मुख्यमंत्री के निजी सचिव अभिमन्यु ने सांध्यकालीन आरती में की शिरकत
मेहमानों को स्मृति चिन्ह देकर किया सम्मानित, एनजेडसीसी के कलाकारों ने दी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति
न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र।मुख्यमंत्री के निजी सचिव अभिमन्यु ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के उपदेश पवित्र ग्रंथ गीता में है, जो मनुष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जिसे हर मनुष्य को जानना बहुत जरुरी है। श्रीमद्भगवद्गीता वर्तमान में धर्म से ज्यादा जीवन के प्रति अपने दार्शनिक दृष्टिकोण को लेकर भारत में ही नहीं विदेशों में भी लोगों का ध्यान अपनी और आकर्षित कर रही है। निष्काम कर्म का गीता का संदेश विश्व के सभी गीता प्रेमियों को भी लुभा रहा है। पवित्र ग्रंथ गीता विश्व के सभी धर्मों की सबसे प्रसिद्ध पुस्तकों में शामिल है।
मुख्यमंत्री के निजी सचिव अभिमन्यु रविवार को देर सायं ब्रह्मसरोवर पुरुषोत्तमपुरा बाग में महोत्सव के गीता महाआरती कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में बोल रहे थे। इससे पहले मुख्यमंत्री के निजी सचिव अभिमन्यू, अतिरिक्त उपायुक्त एवं केडीबी सीईओ अखिल पिलानी, केडीबी मानद सचिव उपेंद्र सिंघल, कुरुक्षेत्र 48 कोस तीर्थ निगरानी कमेटी के चेयरमैन मदन मोहन छाबड़ा, केडीबी सदस्य अशोक रोशा, डा. ऋषिपाल मथाना, कैप्टन अमरजीत सिंह, डा. एमके मोदगिल, विजय नरुला सहित अन्य गणमान्य लोगों ने अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव पर ब्रह्मसरोवर की आरती और पूजा-अर्चना की तथा दीपशिखा प्रज्ज्वलित कर विधिवत रुप से आरती का शुभारम्भ भी किया।
इस आरती का गुणगान पंडित बलराम गौतम, पंडित सोमनाथ शर्मा, गोपाल कृष्ण गौतम, अनिल व रुद्र ने किया। इस महाआरती के बाद उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक कला केंद्र पटियाला की तरफ से पुरुषोत्तमपुरा बाग में सायं कालीन कार्यक्रम में बेहतरीन सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई। इन प्रस्तुतियों में विभिन्न प्रदेशों की लोक संस्कृति, लोक कला, संगीत, वाद्य यंत्रों की धुनों को सुनकर हर किसी ने प्रशंसा की है।मुख्यमंत्री के निजी सचिव अभिमन्यू ने कहा कि 5160 वर्ष पूर्व भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की भूमि पर गीता का उपदेश दिया और महर्षि वेद व्यास ने पवित्र ग्रंथ गीता को प्रकट किया। श्रीमद्भगवद्गीता हिन्दुओं के पवित्रतम ग्रन्थों में से एक है। महाभारत के अनुसार कुरुक्षेत्र युद्ध में भगवान श्री कृष्ण ने गीता का सन्देश अर्जुन को सुनाया था।
गीता में एकेश्वरवाद, कर्म योग, ज्ञानयोग, भक्ति योग की बहुत सुन्दर ढंग से व्याख्या की गई है। पवित्र ग्रंथ गीता के उपदेश आज भी हमारे जीवन के रहस्यों को उजागर करते है, आज का इंसान जीवन की मोह माया में पड़ा रहता है। भगवत गीता का ज्ञान ही हमें इस संसारिक मोह-माया के बंधन से आजाद कर सकता है। गीता का ज्ञान ही स्वयं को और सर्वशक्तिशाली ईश्वर को पहचानने का अवसर देता है। इस कार्यक्रम के अंत में केडीबी की तरफ से सभी मेहमानों व केडीबी के अधिकारियों व कर्मचारियों को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर एनजेडीसीसी के अधिकारी राजेश बस्सी, जरनैल सिंह, राधेश्याम सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।