इटली के कलाकारों इजिनो और वर्जीनिया ने भारतीय शास्त्रीय संगीत का जादू बिखेरा
एनडी हिन्दुस्तान
चंडीगढ़ । इंडियन नेशनल थिएटर, चंडीगढ़ द्वारा अपनी पूर्व संरक्षक श्रीमती कांता सरूप कृष्णन की स्मृति में एक विशेष ध्रुपद वादन कॉन्सर्ट का आयोजन महात्मा गांधी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, सेक्टर 26, चंडीगढ़ में किया गया। इस कार्यक्रम में इटली के प्रख्यात कलाकार इजिनो जियोवानी ब्रूनोरी (सैक्सोफोन) और वर्जीनिया निकोली (बांसुरी एवं गायन) ने अपनी अनूठी जुगलबंदी प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी मधुर वादन शैली और शुद्ध स्वरों ने पूरे वातावरण को संगीतमय कर दिया, जिससे श्रोता भावविभोर हो गए।
यह आयोजन भारतीय शास्त्रीय संगीत और अंतरराष्ट्रीय कला के अनूठे संगम का एक उत्कृष्ट उदाहरण था। इजिनो और वर्जीनिया ने डागर घराने की ध्रुपद परंपरा में गुंदेचा बंधुओं से प्रशिक्षण प्राप्त किया है और बांसुरी व खयाल संगीत की शिक्षा पंडित राजेंद्र प्रसन्ना से ली है। इस जोड़ी ने सुर, ताल और रागों के अनुपम संगम से श्रोताओं का मन मोह लिया और अपनी बेजोड़ प्रस्तुति के लिए भरपूर सराहना प्राप्त की। उनका वादन पारंपरिक संगीत को आधुनिकता के साथ जोड़ता है, जिससे यह भारतीय और पश्चिमी संगीत प्रेमियों के लिए एक अनूठा अनुभव बन जाता है।
इजिनो और वर्जीनिया ने अपने वादन की शुरुआत सैक्सोफोन और बांसुरी पर सरस्वती वंदना से की, जिसमें “शारदा मां, शुभ्र वस्त्र धारिणी, हंसवाहिनी, ब्रह्मपुत्री, पद्मासन, ज्ञानदायिनी” का संगीतमय वर्णन किया गया। इस प्रस्तुति ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। इसके बाद, उन्होंने राग अहीर भैरव में सूलताल में निबद्ध “नमो नमो महावीरा” प्रस्तुत किया, जिसने श्रोताओं को एक दिव्य अनुभूति कराई।
इसके पश्चात, दोनों कलाकारों ने विभिन्न रागों और तालों के माध्यम से शास्त्रीय और अर्धशास्त्रीय संगीत का अनूठा समन्वय प्रस्तुत किया। उन्होंने गुनकली राग में बांसुरी युगल वादन को तीनताल में प्रस्तुत किया, जिसमें सुरों की कोमलता और माधुर्य ने वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। उन्होंने काफीयूजन, जो एक मौलिक अर्धशास्त्रीय रचना है, को कहरवा (8 बीट) में सैक्सोफोन और बांसुरी की जुगलबंदी के रूप में प्रस्तुत किया गया। इस रचना में काफी राग के सौंदर्य को पश्चिमी वाद्य शैली के साथ जोड़कर एक नया रंग दिया गया, जिससे श्रोता एक अनूठे संगीतमय सफर पर निकल पड़े।
उन्होंने अपनी प्रस्तुति को जारी रखते हुए चारुकेशी राग में “झीनी झीनी” (सूलताल) स्वरबद्ध रचना प्रस्तुत की गई, जिसमें स्वर और सैक्सोफोन का सम्मिश्रण मन को छू लेने वाला था। इस प्रस्तुति में चारुकेशी राग के भावनात्मक रंग और गतिशील स्वरों ने गहरी संवेदनशीलता उत्पन्न की। अंत में, वांकु एलेइडा, मौलिक अर्धशास्त्रीय रचना, को राग धानी रचित झपताल में निबद्ध(जो कि उन्होंने अपनी बेटी के लिए रचित की है), को प्रस्तुत किया। इस रचना में सैक्सोफोन और स्वर की खूबसूरत जुगलबंदी ने पारंपरिक और समकालीन संगीत के बीच एक सेतु का निर्माण किया, जो श्रोताओं के लिए एक यादगार अनुभव साबित हुआ।
इस संगीतमय यात्रा में दोनों कलाकारों के साथ युवा और प्रतिभाशाली पखावज वादक रोमन दास ने अपनी प्रभावशाली संगत से प्रस्तुति को और भी ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
इस अवसर पर इंडियन नेशनल थिएटर, चंडीगढ़ के प्रेसिडेंट अनिल नेहरू और सेक्रेटरी विनीता गुप्ता ने कहा कि यह हमारे लिए गर्व की बात है कि इंडियन नेशनल थिएटर, चंडीगढ़, भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों को इस मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान कर रहा है। इजिनो जियोवानी ब्रूनोरी और वर्जीनिया निकोली जैसे कलाकारों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि भारतीय संगीत की गूंज पूरे विश्व में सुनाई दे रही है। उनका संगीत प्रस्तुति न केवल हमारी परंपरा को सम्मान देती है, बल्कि नए प्रयोगों के माध्यम से इसे और समृद्ध भी बनाती है। हमें खुशी है कि इस विशेष कार्यक्रम में संगीत प्रेमियों को एक अद्वितीय और अविस्मरणीय अनुभव प्राप्त हुआ।