अभिभावक बताते हैं कि जेनिसिस क्सासिस के जितेंद्र अहलावत ने उनकी सोच को बदला-कर्नल अरुण दत्ता
शामली को आदर्श जिला बनाने में अपना योगदान दें शिक्षक-जितेंद्र अहलावत
न्यूज डेक्स उत्तर प्रदेश
शामली। उत्तर भारत के सर्वश्रेष्ठ संस्थान जेनिसिस क्लासिस ने शिक्षकों के सम्मान कार्यक्रम में 107 शिक्षकों को शिक्षा के क्षेत्र में उनकी सेवाओं के लिए विशेष रुप से सम्मानित किया। यह सम्मान भारत के दो सैनिक स्कूलों और एक सेना स्कूल में बतौर प्रिंसीपल सेवाएं दे चुके कर्नल अरुण दत्ता ने दिया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के प्रति श्रद्धा सुमन एवं दीप प्रज्जवलित के बाद हुआ। कार्यक्रम के पहले चरण में वातावरण को खुशनुमा बनाया अभिनय की भाव भंगिमाओं ने। इस खेल को नाम दिया गया था…जाने भी दो यारों। कई शिक्षकों ने मूक अभिनय किया और जवाब दिया,दर्शक दीर्घा में बैठे अन्य शिक्षकों ने। उलट पलट जवाव मिलने पर यहां हंसी की खूब फुहारें भी छूटी,लेकिन कुछ ही क्षण बाद जब कर्नल दत्ता ने बतौर मुख्यातिथि और जेनिसिस क्लासिस के निदेशक जितेंद्र अहलावत ने अपना अपना संबोधन शुरु किया तो इस दौरान शिक्षक टकटकी लगाए सुनते रह गए।

कर्नल दत्ता ने शिक्षक और अभिभावकों की बच्चे के प्रति मर्यादित आचरण के साथ शिक्षकों और अभिभावकों की नैतिक जिम्मेदारी को बताया। साथ ही साथ अमेरिका के महान राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के उस पत्र का जिक्र भी किया,जिसे तत्कालीन राष्ट्रपति ने अपने बेटे के शिक्षक को लिखा था। कर्नल दत्ता ने कहा कि जेनिसिस क्लासिस ने हरियाणा और उत्तर प्रदेश में जो वातावरण तैयार किया है,वह आइडियल है।अभिभावकों से जब भी चर्चा होती है तो उनमें अधिकांश यह बताना नहीं भूलते कि जितेंद्र अहलावत सर ने हमारी सोच बदली है। वह तो सिर्फ अपने बच्चों से पटवारी,पुलिस कांस्टेबल और क्लर्क या अन्य कोई छोटी मोटी सरकारी नौकरी तक की उम्मीद लगा रहे थे,लेकिन जेसिसिस क्लासिस के जीतेंद्र अहलावत ने उनकी सोच को बदल कर रख दिया। अब उनके बच्चे आईईटी कर उच्च कोटी के इंजीनियर और देश के प्रतिष्ठित मेडिकल कालेजों में पढ़ कर डाक्टर बन रहे हैं।

कर्नल दत्ता ने अपने संबोधन में देश के तीन सैनिक स्कूलों में बतौर प्रिंसीपल अपने अनुभवों को शिक्षकों से साझा किया।वहीं उन्होंने तमाम स्कूल प्रिंसीपल और मैनेजमेंट से यह अपील की कि जो करना है वह शिक्षक को करना है। स्कूलों को शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्धियों से परिपूर्ण करना है तो उसमें अगर कोई विशेष भूमिका निभा सकता है तो वह सिर्फ शिक्षक ही है।उन्होंने कहा कि जिन शिक्षकों ने अपनी कक्षा में श्रद्धा भाव से पढ़ाया है उनके अपने बच्चे सफलता अर्जित करते हैं। उन्हें यह हमेशा ध्यान रखना होगा कि यह एक ईश्वरीय कार्य है,जिसका दायित्व उनके कंधों पर है,इसे उन्हें पूरी निष्ठा से निभाने की आवश्यकता है।
