Home Kurukshetra News सरस मेला ग्रामीण भारत की आत्मनिर्भरता, कारीगरी और संस्कृति का प्रतीक:धुमन सिंह

सरस मेला ग्रामीण भारत की आत्मनिर्भरता, कारीगरी और संस्कृति का प्रतीक:धुमन सिंह

by ND HINDUSTAN
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एनडी हिन्दुस्तान

पिहोवा। हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुमन सिंह किरमच ने कहा कि
हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव में आयोजित सरस मेले में हरियाणा सहित अन्य राज्यों के एसएचजी सदस्यों द्वारा बनाए गए हस्तशिल्प, हैंडलूम, जैविक उत्पाद, सजावटी वस्तुएं, और दैनिक उपयोग की वस्तुएं आकर्षण का केंद्र बनी रही। यह मेला ग्रामीण हस्तशिल्प, संस्कृति और व्यंजनों का अद्भुत संगम बना है, जहां हरियाणा सहित देशभर के स्वयं सहायता समूह अपने उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री की है।
उन्होंने अधिकारियों से बातचीत करते हुए कहा कि 29 जनवरी से 4 फरवरी तक सरस मेला न केवल ग्रामीण उत्पादों को बढ़ावा दिया बल्कि पर्यटकों के लिए भी एक अनूठा अनुभव प्रदान किया है। इस मेले में हस्तशिल्प, हैंडलूम, जैविक उत्पाद, सजावटी वस्तुएं और दैनिक उपयोग की वस्तुएं विशेष आकर्षण का केंद्र रही।
उन्होंने कहा कि इस मेले का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के स्वयं सहायता समूह को एक मंच प्रदान करना है, जहां ये अपने उत्पादों को प्रदर्शित कर सकें और व्यापक बाजार तक पहुंच बना सकें। यह पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। सरस मेला सिर्फ खरीदारी के लिए ही नहीं, बल्कि भारत की विविधतापूर्ण संस्कृति को जानने और समझने का भी एक सुनहरा अवसर होता है।  
  ग्रामीण हस्तशिल्प और हैंडलूम उत्पाद देशभर के बेहतरीन शिल्पकारी द्वारा तैयार उत्कृष्ट वस्तुएं, स्वादिष्ट व्यंजनों के स्टॉल हरियाणा,  सांस्कृतिक कार्यक्रम हर दिन लोक नृत्य, संगीत और कला के शानदार प्रदर्शन, महिला उद्यमिता की झलक जो महिला सशक्तिकरण का उदाहरण हैं।

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