Home haryana बदज़ुबानी मामले में राहुल गांधी की याचिका खारिज होने पर भाजपा नेता प्रो. विधु रावल की प्रतिक्रिया

बदज़ुबानी मामले में राहुल गांधी की याचिका खारिज होने पर भाजपा नेता प्रो. विधु रावल की प्रतिक्रिया

by ND HINDUSTAN
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देश के कानून से खुद को  ऊपर समझता है नेहरू खानदान:  प्रो. विधु रावल

न्यूज डेक्स संवाददाता

चंडीगढ़। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता प्रो. विधु रावल ने कहा कि माननीय गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा राहुल गांधी की मानहानी मामले में याचिका खारिज करते हुए सजा को बरकरार रखने का जो फैसला दिया है वह स्वागत योग्य है।  उन्होंने कांग्रेस की मानसिकता पर तंज कसते हुए कहा कि अगर आज देश में कांग्रेस सत्ता में होती तो फैसले के खिलाफ तानाशाही रवैया अपनाते हुए लोकतंत्र की हत्या करने से भी गुरेज नहीं करती और देश को आपातकाल की भट्टी में फिर से झोंक देती! कांग्रेस ऐसा पहले भी कर चुकी है। इस पूरे प्रकरण में राहुल गांधी का व्यवहार गैरजिम्मेदाराना और अहंकारी रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नेहरू  खानदान खुद को देश के कानून से उपर समझता रहा है। 

प्रो. विधु रावल ने कहा कि देश के लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करना राहुल गांधी की फितरत में शामिल है। इससे पहले भी राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राफेल मामला और वीर सांवरकर मामले में माफी मांग चुके हैं। ‘मोदी उपनाम’ पर राहुल गांधी ने बदजुबानी कर ओबीसी समाज का अपमान करने का घोर अपराध किया है। अगर वे इस मामले में भी माफी मांग लेते तो आज उनको यह दिन नहीं देखना पड़ता। प्रो. रावल ने कहा कि मुंह में चांदी की चम्मच लेकर पैदा हुए राहुल गांधी को देश की गरिमा की कोई चिंता नहीं है, इसलिए वे विदेशों में जाकर भी देश के खिलाफ बोलकर राष्ट्र का अपमान करते रहते हैं।

कांग्रेस की सामंतवादी और वंशवादी सोच पर कटाक्ष करते हुए हुए बीजेपी नेता रावल ने कहा कि राहुल गांधी की अपनी जुबान पर कोई नियंत्रण नहीं है। बदजुबानी करना और लोगों का अपमान करना वे अपना अधिकार समझते हैं। अदालत ने उनको माफी मांगने का मौका भी दिया था लेकिन उन्होंने इससे इंकार कर दिया। यही अहंकार धीरे-धीरे राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के पतन का कारण बनता जा रहा है।

भाजपा नेता ने कहा कि ऐसा ही मामला 12 जून 1975 को आया था, जब माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जगमोहन लाल सिन्हा ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाधी का चुनाव रद्द करते हुए उन्हें तत्काल प्रधानमंत्री पद छोड़ने का आदेश दिया था। 25 जून 1975 को सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद इंदिरा गांधी ने देश को आपातकाल की आग में झोंक दिया। मीसा कानून के तहत एक लाख से ज्यादा विपक्षी नेताओं और कांग्रेस के खिलाफ बोलने वालों को जेल में डाल दिया और अमानवीय यातनाएं दी। प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी और अदालतों पर ताला लगाकर लोकतंत्र की हत्या की तथा नसबंदी जैसे तालिबानी फरमान जारी कर दिए। 

प्रो. विधु रावल ने कहा कि जो लोग अपने आपको कानून से ऊपर समझते हैं उनको आज के फैसले से जरूर नसीहत मिलेगी। इस फैसले से बदजुबानी करने वाले नेताओं और लोगों की जुबान पर निश्चित तौर पर लगाम लगेगी। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर राहुल गांधी को सबक सिखाने का काम किया है। हालांकि उनके पास सुप्रीम कोर्ट जाने का मौका है।

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