हरियाणा में औषधीय खेती को बढ़ावा देने के लिए महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय करेगा काम: प्रो. सुरेश मल्होत्रा
एनडी हिन्दुस्तान
करनाल । स्वास्थ्य लाभ ओर आर्थिक समुद्धि के लिए अश्वगंधा की खेती के प्रति अनुसूचित जाति की जागरूकता के लिए महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय करनाल में अश्वगंधा के औषधीय गुणों तथा इसकी खेती के फायदों को लेकर भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा प्रायोजित 2 दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शनिवार का शुभारंभ हुआ। राष्ट्रीय कार्यशाला में मुख्य अतिथि के तौर पर नेशनल मेडिसनली प्लांट बोर्ड आयुष मंत्रालय नई दिल्ली के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ महेश दधिचि ने विशेष तौर पर शिरकत की।
महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय करनाल के माननीय कुलपति प्रो. सुरेश ने राष्ट्रीय कार्यशाला में आई महिला किसानों को महिला दिवस की बधाई देते हुए कहा कि औषधीय पौधों का हमारे जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है ओर हमारे देश के करीब 70-80 प्रतिशत लोग अभी भी औषधीय पौधों पर निर्भर है। औषधीय पौधों के उत्पादन की जरूरत है, एमएचयू औषधीय पौधों के उत्पादन के कार्य पर जोर देती है। फल सब्जियां, औषधीय पौधे, मसाले ओर मशरूम की खेती, मधु मक्खी पालन को बढ़ावा दिया जाता है। आज की राष्ट्रीय कार्यशाला में अश्वगंधा पर फोक्स किया है, वैसे तो ओर भी औषधीय पौधे है, जिन्हें हरियाणा ओर केंद्र सरकार प्रमोट कर रही है, चाहे तुलसी, अश्वगंधा, सफेद मूसली बहुत सारी फसलें है, जो हमारी जलवायु के माफिक है। किसान इनको कर भी रहे है, लेकिन इनको ओर प्रचार प्रसार की जरुरत है। नेशनल मेडिसनली प्लांट बोर्ड आयुष मंत्रालय द्वारा हरियाणा में भी कार्य किया जा रहा है, कैसे अश्वगंधा का क्षेत्रफल बढ़ाया जाए ताकि किसान भाई परपंरागत खेती को छोड़कर औषधीय पौधों की खेती बढ़े। अश्वगंधा से बने उत्पादों की देशभर में काफी मांग है। भारत सरकार ये सोचती है कि किसानों की आय को बढावा, खेती में विविधकरण कैसे लगाए।
औषधीय पौधों की मार्केट बहुत बड़ी: डा महेश
नेशनल मेडिसनली प्लांट बोर्ड आयुष मंत्रालय नई दिल्ली के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ महेश कुमार ने कहा कि भारत सरकार किसानों की आय दुगनी करने के लिए विभिन्न योजनाएं चल रही है। हरियाणा में अश्वगंधा की खेती को बढ़ावा देने के लिए हमने विश्वविद्यालय को यह प्रोजेक्ट दिया है। इसमें किसानों विशेषकर एससी, एसटी वर्ग के लोगों की आय को बढ़ाने के लिए उनमें जागरूकता लाई जाएगी। इसके तहत किसानों को 2 लाख पौधे नि:शुल्क दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर किसान परंपरागत खेती के साथ-साथ औषधीय पौधे की भी खेती करें तो उनकी आय दुगनी ही नहीं बल्कि 4 से 6 गुना तक हो सकती है। उन्होंने कहा कि औषधीय पौधों की मार्केट बहुत बड़ी है, मांग के हिसाब से हम केवल 25 प्रतिशत ही उत्पादन कर रहे हैं।
साधनहीन किसानों के लिए अश्वगंधा को एक किफायती फसल: डॉ बिमला
कार्यशाला के प्रारूप का प्रस्तुतिकरण करते हुए कार्यक्रम की संयोजिका डॉ बिमला सिंह ने अश्वगंधा के विभिन्न आयामों पर आगामी सत्र में विषय विशेषज्ञों द्वारा चर्चा का ब्यौरा दिया। उन्होंने अश्वगंधा की खेती के औषधीय गुण एवम इसके उत्पादों द्वारा आय संवर्धन की संभावनाओं पर बल देते हुए कार्यशाला की उपयोगिता को प्रतिभागियों के बीच सांझा किया। उन्होंने कहा कि जो साधनहीन किसानों के लिए अश्वगंधा को एक किफायती फसल के तौर पर उन्होंने अपनाने पर प्रोत्साहित किया। एमएचयू के अनुसंधान निदेशक व डीन प्रो रमेश गोयल ने कार्यशाला में आए किसानों व वैज्ञानिकों, अधिकारियों का धन्यवाद किया। छात्र कल्याण निदेशक प्रो रंजना गुप्ता ने भी किसानों को सम्बाधित किया। मंच संचालन डॉ विजय अरोड़ा ने किया। कार्यशाला के दौरान माननीय कुलपति व मुख्य अतिथि ने एमएचयू के प्रांगण में लगी प्रदर्शनी का निरीक्षण किया।