मातृभूमि सेवा मिशन के तत्वावधान में मॉरीशस गणराज्य के पूर्व राष्ट्रपति सर अनिरुद्ध जगन्नाथ की तृतीय पुण्यतिथि के उपलक्ष्य पर मातृभूमि शिक्षा मंदिर आयोजित कार्यक्रम आयोजित
न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र। अगर भारत से हजारों किलोमीटर दूर बसे मॉरीशस को लघु भारत कहा जाता है तो इसका श्रेय़ मॉरीशस गणराज्य के पूर्व राष्ट्रपति सर अनिरुद्ध जगन्नाथ जैसे वहां के जन नेताओं को है। सर अनिरुद्ध जगन्नाथ भारत एवं मॉरीशस दोनों देशों के लोगों को सांस्कृतिक और भाषा के स्तर पर जोड़े रखने की जीवनपर्यंत कोशिशें की। सर अनिरुद्ध जगन्नाथ का वैदिक सनातन संस्कृति भारतीय जीवन मूल्यों से अगाध प्रेम था। सर अनिरुद्ध जगन्नाथ मॉरीशस के प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति दोनों ही पदों पर रहे थे। यह विचार मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने मॉरीशस गणराज्य के पूर्व राष्ट्रपति सर अनिरुद्ध जगन्नाथ की तृतीय पुण्यतिथि के अवसर पर मातृभूमि शिक्षा मंदिर द्वारा आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किये। कार्यक्रम का शुभारम्भ सर अनिरुद्ध जगन्नाथ के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन, माल्यार्पण एवं पुष्पार्चन से हुआ। मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों ने सर अनिरुद्ध जगन्नाथ को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने सर अनिरुद्ध जगन्नाथ को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा मातृभूमि सेवा मिशन के सेवा कार्यो से उनका बहुत ही आत्मीय लगाव था और मातृभूमि सेवा मिशन के निमंत्रण पर कई भारत की यात्रा की। सर अनिरुद्ध जगन्नाथ द्वारा 16 दिसंबर 2008 को एक भवन की आधारशिला रखी गई थी। मिशन आयोजित 06 दिसम्बर 2009 उनका काशी में नागरिक अभिनन्दन किया गया और और उन्हें महामना की उपाधि से सम्मानित किया गया था। मॉरीशस गणराज्य के पूर्व राष्ट्रपति अपने देश के एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने देश में प्रत्येक स्तर पर एक निर्वाचित सदस्य के रूप में कार्य किया, उन्होंने पहली बार गांव और नगर पार्षद के रूप में कार्य किया। इसके बाद उन्होंने संसद सदस्य के रूप में कार्य किया।ब्रिटिश सरकार उनके पुरखों को गिरमिटिया श्रमिक के रूप में मॉरीशस लेकर गई थी। इन श्रमिकों ने दुनिया के विभिन्न हिस्सों में कमाल की जीवटता दिखाई और घोर परेशानियों से संघर्ष करते अपनी पहचान स्थापित की। इन भारतीय श्रमिकों ने लंबी समुद्री यात्राओं के दौरान अनेक कठिनाइयों को झेला। अपने देश से हजारों किलोमीटर दूर जाकर बसने के बावजूद इन्होंने अपने संस्कारों को नहीं छोड़ा। सर अनिरुद्ध जगन्नाथ के लिए अपना धर्म, भाषा और संस्कार बेहद खास थे।
डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा भारत और मॉरीशस के बीच संबंध असाधारण है जो साझी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत पर आधारित है। भारत और मॉरीशस के स्वतंत्रता संघर्षों को एक दूसरे से प्रेरणा एवं ऊर्जा मिलती है। भारत हमेशा से मॉरीशस का दृढ़ मित्र रहा है।भारतवंशी अपने साथ तुलसी रामायण, हिन्दी भाषा, खान पान एवं परंपराओं के रूप में भारत की संस्कृति ले कर गए थे। मॉरीशस में रह रहे भारतीय समुदाय को अपनी विरासत एवं भारत पर गर्व है। भारत सरकार ने सर अनिरुद्ध जगन्नाथ को 2020 में पद्म विभूषण सम्मान से सम्मानित किया। भारत और हिन्दी के प्रति अपने खास लगाव के लिए पहचाने जाने वाले अनिरुद्ध जगन्नाथ को प्रथम प्रवासी भारतीय सम्मान से नवाजा गया था। वास्तव में सर अनिरुद्ध जगन्नाथ भारत एवं भारतीयों के उपासक थे। वह एक बेमिसाल व्यक्तित्व के धनी थे। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ से हुआ। कार्यक्रम में आश्रम के विद्यार्थी, सदस्य एवं अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे।