Home haryana भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति  में भारतीय ज्ञान प्रणाली  शिक्षार्थियों के बीच पहचान और गौरव की भावना को बढ़ावा देने  हेतु  रणनीतिक कदम है : प्रो. गोयल

भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति  में भारतीय ज्ञान प्रणाली  शिक्षार्थियों के बीच पहचान और गौरव की भावना को बढ़ावा देने  हेतु  रणनीतिक कदम है : प्रो. गोयल

by ND HINDUSTAN
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न्यूज डेक्स संवाददाता

कुरुक्षेत्र।भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति  में भारतीय ज्ञान प्रणाली  शिक्षार्थियों के बीच पहचान और गौरव की भावना को बढ़ावा देने  हेतु  रणनीतिक कदम है।“ ये शब्द पूर्व कुलपति  एवं नीडोनॉमिक्स स्कूल ऑफ थॉट के प्रवर्तक प्रो मदन मोहन गोयल जो  कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त अर्थशास्त्र के प्रोफेसर ने  कहे ।  वह श्याम लाल कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) के सहयोग से  मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) राष्ट्रीय शैक्षिक योजना और प्रशासन संस्थान (एनआईईपीए) दिल्ली    द्वारा आयोजित ऑनलाइन एनईपी ओरिएंटेशन और सेंसिटाइजेशन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। ‘.  उनका विषय ‘नैतिक परिप्रेक्ष्य के साथ प्रभावी अनुसंधान डिजाइन तैयार करना’  था  I एमएमटीटीसी की निदेशक प्रोफेसर मोना खरे ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। कार्यक्रम बैच समन्वयक डॉ.  सुश्री  शिवाली खरबंदा, एसोसिएट प्रोफेसर, एसएलसी ने  स्वागत भाषण दिया एवं प्रो एम.एम. गोयल की उपलब्धियों पर एक प्रशस्ति पत्र प्रस्तुत किया।

प्रो. गोयल का मानना है कि  ज्ञान अर्थव्यवस्था में   रचनात्मकता, शिक्षा और ज्ञान की देवी सरस्वती हमें लक्ष्मी, धन और समृद्धि उत्पन्न करने में मदद करती हैंIप्रो गोयल ने बताया  देवी सरस्वती अपने वाहन के रूप में हंस का उपयोग करती हैं जिसमें एक संवेदनशील चोंच होती है जो इसे दूध और पानी के मिश्रण से दूध में अंतर करने में सक्षम बनाती है और अच्छे और बुरे, मूल्यवान और बेकार के बीच अंतर करने की शक्ति का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि जीवन के जल में तैरने   हेतु सरस्वती द्वारा वाहन के रूप में हंस का उपयोग एक मजबूत निर्णय शक्ति की महत्वपूर्ण आवश्यकता को दर्शाता है  एवं हमें स्वयं और समाज की भलाई के लिए विवेक के साथ ज्ञान का उपयोग सिखाती  है ।

प्रो. गोयल ने कहा कि हमें नीडो-लाइफस्टाइल  हेतु  गीता-आधारित नीडोनोमिक्स को समझना चाहिए, जो अध्याय 09  के श्लोक संख्या 22 पर आधारित एलआईसी ऑफ इंडिया के लोगो ‘योगक्षेमम वहाम्यहम’ से लिया गया है  एवं नीडोनोमिक्स  सामान्य ज्ञान दृष्टिकोण को नैतिक, अहिंसक, पर्यावरण के अनुकूल और आध्यात्मिक प्रकृति का बताया गया हैI

प्रो, गोयल का मानना है कि हम देवी सरस्वती की योग्य संतान बनकर आलोचनात्मक सोच और ज्ञान विकसित कर सकते हैं और ध्यान रखें कि जहां सरस्वती का वास होता है, वहां देवी लक्ष्मी का आगमन शीघ्र होता है।प्रो. गोयल ने कहा कि  भारतीय ज्ञान प्रणाली पर आधारित शिक्षा की एक नई कहानी लिखने हेतु , हमें स्ट्रीट स्मार्ट (सरल, नैतिक, कार्य-उन्मुख, उत्तरदायी और पारदर्शी) बनना होगा ।

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