Home Kurukshetra News फिल्म महोत्सव के पहले दिन टैगोर सभागार में चली दो मास्टर क्लास

फिल्म महोत्सव के पहले दिन टैगोर सभागार में चली दो मास्टर क्लास

by ND HINDUSTAN
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मास्टर क्लास में सामने आई फिल्म क्षेत्र के विशेषज्ञों की राय

बोले,हरियाणा में अपनी मिट्टी,अपने संस्कार और अपने इश्यू आधारित बने सिनेमा

फिल्म क्षेत्र में रुचि रखने वालों ने विशेषज्ञों से किए सवाल

एनडी हिन्दुस्तान

रोहतक। हरियाणा फिल्म महोत्सव 2025 के उद्घाटन के उपरांत पहले दिन दो मास्टर क्लास हुई। इनमें पहली मास्टर क्लास में फिल्म निर्माण और चुनौतियों से संबंधित विषय पर विशेषज्ञों ने अपनी राय रखी। इन्होंने चर्चा के साथ यहां मौजूद फिल्म क्षेत्र में रुचि रखने वाले युवाओं के प्रश्नों का उत्तर देते हुए इनकी जिज्ञासा को भी शांत किया।  

इस चर्चा में विशेषज्ञों ने बताया कि कई बार लगता है कि फिल्म बनाना एक बड़ी चुनौती है,जिसमें बहुत सारे फूफाओं (पूरी टीम) को साधते हुए प्रोड्यूसर एक फिल्म प्रोजेक्ट पूरा करता है। बालीवुड की कहानी जैसी चर्चित फिल्म की लेखिका अद्वैत काला ने कहा कि कहानी का आइडिया कहीं से भी मिल सकता है। हमें रोजाना अखबार पढ़ने चाहिए,क्योंकि कहानी का आइडिया अखबार की सुर्खियों में भी छुपा होता है। उन्होंने कहा कि आपस की बातचीत,घटनाक्रम,यात्राओं के दौरान के अनुभव नई कहानी को जन्म देते हैं। जैसे किसी भी पेड़ को लगाने के लिए बीज डाला जाता है,उसी तरह किसी भी फिल्म के लिए यह बीज कहानी है,जो एक श्रृष्टि की रचना करती है। 

विशेषज्ञ के रुप में मास्टर क्लास में शामिल हुए मनीष सैनी ने कहा कि ने कहा कि फिल्में सामाजिक जिम्मेदारी को समझते हुए सही दशा दिशा में काम करके बड़े सामाजिक परिवर्तन में साकारात्मक योगदान देना चाहिए।किसी प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए मनोरंजन के नाम पर फूहड़ता परोसना गलत है।समाज को सही दिशा में लाने के लिए मजाक और व्यंग्य का सही इस्तेमाल होना चाहिए।

मनीष सैनी ने कहा कि दक्षिण के सिनेमा के मुकाबले हरियाणा प्रांत अभी भी इस आर्ट के शुरुआती दौर जैसे हालात से गुजर रहा हैं। मगर संतोषजनक बात यह है कि हरियाणा सिनेमा में अब हरिओम कौशिक जैसे निष्ठा और जुनून से काम करने वाले अनेक चेहरे दिखने लगे हैं।फिल्म सेंसर बोर्ड की सदस्या ज्योत्सना गर्ग ने कहा कि मराठी और दक्षिणी सिनेमा अपनी कहानी अपने रुट से जुड़ी कहानियों के साथ निरंतर आगे बढ़ रहा है। इसलिए जरुरी है कि अपनी मिट्टी,अपने संस्कार और अपने इश्यू पर आधारित सिनेमा बने। हरियाणा गुंडई या दबंगई भाषा नहीं,बल्कि बेहतर समाज के लिए संस्कार आधारित सिनेमा तैयार करे।

विशेषज्ञ अतुल गंगवार ने कहा कि फिल्म एक भावनात्मक यात्रा का नाम है,जिसमें प्रोड्यूसर पूरी टीम में सामंजस्य बिठाने का काम करता है और उसकी एक ही प्राथमिकता रहती है कि प्रोजेक्ट को कम से कम में करे। उन्होंने कहा कि डायरेक्ट में भाव डालने का काम और बेहतर कास्टिंग से उसे निखारता है। 

साधक कलाकारों की मेहनत ने अंतरराष्ट्रीय फलक पर हरियाणवी गीत संगीतःडा.पूनिया

महोत्सव के पहले दिन दूसरी मास्टर क्लास हरियाणवी संस्कृति के विकास में गीत संगीत के योगदान विषय पर पद्मश्री महावीर गुड्डू, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के निदेशक जन संचार एवं प्रौद्योगिकी संस्थान प्रोफेसर महा सिंह पुनिया और गुरुग्राम विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डा.मीनाक्षी श्योराण ने चर्चा की और मास्टर क्लास में मौजूद युवाओं के सवालों का जवाब दिया। इस दौरान मास्टर क्लास में हरियाणवी संस्कृति के विकास में गीत संगीत के योगदान विषय पर व्याख्यान देते हुए डा.पूनिया ने कहा कि युवा पीढ़ी को लोक पारंपरिक सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए आगे आना चाहिए।हरियाणा के गीत संगीत एवं सांस्कृतिक परंपराओं में विकास की अपार संभावनाएं है। पिछले एक दशक में हरियाणा के कलाकारों ने अपनी मेहनत के बल पर हरियाणा के गीत संगीत को अंतरराष्ट्रीय फलक पर विशेष पहचान दिलाई है।इस अवसर पर तीनों विशेषज्ञों ने हरियाणवी गीत भी सुनाएं। 

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