कुरुक्षेत्र का ब्रह्मसरोवर है अनोखी धरोहर, उपाध्यक्ष ने विश्व धरोहर दिवस पर दी बधाई और शुभकामनाएं
न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र। हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुमन सिंह किरमच ने कहा कि धर्मक्षेत्र-कुरुक्षेत्र के कण-कण में इतिहास, विरासत और धरोहर नजर आती है। इस गीता स्थली कुरुक्षेत्र की धरोहरों को सहेजने का काम प्रदेश और केंद्र सरकार की तरफ से बखूबी किया जा रहा है। आज पूरे विश्व में कुरुक्षेत्र अपनी एक अलग पहचान बना चुका है। इस धरा में सन्निहित सरोवर, ब्रह्मसरोवर, शेख चेहली मकबरा, ज्योतिसर तीर्थ, सरस्वती तीर्थ पिहोवा और 48 कोस की भूमि पर भी धरोहर और इतिहास नजर आते है।
उपाध्यक्ष धुमन सिंह ने प्रदेश वासियों की विश्व धरोहर दिवस की बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विश्व विरासत दिवस प्रतिवर्ष 18 अप्रैल को दुनिया भर में मनाया जाता है। इस दिन को स्मारकों और स्थलों के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य यह है कि पूरे विश्व में मानव सभ्यता से जुड़े ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों के महत्व,उनके अस्तित्व के सम्भावित खतरों व उनके संरक्षण के प्रति जागरूकता लाई जा सके। वर्ष 1982 में इकोमार्क नामक एक संस्था ने ट्यूनीशिया में अंतर्राष्ट्रीय स्मारक और स्थल दिवस का आयोजन किया था उस सम्मेलन में यह विचार भी व्यक्त किया गया कि विश्व भर में जागरूकता के प्रसार के लिए विश्व विरासत दिवस का आयोजन किया जाना चाहिए। इसके बाद 18 अप्रैल को विश्व विरासत दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव 1982 में अंतरराष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल परिषद ने लाया गया, 1983 में संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनेस्को की महा सभा के सम्मेलन में इसके अनुमोदन के बाद प्रतिवर्ष 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस के रूप में मनाने के लिए घोषणा की गई।
उन्होंने कहा कि इससे पहले यूनेस्को की पहल पर विश्व के सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए सन् 1972 में एक अंतर्राष्ट्रीय संधि भी की गई थी। इन धरोहर स्थलों को 3 श्रेणियों में शामिल किया जाता है, जिनमें सांस्कृतिक धरोहर स्थल, ऐसे स्थल जो ऐतिहासिक, सांस्कृतिक अथवा कलात्मक दृष्टि से महत्व रखते है। प्राकृतिक धरोहर स्थल, ऐसे स्थल जो पर्यावरण व पारिस्थितिकी के कोण से महत्वपूर्ण है तथा मिश्रित धरोहर स्थल, ऐसे स्थल जो दोनों पर्यावरण व पौराणिकता की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में कई ऐसे ऐतिहासिक धरोहरें हैं, जो सालों से अपने अंदर न जाने कितने किस्से और कहानियों को संजोए हुए है। इन स्मारकों और स्थलों को देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। ऐसी विरासतों को संभाले रखने के लिए ही विश्व विरासत दिवस मनाया जाता है।