मानद सचिव पद पर मनमाफिक ताजपोशी में एक राजनेता दिखेगी ताकत या एक्सटेंशन लेकर छाबड़ा लगाएंगे धोबी पछाड़
कइयों का दावा इस बार राजनेता की चलेगी,मगर सरनेम की भनक पर ब्राह्मण समाज का एक धड़ा बिफरा
बोले ब्राह्मण समाज की हो रही है उपेक्षा,प्रतिनिधित्व देने में हो रहा है भेदभाव,बोले नया पद सृजित होने बाद दो बार बने मानद सचिव,दोनों बार एक ही समाज से
संघ और भाजपा से जुड़े ब्राह्मण,क्षत्रिय,अग्रवाल और अन्य समाज के व्यक्ति को मानद सचिव पद पर अवसर देने के लिए होने लगी है चर्चा
पूरी रस्साकशी में लगी है दो धर्मगुरुओं की ताकत,नतीजों में नजर आ सकता है प्रभाव
न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र। बाहर आ रही है ब्राह्मण समाज की टीस उभर कर सामने आ रही है और कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड (केडीबी)के मानद सचिव पद का कार्यकाल 18 अप्रैल को पूरा जाएगा। सरकार द्वारा 2017 में सृजित किए गए इस पद पर अभी तक दो मानद सचिव कार्यभार संभाल चुके हैं और दोनों पंजाबी (खत्री) समुदाय से संबंधित रहे है। मुख्य रुप से तीर्थों के जीर्णोद्धार और संरक्षण जैसे कार्यों का जिम्मा संभाल रही केडीबी में ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधित्व का मुद्दा पुराना है। इसके गैर सरकारी सदस्यों में बाखूबी उन्हें प्रतिनिधित्व हर सरकार में दिया गया।
अब ब्राह्मण समुदाय के भीतर से यह आवाज आ रही है कि जिस विधानसभा क्षेत्र थानेसर में 25 हजार वोटें इस समाज की है,वहां प्रतिनिधित्व के मामले में उनके पास क्या है ? जवाब में इस समाज से रोषस्वरूप आवाज बाहर आती है और कह देते हैं बाबा जी का ठुल्लू,यानी कुछ नहीं,खाली हाथ।इनका तर्क है कि कुरुक्षेत्र के लोकसभा सांसद सैनी समुदाय से हैं। थानेसर के विधायक पद पर पिछले 25 वर्षों से पंजाबी (खत्री) सामुदाय से अशोक अरोड़ा और सुभाष सुधा प्रतिनिधित्व कर रहे हैं,थानेसर नगर परिषद की अध्यक्ष का पद पिछले करीब 20 साल से पंजाबी समुदाय के खाते में है,क्योंकि 1995 से 2000 तक सुभाष सुधा और 2005 से अब तक से उनकी धर्मपत्नी उमा सुधा थानेसर नप अध्यक्ष पर प्रतिनिधित्व कर रहीं हैं ।
इधर कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड में मानद सचिव अशोक सुखीजा के बाद 2018 से अब तक मदन मोहन छाबड़ा लगातार चार बार मानद सचिव बने और एक दिन बाद उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है। मीडिया में पिछले कई दिनों से इस पर चर्चा हो रही है कि अगला मानद सचिव कौन ? सत्ता पक्ष के एक राजनेता इस बार केडीबी मानद सचिव पर अपनी पसंद को तवज्जो चाहते हैं,जिसे लेकर उनका महा अभियान जारी है।इसी वजह से इस राजनेता के करीबी यह बताने लगे हैं कि अगला मौका मदन मोहन छाबड़ा को नहीं मिलेग,क्योंकि उनकी जगह एक महिला को मानद सचिव पद पर मनोनीत किया जा रहा है।
इस चर्चा के साथ केडीबी मे रुचि रखने वालों की नजर 360 डिग्री पर घूम कर यह पता लगाने में एक दूसरे को फोन कर घंटियां घनघना रही है कि नया चेहरा कौन होगा ? कुछेक ने बकायदा सरनेम बता कर स्पष्ट भी कर दिया है कि इस सरनेम की महिला अगली मानद सचिव हो सकती हैं। बस विस्फोट मुद्रा इसी से खासकर दो समाज में देख रही है। पहला ब्राह्मण समाज और दूसरा अग्रवाल समुदाय। इनमें गुस्सा इस बात लेकर उभर रहा है कि उनके समाज उपेक्षा क्यों ? भाजपा और संघ में ब्राह्मण,क्षत्रिय, अग्रवाल और अन्य समुदाय से भी कई प्रतिष्ठित चेहरे जुड़े हैं,इन्हें नजरंदाज क्यों किया जा रहा है ? यह सवाल खड़े हो रहे हैं।
छन कर सूचना तो यह भी आ रही है कि आस्ट्रेलिया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के बाद ही कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के 10 गैर सरकारी सदस्यों और मानद सचिव के पद पर सरकार फैसला लेगी। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में स्वामी ज्ञानानंद महाराज की बड़ी भूमिका है और उन्हें के आशीर्वाद से छाबड़ा को लगातार एक्सटेंशन देकर पांच साल तक मानद सचिव पद पर कायम रखा गया और राजनेता के महाअभियान को दरकिनार कर इस बार भी मदन मोहन छाबड़ा ही मानद सचिव होंगे,इसकी जानकारी भी दी जा रही है। यानी एक दिन पहले नगर में जो चर्चा भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के एक करीबी के परिवार से जुड़ी महिला को केडीबी के मानद सचिव बनाने की कवायद पर अटकलें शुरु हुईं थी,वह अभी पूरी तरह दम तोड़ चुकी हैं या कायम है,इसका उत्तर भी फिलहाल भविष्य के गर्भ में है। अब कौन,किसे और कैसे धोबी पछाड़ देकर मानद सचिव पद तक पहुंचता है,केडीबी के इसी दंगल पर सबकी नजर होगी। वैसे पर्दे के पीछे इस पूरी रस्साकशी में दो धर्मगुरुओं की ताकत लगने वाली है और तय माना जा रहा है कि नतीजे उसी पर निर्भर करने वाले हैं।