न्यूज डेक्स इंडिया
दिल्ली।केंद्र सरकार ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को लेकर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक कमेठी का गठन किया है। पूर्व राष्ट्रपति की अध्यक्षता में बनी यह कमेटी कानून के सभी पहलुओं पर विचार करेगी। इसी के साथ यह कमेटी एक देश, एक चुनाव की संभावना का पता लगाएगी। यह कमेटी लोगों की राय भी लेगी। भारत में साल 1967 तक लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ हुए थे,लेकिन, 1968 और 1969 में कुछेक विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर दिया गया था,जिसके बाद 1970 में लोकसभा को भंग कर दिया गया था। इसी के कारण देश और राज्यों में चुनावी कार्यक्रमों में बदलाव करने नौबत आई थी।
अब केंद्र सरकार ने एक देश एक चुनाव को लेकर कमेटी गठित की है
उम्मीद जताई जा रही है कि संसद के स्पेशल सेशन में यह बिल आ सकता है। स्पेशल सेशन में 5 संभावनाएं हैं। महिलाओं के लिए संसद में एक-तिहाई अतिरिक्त सीट देना।नए संसद भवन में शिफ्टिंग। यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पेश हो सकता है। लोकसभा-विधानसभा चुनाव साथ कराने का बिल आ सकता है। आरक्षण पर प्रावधान संभव है। ओबीसी की केंद्रीय सूची के उप-वर्गीकरण, आरक्षण के असमान वितरण के अध्ययन के लिए 2017 में बने रोहिणी आयोग ने 1 अगस्त को राष्ट्रपति को रिपोर्ट दी है। सरकार महिलाओं को 33% आरक्षण देने की जगह लोकसभा में उनके लिए 180 सीटें बढ़ा सकती है। ऐसी व्यवस्था 1952 और 1957 के चुनाव में एससी-एसटी सीटों के लिए थी। तब 89 व 90 सीटों पर एक से अधिक प्रत्याशी चुने जाते थे। बाद में डिलिमिटेशन होने पर व्यवस्था खत्म हो गई।
अभी जिन सीटों पर वोटर 20 लाख से ज्यादा हो गए हैं, वहां एक सामान्य और एक महिला उम्मीदवार चुनने की व्यवस्था की जा सकती है। देश में ऐसी 180 सीटें हैं, जहां वोटर 18 लाख से ज्यादा हैं। सभी दल महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग करते रहे हैं। माना जा रहा है कि सरकार यह कदम उठाता 2024 में एतिहासिक होगा।