हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने किया गीता स्थली ज्योतिसर तीर्थ का अवलोकन
शिक्षा मंत्री ने ज्योतिसर तीर्थ से खरीदी धार्मिक पुस्तकें
एनडी हिन्दुस्तान
कुरुक्षेत्र। हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा कि कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर हजारों साल पूर्व भगवान श्रीकृष्ण पूरी मानवता को कर्म करने का संदेश देने के लिए गीता के उपदेश दिए। इसलिए धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र पर्यटन स्थल के रूप में पूरे विश्व भर में अपनी पहचान बना चुका है। इस पावन धरा पर हर वर्ष लाखों लोग पहुंचते है, इससे कुरुक्षेत्र के साथ-साथ हरियाणा प्रदेश से एक विशेष संदेश लेकर अपने प्रदेश को लौट रहे है।
हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा मंगलवार को देर सायं गीता स्थली ज्योतिसर में अधिकारियों के संग अपने मन की बात को साझा कर रहे थे। इससे पहले हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा, हरियाणा स्टेट हायर एजूकेशन काउंसिल के चेयरमैन प्रोफेसर कैलाश चंद शर्मा, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा, निदेशक डा. प्रीतम सिंह ने गीता स्थली ज्योतिसर तीर्थ का अवलोकन किया। इस दौरान शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने ज्योतिसर तीर्थ से कुछ धार्मिक पुस्तकें भी खरीदी है।
हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा कि धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र ऐसी पावन धरा है जिस धरा से पूरे विश्व को शिक्षा, संस्कारों के साथ-साथ गीता के उपदेशों का ज्ञान हुआ। यह गीता के उपदेश आज भी पूर्णतया प्रासंगिक है, जो मनुष्य पवित्र ग्रंथ गीता के उपदेशों का अनुसरण करता है। उसका जीवन सार्थक हो जाता है। इस धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार के प्रयासों को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। इस सरकार ने गीता स्थली ज्योतिसर अनुभव केंद्र जैसे संग्रहालय बनाकर महाभारत काल के हर पहलू को जीवंत करने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने कहा कि धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत व धरोहर को विश्व के हर कोने तक फैलाने पर फोकस रखकर सरकार काम कर रही है। इसी पावन धरा पर भगवान श्रीकृष्ण ने हजारों वर्ष पूर्व पवित्र ग्रंथ गीता के उपदेश दिए थे। इन उपदेशों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पवित्र ग्रंथ गीता के उपदेश जन-जन तक पहुंचे और समाज के लोग इन उपदेशों को अपने जीवन में धारण कर सके और देश के विकास में निस्वार्थ भाव से अपना योगदान दे सके।