Home Kurukshetra News बुजुर्गों का तिरस्कार करने वाली संतान पर कटाक्ष कर गयी चीफ की दावत

बुजुर्गों का तिरस्कार करने वाली संतान पर कटाक्ष कर गयी चीफ की दावत

by ND HINDUSTAN
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चीफ की दावत में दिखा मां का दर्द, बेटे के बदसलूकी ने झकझोरा

संतान द्वारा दी जा रही मानसिक पीड़ा का दर्द ‘चीफ की दावत’

मौजूदा समाज का आईना है चीफ की दावत। संजय भसीन

न्यूज डेक्स संवाददाता

कुरुक्षेत्र,23 जनवरी। अपनी संतान द्वारा तिरस्कृत और मानसिक पीड़ा झेलने वाले बुजुर्गों की दयनीय दशा पर हिंदी के कईं कहानीकारों ने अपनी लेखनी चलाई है। भीष्म साहनी की कहानी चीफ की दावत भी इसी कड़ी की एक संवेदनशील रचना है। आज के इस उपभोक्तावादी युग में अधिकाधिक धन, यश, आराम आदि ही जीवन का चरम लक्ष्य माना जाता है। ऐसी हालत में पारीवारिक मूल्य खत्म होते जा रहे हैं और मां-बाप अपनी संतान द्वारा उपेक्षित हो जाते हैं। चीफ की दावत मौजूदा समाज का ही आईना है। ये कहना था हरियाणा कला परिषद के निदेशक संजय भसीन का। कला परिषद द्वारा हर सप्ताह आयोजित होने वाले आनलाईन कार्यक्रमों की कड़ी में आयोजित कहानी मंचन चीफ की दावत के दौरान उन्होंने अपने विचार सांझा किए।

न्यू उत्थान थियेटर ग्रुप के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत तथा भीष्म साहनी द्वारा लिखित कहानी चीफ की दावत का निर्देशन रंगकर्मी विकास शर्मा द्वारा किया गया। नाटक में आधुनिकता के रंग में डूबकर अपने माता-पिता का तिरस्कार करने वाले बच्चों के उपर करारा कटाक्ष किया गया। सूत्रधार साजन कालड़ा के माध्यम से शुरु हुई नाटक की कहानी नायक शामनाथ के इर्दगिर्द घूमती है, जहां अपने बाॅस को खुश करने के लिए शामनाथ उन्हें घर पर दावत के लिए आमंत्रित करता है। लेकिन अपनी मां के अनपढ़ व गांव की होने के कारण उसे बाॅस के सामने आने से मना कर देता है। कहानी जब आगे बढ़ती है तो अचानक बाॅस की नजर शामनाथ की मां पर पड़ती है तो वह उससे बहुत खुश होते हैं। और मां का बाॅस से मिलना शामनाथ की तरक्की में सहायक सिद्ध होता है।

बाॅस मां को एक फुलकारी बनाने को कहते हैं, मां के मना करने पर भी शामनाथ फुलकारी के लिए हां कर देता है। लेकिन जब बास के जाने के बाद मां मना करती है, तो शामनाथ चिल्लाने लगता है और अपनी मां को बुरा भला कहना शुरु कर देता है। ऐसे में मां अकेली पड़ जाती है और बेटे के तिरस्कार से आहत अपने प्राण छोड़ देती है। सूत्रधार कहानी का मूल अंत दिखाने के बाद एक और अंत दिखाता है जिसमें शामनाथ को अपने किए पर शर्मिदंगी होती है और वह मां से माफी मांगता है। मां अपने बेटे और बहू को माफ कर देती है और इस प्रकार नाटक का सुखद अंत होता है। चीफ की दावत में मां की भूमिका में राजकुमारी शर्मा और बेटे शामनाथ की भूमिका में अमनदीप शर्मा ने अपने अभिनय कौशल दिखाए। चीफ का किरदार नितिन गुप्ता ने निभाया। अन्य भूमिकाओं में मनू महक माल्यान, साजन कालड़ा, संदेश, बबनदीप, शिवम आनंद, गौरव दीपक जांगड़ा, मनीष डोगरा ने सहयोग दिया। 

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