नेताजी को नमन के साथ सायंकालीन सत्र में नेताजी के सहयोगी की धर्मपत्नी श्रीमती सीता देवी का
किया गया सम्मान
शहीद मेजर नितिन बाली की माता आदर्श बाली और कैप्टन मामचंद मेहरा का भी किया गया सम्मान
न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र,24 जनवरी। आईएनए और नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 18 अगस्त 1945 को हुई तथाकथित मृत्यु के बाद की घटनाओं के साक्ष्य दस्तावेजों सहित जन चेतना मंच के कार्यक्रम में प्रस्तुत किये। नेताजी की 125 वें जन्मदिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम में प्रत्यक्ष रुप से और जूम प्लेटफार्म के जरिये कई राज्यों और कनाडा सहित दूसरे देशों के लोग भी जुड़े।नेताजी के जीवन से जुड़े रहस्यमयी पहलुओं को व्याख्यान के माध्यम से प्रस्तुत करने के उपरांत सायंकालीन सैशन में नेताजी के सहयोगी सैनिक रहे स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय अमरनाथ शर्मा की धर्मपत्नी श्रीमती सीता देवी सहित शहीद मेजर नितिन बाली की माता आदर्श बाली और कैप्टन मामचंद मेहरा का भी किया गया सम्मान विभूतियों का सम्मान किया गया।
सेक्टर-7 नेताजी कालोनी में जन चेतना मंच कुरुक्षेत्र द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में नेताजी के जीवन पर एक सेमिनार के दौरान प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम में मंच के अध्यक्ष प्रदीप कुमार आर्य ने 18 अगस्त 1945 को तथाकथित मृत्यु के बाद की घटनाओं का साक्ष्यों सहित उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि नेताजी के कथित निधन 18 अगस्त 1945 के बाद मंचूरिया रेडियो स्टेशन से 19 दिसंबर 1945 व 19 जनवरी 1946 और 19 फरवरी 1946 को राष्ट्र के नाम किया गया नेताजी का संबोधन उनके जीवित होने के बावजूद मृतक घोषित करने वालों के मनसूबों को उजागर करता है।
इसका उल्लेख करते हुए बताया कि यदि 18 अगस्त 1945 को नेताजी का देहांत हो गया था, तो उक्त दिनों मंचूरिया रेडियो से नेताजी का संबोधन कैसे हुआ था ? वहीं सत्ताहस्तांरण के दस्तावेजों का हवाला देते हुए गृहमंत्रालय दिल्ली की ओर से ब्रिटिश सरकार को लिखे गये पत्र में नेताजी को युद्ध अपराधी जैसा व्यवहार करने का सुझाव दिया गया था। आर्य ने सवाल उठाया कि क्या मृत व्यक्ति के साथ इस तरह का कोई व्यवहार किया जा सकता है या संभव है। नेताजी आजाद हिंद फौज के सर्वोच्च अधिकारी थे,उनको राष्ट्र संघ का युद्ध अपराधी क्यों घोषित किया गयाथा,जबकि उन्होंने अपने देश की आजादी की लड़ाई लड़ी थी। सवाल उठाया कि जब व्यक्ति मृतक घोषित कर दिया गया तो 1971 में हुए युद्ध अपराधियों की सूचि के नवीनीकरण में भी नेताजी का नाम कैसे दर्ज किया ? नेताजी की कथित मृत्यु को लेकर बार बार जांच आयोग बैठाए गये थे।
