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शिक्षिका सुदेश रानी ‘विद्यावाचस्पति सारस्वत सम्मान’ से अलंकृत

by ND HINDUSTAN
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एनडी हिन्दुस्तान

पंचकूला । पंडित दीनदयाल उपाध्याय हिंदी विद्यापीठ, मथुरा द्वारा आयोजित राष्ट्रीय हिंदी संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह का भव्य आयोजन रविवार को होटल रेडिसन ब्लू, पश्चिम विहार, नई दिल्ली में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य देश भर के हिंदी भाषा, साहित्य, शिक्षा, समाज सेवा, महिला सशक्तीकरण, पत्रकारिता एवं पर्यावरण संरक्षण जैसे विविध क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले प्रतिभावान व्यक्तित्वों को सम्मानित करना था।

समारोह में पद्मश्री डॉ. अरविंद कुमार, पूर्व कुलपति, रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. स्वर्णलता पांचाल, रिसर्च साइंटिस्ट, AIIMS, नई दिल्ली ने शिरकत की। संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में विदुषी लेखिका दीपा मिश्रा ने विचार प्रस्तुत किए।

इस अवसर पर हरियाणा की शिक्षिका एवं लेखिका सुदेश रानी को उनके साहित्यिक एवं शैक्षणिक योगदान के लिए ‘विद्यावाचस्पति सारस्वत सम्मान’ तथा डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें विशेष रूप से हिंदी भाषा, समाज सेवा, लेखन और समाज में शिक्षण के माध्यम से सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रदान किया गया।

श्रीमती सुदेश रानी, जो वर्तमान में राजकीय माध्यमिक विद्यालय, सेक्टर 25, पंचकूला (हरियाणा) में हिंदी अध्यापिका के पद पर कार्यरत हैं, हिंदी को केवल एक विषय नहीं बल्कि आत्मा का हिस्सा मानती हैं। उनका हिंदी के प्रति प्रेम इतना गहरा है कि उन्होंने दसवीं कक्षा के पश्चात ही ‘प्रभाकर’ जैसी परंपरागत हिंदी उपाधि को चुनते हुए साहित्य के प्रति अपनी निष्ठा को आरंभ कर दिया था।

विवाह के पश्चात उन्होंने पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ एम.ए.(हिंदी) और बी.एड. की उपाधियाँ प्राप्त कर अध्यापन के क्षेत्र में प्रवेश किया। शिक्षण के साथ-साथ वे लेखन में भी अत्यंत सक्रिय हैं। उनके लेख, कहानियाँ, संस्मरण और शैक्षणिक आलेख कई प्रमुख पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित होते रहते हैं।

श्रीमती सुदेश रानी का लेखन केवल विचार अभिव्यक्ति तक सीमित नहीं, बल्कि विद्यार्थियों, शिक्षकों और समाज को दिशा देने वाला है। वे हरियाणा विद्यालय शिक्षा विभाग की पत्रिका में प्रायः श्रेष्ठ शिक्षकों, विद्यार्थियों और विद्यालयों पर लेख प्रस्तुत करती हैं। विभिन्न समाज सेवी संगठनों के साथ जुड़कर सामाजिक सरोकारों के विषयों से निरंतर जुड़ी रहती हैं।

एक शिक्षिका के रूप में उन्हें विद्यार्थियों को मंच पर बोलने, स्वतंत्र रूप से विचार रखने तथा लेखन में निपुण बनने के लिए प्रेरित करने में विशेष रुचि है। उनके पास अब तक विविध विषयों पर कहानियों का समृद्ध संग्रह है जिसे वे शीघ्र ही कहानी संग्रह के रूप में प्रकाशित करने जा रही हैं। उनके व्यक्तित्व की विशेषता यह है कि वे गंभीर साहित्यिक दृष्टि के साथ-साथ सरल संवादात्मक शैली में लेखन करती हैं, जिससे पाठक उनसे सहज रूप से जुड़ जाते हैं।

उनकी यह उपलब्धि न केवल एक शिक्षक के व्यक्तिगत संघर्ष और समर्पण की प्रतीक है, बल्कि यह प्रमाणित करती है कि यदि हिंदी से प्रेम सच्चा हो, तो वह जीवन का माध्यम बन जाती है – मात्र विषय नहीं।

सम्मान समारोह में देशभर से आए लेखकों, शिक्षाविदों और साहित्यकारों की उपस्थिति ने इस आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया, और श्रीमती सुदेश रानी का सम्मान समस्त अध्यापक समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया।

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