न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र। महाभारतकालीन कुरुक्षेत्र के 48 कोस क्षेत्र में कुरुक्षेत्र जिला का गांव कमोदा यह क्षेत्र पुराणों में वर्णित है काम्यक वन के नाम से यहीं पर विराजमान हैं भगवान श्री काम्यकेश्वर महादेव,जहां श्रावण के पहले सोमवार को यहां शिवलिंग पर श्रद्धालुओं द्वारा जलाभिषेक और रुद्राभिषेक बाद भव्य रुप में सजाया गया । उल्लेखनीय है कि यह पौराणिक मंदिर सदियों से श्रद्धालुओं के लिए आस्था और विश्वास का केंद्र बना हुआ है। यहां देसी कलेंडर के हिसाब से हर साल शुक्ल सप्तमी मेला लगता है,जिसमें दूर दूर से श्रद्धालु यहां पूजा अर्चना और भंडारा प्रसाद समर्पण करने पहुंचते हैं। धर्मग्रंथों के अनुसार महाभारत काल में यहां पांडव वनवास के दौरान ठहरे थे और यहीं तपस्या भी की थी।
पांडवों को काम्यक वन तक पहुंचने के लिए तीन दिन और तीन रातों की यात्रा करने का वर्णन भी धर्मग्रंथों और महाभारत में मिलता है। उनके आगमन पर, भीम ने क्रिमिरा नाम के एक राक्षस का वध किया था, क्योंकि उसने उनका रास्ता रोका था। ऋषि व्यास के साथ बातचीत के बाद , युधिष्ठिर और उनके भाई द्वैतवन से काम्यकवन लौट आए और बताया गया है कि उन्होंने धनुर्विद्या का अभ्यास किया।वर्तमान इस प्राचीन तीर्थ की देख रेख श्रीजयराम संस्था और कमोदा वासियों के हाथों में है। पंडित शमिंद्र शास्त्री के मुताबिक इस पर साल भर विशेष अवसरों पर श्रद्धालु दूर दूर से मन्नत मांगने के लिए पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि इस पवित्र पौराणिक तीर्थ का गौरवशाली अतीत है। इस पवित्र स्थल से अनेक पौराणिक घटनाक्रम जुड़े,जिनका जिक्र ग्रंथों में मिलता है।