसे पहले उनके पिता नारायण सिंह ने अपनी कुर्बानी दी थी। शर्मिष्ठा ने बताया कि वह अभी अपने पति रिटायर्ड कर्नल बलवंत सिंह के साथ हमीरपुर में ही रह रही हैं, लेकिन पिता केसम्मान के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगी और जल्द ही अब सांबा में भी ऐसे ही कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।

इस संबंध में अभियान के संयोजक संजीव राणा ने बताया कि जम्मू एंड कश्मीर के सांबा में अब एक ईंट शहीदों के नाम अभियान केतहत कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगाजिसके लिए सभी पदाधिकारियों के साथ बैठक करके कार्यक्रमों के आगे की रुपरेखातैयार की गई है। देश की रक्षा करते हुए शहीद होने वाले सैनिक के लिए सरकार का ही दायित्व नहीं बनता बल्कि हर व्यक्ति कोउनका सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम सभी को शहीद स्मराक के लिए भी अपनाअपना सहयोग देकर निर्माण करवानाचाहिए। सुशील राणा,राजेश कुमार,अन्नू पसरीचा,उज्जवल वर्मा,संजीव लखनपालअनिल श्रीवास्तव समेत अन्य पदाधिकारी वस्थानीय लोग उपस्थित थे।  

शहीद लेफ्टिनेंट कर्नल नारायण सिंह की याद में होंगे कार्यक्रम :

राणा ने बताया कि शहीद लेफ्टिनेंट कर्नल नारायण सिंह की याद में जल्द ही कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा और देश के लिए अपनी जान न्योछावर करने के लिए उन्हें  श्रद्धांजलि दी जाएगी। संजीव राणा ने कहा कि लेफ्टिनेंट कर्नल नारायण सिंह के बारे में हममें से बहुत ही कम लोग जानते होंगे, क्योंकि वह सेना के उन वीर अफसरों में से एक थे, जिन्होंने अक्टूबर 1947 में सेना के लिए लड़तेहुए अपनी जान न्योछावर कर दी थी। वह राज्य बल के सबसे बेहतरीन अधिकारियों में से एक थे, जिन्हें ब्रिटिश के अंडर बर्माऑपरेशन के दौरान अपनी सेवाओं के लिए आर्डर ऑफ़ ब्रिटिश एम्पायर से भी सम्मानित किया गया था।

कम संख्या में होने के बावजूद विद्रोहियों को दो दिन तक रोके रखा था :  

अक्तूबर, 1947 आते-आते कश्मीर की फिजा इतनी जहरीली हो गई थी कि जब पाकिस्तान ने मजहबी नारों के साथ जम्मू-कश्मीररियासत पर हमला कर दिया था, तब महाराजा का मुस्लिम सैन्यबल हथियारों के साथ एकाएक शत्रुओं के साथ हो गया था। उससमय रियासती सैन्य कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल नारायण सिंह को उनके मुस्लिम सैनिकों ने मजहबी उन्माद में अन्य हिंदू सैनिकों केसाथ निर्ममता से मौत के घाट उतार दिया और पाकिस्तानी इस्लामी आक्रांताओं से जा मिले थे। उनकी बटालियन के सैनिको का हीकाम था, जिन्होंने कम संख्या में होने के बावजूद विद्रोहियों को दो दिन तक रोक कर रखा था।

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