वहीं 1956 में नेहरु जी द्वारा शहनवाज आयोग,1970 में इंदिरा गांधी द्वारा खोसला आयोग गठित किये थे और इन दोनों आयोगों पर करोड़ों रुपये खर्च किया गया। आखिर दोनों आयोगों ने नेताजी के निधन की पुष्टि की, लेकिन 1978 में जब मोराजी देसाई देश के प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने दोनों जांच आयोगों की रिपोर्ट को निरस्त कर दिया था, आखिर क्यों ? वहीं 90 के दशक में नरसिम्हा राव सरकार ने मरणोपरांत भारत रत्न देने घोषणा की थी,मामला सर्वोच्च न्यायालय तक गया और आखिर सर्वोच्च न्यायालय ने 4 अगस्त 1997 को दिये गये निर्णय के अनुसार नेताजी के नाम के साथ से मरणोपरांत शब्द को हटा दिया था,क्योंकि सरकार सर्वोच्च न्यायालय में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के निधन की पुष्टि नहीं कर पाई। आर्य ने तथ्य प्रस्तुत करते हुए 1964 की वो तस्वीर भी प्रस्तुत की, जिसमें नेताजी उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के निधन पर अंतिम दर्शन के लिये पहुंचे थे।
उस समय बनाई डाक्यूमेंटरी फिल्म के लास्ट चेप्टर की फिल्म नंबर 816 बी का चित्र प्रस्तुत किया,जिसमें नेताजी नेहरू के अंतिम दर्शन करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस सेमिनार से जूम के जरिये दिल्ली से आनलाइन जुड़ीं मेडिटेशन मास्टर नलिनी कमल ने आर्य द्वारा जुटाए गये तथ्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जनचेतना मंच नेताजी के अतीत से जुड़े गंभीर साक्ष्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और सच्चाई को उजागर करने के लिये जो योगदान दे रहे हैं वह सराहनीय है। इस मौके पर बीआर इंटरनेशनल एजुकेशन सोसायटी के निदेशक दीपक चौपड़ा, पार्षद मोहन लाल अरोड़ा,मनीषा रानी, मीना जैन,सत्या गुप्ता, धर्मवीर राठौर,परमवीर चौहान, फायर एंड सेफ्टी इंस्चीट्यूट कुरुक्षेत्र के निदेशक राजेंद्र सैनी,विनय कुमार आर्य, रोशन लाल सैनी, विजयंत बिंदल, सन्त कुमार, गुरचरण सैनी, राजेंद्र डाबर, तरुण अरोड़ा, अश्विनी कुमार प्रमोद मित्तल, अमिता सैनी, गुलशन माटा,नोएडा से कीर्ति, दिल्ली से अनीता सैनी, महाराष्ट्र पुणे से प्रदन्या,नाजिश,फिरोजपुर से नवीता,राजपुरा से परमजीत जींद से सुदेश दहिया।
आजादी के बाद लंबे अर्से तक नहीं माना आईएनए को फ्रीडम फाईटर
दुर्भाग्य ही है कि आजादी मिलने के बाद लंबे अर्से तक आजाद हिंद फौज (आईएनए) और उससे जुड़े सैनिकों भारत की सरकारों ने फ्रीडम फाइटर ही नहीं माना था.पहली बार केंद्र सरकार ने 1972 और हरियाणा सरकार ने 1981 के बाद आजाद हिंद फौज के स्वतंत्रता सेनानियों का आधा अधूरा ब्यौरा जुटाया गया था.आज भी कई संगठन गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान और अधिकार की लड़ाई लड़ रहे हैं.
कैप्टन गुरमेल सिंह,प्रदीप आर्य,मनीषा व राजेंद्र सैनी किया सम्मान
कैप्टन गुरमेल सिंह,रेडक्रास के सेवानिवृत्त जिला प्रशिक्षण अधिकारी राजेंद्र सैनी, मनीषा रानी,जनचेतना मंच के अध्यक्ष प्रदीप कुमार आर्य ने स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय अमरनाथ की धर्मपत्नी श्रीमती सीतादेवी को उनके निवास स्थान पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस और आईएनए की यात्रा पर तथ्य जुटा रहे संगठन जन चेतना मंच और कुरुक्षेत्र फायर एंड सेफ्टी इंस्चीट्यूट की ओर से सम्मान किया।


