एनडी हिन्दुस्तान
यमुनानगर। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की नवाचार इनोवेशन सेल की ओर से युक्ति इनोवेशन रिपॉजिटरीज़ का निर्माण, कैंपस विचारों का उत्पाद में रूपांतरण एवं नवाचार को बढ़ावा देने के विषय पर 20 मई को ऑनलाइन लेक्चर का आयोजन किया गया। शिक्षा मंत्रालय की नवाचार प्रकोष्ठ के सहायक नवाचार निदेशक दिपन साहू ने आईआईसी व युक्ति इनोवेशन के बारे में जानकारी दी। डीएवी गर्ल्स कॉलेज के इंस्टीट्यूशंस इनोवेशन काउंसिल ने टीचर्स व छात्राओं के साथ इसमें ऑनलाइन भागेदारी की। मनोविज्ञान विभाग अध्यक्ष शालिनी छाबडा व आईसीसी कनवीनर विवेक ने संयुक्त रूप से कार्यक्र्रम की अध्यक्षता की।
दीपन साहू ने नवाचार से जुड़े विभिन्न पहलुओं, अवसरों और उनके व्यावसायीकरण के तरीकों के बारे में विस्तार से बताया। इस दौरान यह भी बताया गया कि विभिन्न संस्थानों में आईसीसी के माध्यम से नवाचार को कैसे बढ़ावा दिया जा रहा है। अब तक कितने स्टार्टअप्स स्थापित हो चुके हैं और वे कितना राजस्व उत्पन्न कर रहे हैं, इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई। कार्यक्रम में ज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के माध्यम से कोविड से लड़ता युवा भारत नवाचार चुनौती 2025 के बारे में विस्तार से चर्चा हुई। इसमें बताया गया कि इस चुनौती में भाग लेने के लिए टीम में 3 से 4 सदस्य हो सकते हैं। नवाचार कम से कम प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट स्तर पर होना आवश्यक है। विजेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान, मेंटरशिप, फंडिंग और इनक्यूबेशन का अवसर प्रदान किया जाएगा।
ज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के माध्यम से कोविड से लड़ता युवा भारत दृ नवाचार भंडार के विषय में भी विस्तृत जानकारी दी गई। बताया गया कि छात्र, शिक्षक एवं स्टार्टअप संस्थाएं इस पोर्टल पर अपने नवाचारों को कैसे दर्ज कर सकती हैं। पंजीकरण प्रक्रिया और विचार सबमिट करने के स्टेप्स को ऑनलाइन लाइव डेमो के माध्यम से समझाया गया, जिससे प्रतिभागियों को वास्तविक समय में प्रक्रिया को समझने में आसानी हुई।
साथ ही अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) उत्पादिकरण फेलोशिप के बारे में जानकारी दी गई, जिसमें चयनित नवाचारों को उत्पादों में बदलने के लिए विशेष मेंटरशिप, तकनीकी सहायता और सीमित अवधि के लिए फेलोशिप फंडिंग प्रदान की जाएगी। आवेदन प्रक्रिया को भी चरणबद्ध तरीके से ऑनलाइन प्रस्तुत किया गया, जिसमें बताया गया कि नवाचारों को पोर्टल पर कैसे सबमिट करना है, किन दस्तावेजों की आवश्यकता होती है, और चयनित फेलो को किस प्रकार की फंडिंग एवं मेंटरशिप दी जाएगी। कार्यक्रम के सफल संचालन में ममता थापर और मनिका सेठी ने सहयोग दिया।