न्यूज़ डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र । भारतीय वायु सेना दिवस के उपलक्ष्य में मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों ने वायु सेना के सैनिको के अदम्य साहस एवं शौर्य को नमन किया।
भारतीय वायुसेना, भारतीय सशस्त्र बलों में से एक महत्वपूर्ण अंग है। भारतीय वायु सेना का देश की सुरक्षा में बड़ा योगदान है। देश की वायु सेना भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान स्थापित की गई थी और आज यह एक अत्याधुनिक और शक्तिशाली वायुसेना बन चुकी है। भारतीय वायुसेना दिवस देश के वीर जवानों के साहस और बलिदान को मान्यता देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह विचार मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने भारतीय वायु सेना दिवस के उपलक्ष्य मे मातृभूमि शिक्षा मंदिर द्वारा आयोजित कार्यक्रम मे व्यक्त किये। मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थिओ ने भारत माता के चित्र के समक्ष नतमस्तक होकर वायु सेना के सैनिको के प्रति आदर सहित सम्मान प्रकट किया। मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों ने इस अवसर पर राष्ट्रभक्ति से ओत प्रोत कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये। विद्यार्थियों ने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणो की आहुति देने वाले भारतीय वायु सेना के वीर शहीद जवानों को सलामी देकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा स्वतंत्रता के बाद से भारतीय वायुसेना ने कुल पाँच युद्ध लड़े, जिनमें चार पाकिस्तान के साथ और एक चीन के साथ हुआ। 1948, 1965, 1971 और 1999 के भारत-पाक युद्ध में भारतीय वायुसेना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चीन के साथ 1962 के युद्ध में भी वायु सेना ने अपना पराक्रम दिखाया। इसके अलावा, ऑपरेशन विजय, ऑपरेशन मेघदूत, ऑपरेशन कैक्टस और बालाकोट एयर स्ट्राइक जैसी प्रमुख घटनाओं में भी भारतीय वायुसेना का योगदान अहम रहा है।
डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा भारतीय वायुसेना ने 1965, 1971 और कारगिल युद्धों में अपनी ताकत और क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया है। इसके पास परमाणु शक्ति से लैस युद्ध विमान भी हैं, जो देश की आकाशीय सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रत्येक वर्ष 8 अक्टूबर को भारतीय वायुसेना दिवस मनाया जाता है। यह दिन वायु सेना की उपलब्धियों को याद करने और वायु सेना में शामिल उन वीर जवानों के साहस को नमन करने का अवसर होता है, जो देश के लिए जान कुर्बान करने में भी पीछे नहीं हटते। भारतीय वायुसेना का प्राथमिक उद्देश्य सेना और नौसेना के समन्वय से हवाई खतरों से राष्ट्र और उसके हवाई क्षेत्र की रक्षा करना है।इसका दूसरा उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं और आंतरिक गड़बड़ियों के दौरान नागरिक शक्ति की सहायता करना है। कार्यक्रम का समापन भारत माता के उद्घोष से हुआ। कार्यक्रम में आश्रम के सदस्य, विद्यार्थी आदि उपस्थित रहे।