मातृभूमि शिक्षा मंदिर द्वारा विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का महत्व विषय पर आयोजित बाल संवाद कार्यक्रम संपन्न।
कुरुक्षेत्र । अनुशासन व्यक्ति, समाज एवं राष्ट्र को महान बनाता है। विशेषकर छात्र जीवन तो अनुशासन प्रधान होता है। इसके बिना छात्रों में अच्छे संस्कार डाले नहीं जा सकते हैं। अध्यापन कार्य ठीक से नही किया जा सकता। अच्छी पढ़ाई, अच्छे संस्कार एवं गुणों के विकास के लिए अनुशासन आधारशिला का काम करता है। यह विचार मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने मातृभूमि शिक्षा मंदिर द्वारा आयोजित विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का महत्व विषय पर आयोजित बाल संवाद कार्यक्रम में व्यक्त किये।कार्यक्रम का शुभारम्भ सरस्वती वंदना से हुआ। इस अवसर पर मातृभूमि शिक्षा मंदिर के बच्चों ने गीत एवं कविताएं प्रस्तुत की। सभी बच्चों को मातृभूमि सेवा मिशन की ओर से स्टेशनरी स्वरूप उपहार वितरित किया गया। डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा पश्चिम जीवन शैली के प्रभाव में आज विद्यार्थियों में अनुशासन, संयम, समर्पण और मूल्यों का निरंतर ह्रास हो रहा है।जिसके कारण शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक में एक समृद्ध सामंजस्य का आभाव दिखाई पड़ता है।विद्यार्थी जीवन कच्ची मिट्टी का ऐसा पिण्ड है, जिसे चाहे जैसा रूप दिया जा सकता है। चरित्र निर्माण का यही श्रेष्ठ अवसर है। इस अवस्था में विद्यार्थी आत्मनिर्भरता, उदारता, स्नेह सौहार्द्र, श्रद्धा, आस्था, नम्रता आदि गुणों का विकास कर सकता है।
डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा जीवन में सही दृष्टिकोण अपनाने से हमें अपनी उत्पादकता में सुधार करने की शक्ति भी मिलती है। और एक बार जब हम प्रलोभनों का विरोध करना और अनुशासित रहना सीख जाते हैं, तो हम हमेशा कम समय में बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।छात्रों में अनुशासन का भाव पैदा करने के लिए जरूरी है कि समाज में भी अनुशासन हो, नैतिक आदर्श हो। छात्र शिक्षकों से अधिक प्रभावित होते हैं। अतएव शिक्षकों को भी चरित्रवान होना चाहिए तथा अपने आदर्श रूप को छात्रों के सम्मुख प्रस्तुत करना चाहिए। शिक्षा रोजगारोन्मुख हो ताकि छात्र अपने भविष्य के प्रति आशंकित न हों। अनुशासन निश्चित रूप से सफलता की कुंजी है। कार्यक्रम में आश्रम के विद्यार्थी, सदस्य एवं गणमान्य जन उपस्थित रहे