वहीं जेनिसिस क्लासिस के निदेशक जितेंद्र अहलावत ने अध्यक्षीय संबोधन में शिक्षकों से अपील की कि वे शामली को आदर्श जिला बनाने में अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि शिक्षा में गुणवत्ता के लिए इस क्षेत्र के सभी शिक्षकों का सतत प्रयास करते रहना चाहिए। इसकी बड़ी जिम्मेदारी शिक्षकों के कंधों पर है। उन्होंने कहा कि बच्चों की नजर में उसका शिक्षक एक हीरो जैसा होता है,लेकिन शिक्षक की यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह आंतरिक रुप से भी अपने विद्यार्थियों के लिए हीरो जैसा बने।अहलावत ने कहा कि इस क्षेत्र का अलग लेवल है। इस क्षेत्र से एनडीए,आईईटी और मेडिकल के क्षेत्र में बच्चे बड़ी संख्या में जा सकते हैं।उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे शिक्षा देने के साथ साथ अच्छे आचरण और नैतिक मूल्यों पर फोकस करें। वह स्वयं क्लास में पढ़ाई शुरु करने से पहले गीता के श्लोक से आगे की कार्रवाई शुरु करते हैं,यदि वे भी इस विधि को अपनाएंगे, इसके शानदार परिणाम पाएंगे। अहलावत ने कहा कि शामली से मेरा अपनत्व का नाता है और हमारा लक्ष्य है इस क्षेत्र में उपलब्धियां हासिल करने वाले विद्यार्थियों की संख्या में और इजाफा हो।
मुझे करनाल को कोटा नहीं बनाना है,जेनिसिस का फोकस बेहतर इंसान,श्रेष्ठ ज्ञान
उत्तर भारत के सर्वश्रेष्ठ संस्थान जेनिसिस क्लासिस के निदेशक ने कहा कि मुझे करनाल को कोटा नहीं बनाना,ना ही कोटा जैसा कोई बड़ा कोई नामी संस्थान बनाना है। यह चाहत इसलिए नहीं है,क्योंकि जो भयावह वातावरण वहां तैयार हुआ है,उससे स्वयं भयभीत हो जाता हूं कहीं कोटा जैसा वातावरण का सामना ना करना पड़े। जेनिसिस का पूरा फोकस बेहतर इंसान और श्रेष्ठ ज्ञान पर है।उन्होंने शिक्षकों और बच्चों से अपील की कि वे टेंशन और डिप्रेशन फ्री रहे और अभिभावक अपने बच्चों पर जबरदस्ती का प्रेशर ना डालें। बच्चों पर जबरदस्ती का प्रेशर डालना गलत है। उन्होंने कहा कि डाक्टर इंजीनियर बनाने की चाहत बुरी नहीं,मगर जबरदस्ती का प्रेशर गलत है। अभिभावक अपने बच्चों को बेहतर इंसान बनाने पर ध्यान दें। इसके बाद वे डाक्टर या इंजीनियर बने या ना बनें,लेकिन अच्छे इंसान बनकर अच्छा करियर जरुर बना लेंगे।
मेरे लिए जेनिसिस क्लासिस मंदिर और अहलावत सर हमारे लिए भगवान से कम नहीं
शामली वासी संजय शर्मा ने कहा कि जेनिसिस क्लासिस मेरे लिए मंदिर और जितेंद्र अहलावत जी मेरे लिए भगवान की तरह है। उनका बच्चा कोटा में पढ़ते हुए कोई अच्छा रिस्पांस नहीं दे पा रहा था,लेकिन जेनिसिस क्लासिस ने उसे वो मुकाम दिया जिसकी चाहत हमारे बच्चे और पूरे परिवार ने की थी।
जेनिसिस और अपनी बेटी के बारे में बताते हुए भावुक हुईं शिक्षिका
शिक्षक रीमा गोयल ने जेनिसिस क्लासिस के प्रति अपनी भावना व्यक्त करते हुए भावुक हो गई। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी सिया गोयल जेसिसिस की छात्रा है।उनकी बेटी को सुरक्षित और पढ़ाई के लिए श्रेष्ठ वातावरण इस संस्थान में मिल रहा है।