Home haryana नेताजी की जीवनी पर शोध व नसीबपुर के 1857 की क्रांति के महानायकों के लिए संग्रहालय बनाए भारत सरकार: डॉ.विश्वकर्मा

नेताजी की जीवनी पर शोध व नसीबपुर के 1857 की क्रांति के महानायकों के लिए संग्रहालय बनाए भारत सरकार: डॉ.विश्वकर्मा

by ND HINDUSTAN
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से डॉ.आर.के.जांगड़ा विश्वकर्मा ने की मांग,दी नेताजी सुभाष चंद्र बोस को श्रद्धांजली

न्यूज डेक्स संवाददाता

नारनौल। देश की आजादी के महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती नेताजी सुभाष चंद्र बोस पार्क नारनौल  स्थित प्रतिमा पर माल्यार्पणकर कर जय हिंद,भारत माता की जय और वंदे मातरम के उद्घोष के साथ मनायी गई। कार्यक्रम में नेताजी के निकट सहयोगी आजाद हिंद फौज के स्वतंत्रता सेनानी स्व.बहादुर सिंह की सुपुत्री शिक्षाविद उर्मिला यादव को सम्मानित किया गया।इस अवसर पर उर्मिला यादव ने कहा नेताजी सुभाष चंद्र बोस एक महान क्रांतिकारी थे जो अंग्रेजी से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करना चाहते थे। नेताजी की जीवनी और कठोर त्याग आज के युवाओं के लिए बहुत ही प्रेरणादायक है।सामाजिक कार्यकर्ता देव शर्मा ने कहा नेताजी सुभाष चंद्र बोस की राष्ट्रवादी सोच ने उन्हें भारतीय इतिहास के सबसे महान स्वतंत्रता सेनानियों में से एक बना दिया था। प्रोफेसर जया शर्मा ने नेताजी का एकमात्र लक्ष्य था कि भारत को आजाद करवाना। अंग्रेजों की गुलामी की वजह से उन्होंने भारतीय सिविल सेवा की नौकरी से त्यागपत्र दिया था।भाजपा ओबीसी मोर्चा के मंडल अध्यक्ष सुशील कुमार ने कहा नेताजी का बलिदान युवाओं को देशभक्ति के लिए प्रेरित करता रहेगा।

 कार्यक्रम के संयोजक डॉ.आर.के.जांगड़ा विश्वकर्मा ने कहा नेताजी सुभाष चंद्र बोस विवेकानंद की शिक्षाओं से अत्यधिक प्रभावित थे और उन्हें अपना आध्यात्मिक और चितरंजन दास को राजनीतिक गुरु मानते थे।उन्होंने शोध के पश्चात “दि इंडियन स्ट्रगल” नामक पुस्तक का पहला भाग लिखा जिसमें उन्होंने 1920 से 1934 के दौरान देश के सभी स्वतंत्रता आंदोलन को शामिल किया। 1938 में राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष निर्वाचित होने की पश्चात उन्होंने राष्ट्रीय योजना आयोग का गठन किया।द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने के लिए उन्होंने जापान के सहयोगियों से आजाद हिंद फौज का गठन किया। उनका ‘जय हिंद’ और ‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ का नारा राष्ट्रीय नारा बन गया।डॉ. विश्वकर्मा ने कहा कुछ इतिहासकारों का मानना है कि नेताजी जापान और जर्मनी से मदद लेने के कारण ब्रिटिश सरकार को यह बात खटक थी और गुप्तचरों से 1941 में उन्होंने नेताजी को खत्म करने का आदेश दिया था।

 5 जुलाई 1943 को सिंगापुर के टाउन हाल से सुप्रीम कमांडर के रूप में ‘दिल्ली चलो’ का नारा नेताजी ने दिया था। 21 अक्टूबर 1943 को नेताजी ने आजाद हिंद फौज की स्वतंत्र भारत की अस्थाई सरकार बनाई जिसे 11 देशों ने मान्यता प्रदान की। 30 दिसंबर 1943 को उन्होंने भारतीय तिरंगा अंडमान में फहराया। आजाद हिंद रेडियो पर  महात्मा गांधी को 6 जुलाई 1944 को राष्ट्रपिता के नाम से संबोधित किया। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सत्कार के कारण राष्ट्रवादी पीएम नरेंद्र मोदी ने नेताजी की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की इंडिया गेट पर ऐतिहासिक प्रतिमा लगाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम में पीएम मोदी से नेताजी की जीवनी पर शोध करने और नसीबपुर के 1857 की क्रांति की महानायकों की याद में राष्ट्रीय स्मारक बनाने की मांग की गई। कार्यक्रम में आजादी के महानायक रासबिहारी बॉस व बाल ठाकरे को भी नमन किया गया।इस अवसर पर महेंद्र यादव,देव शर्मा, सुशील कुमार,कृष्ण शर्मा, सुशील यादव,ममता यादव,अर्चिता रानी,निधि शर्मा,सतीश वाल्मीकि, राजकुमार,अरुण सिंह, अमन शर्मा,राजेश शर्मा,आकाश जांगड़ा, ओमप्रकाश यादव, रामनिवास यादव,रामस्वरूप सागवान आदि विशेष रूप से उपस्थित थे।

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