प्रेरणा वृद्धाश्रम में अखिल भारतीय प्रेरणा साहित्य एवं शोध संस्थान के मंच पर देश व प्रदेश के विख्यात कवि दिखा रहे हैं प्रतिभा
एनडी हिन्दुस्तान
कुरुक्षेत्र । देशभर के विभिन्न राज्यों से घरों से निकाले गए एवं अपनों द्वारा ठुकराए बुजुर्गों को आश्रय देने वाले प्रेरणा वृद्धाश्रम ने अब साहित्य के क्षेत्र में भी अखिल भारतीय प्रेरणा साहित्य एवं शोध संस्थान के माध्यम से विशेष पहचान बनाई है। बीते समय में देश एवं प्रदेश के अनेकों कवि व साहित्यकार अखिल भारतीय प्रेरणा साहित्य एवं शोध संस्थान के मंच पर आकर अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं। सैकड़ों साहित्यक पुस्तकों का यहां विमोचन एवं लोकार्पण हो चुका है। ऐसे में अखिल भारतीय प्रेरणा साहित्य एवं शोध संस्थान अब एक अकादमी का रूप लेता जा रहा है। रविवार को संस्थान की भव्य चौथी मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस काव्य गोष्ठी में अध्यक्ष के रूप में प्रो. लालचंद गुप्त मंगल और मुख्य अतिथि के तौर पर बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. बाबूराम मौजूद रहे। इस अवसर पर सुप्रसिद्ध साहित्यकार, शिक्षाविद और समाजसेवी रतन चंद्र सरदाना की पुस्तक करामाती दादी का विमोचन किया गया। साथ ही साथ संस्थान की मासिक काव्य गोष्ठी की पुस्तक जो प्रतिमाह की काव्य प्रस्तुतियों पर प्रकाशित होती है उसका भी विमोचन किया गया। इस बार की पुस्तक का विषय सावन के गीत सावन की मस्ती रहा। इस गोष्ठी में 40 से अधिक कवियों एवं कवित्रियों ने भाग लिया। काव्य गोष्ठी में आए हुए अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्थान के अध्यक्ष, प्रेरणा वृद्धाश्रम के संस्थापक व संचालक डा. जय भगवान सिंगला ने कहा कि यह प्रेरणा संस्था की उपलब्धि है कि यहां गोष्ठी में इतने प्रतिष्ठित साहित्यकार पहुंचे हैं। अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. लालचंद गुप्ता मंगल ने कहा कि प्रेरणा संस्थान जो कार्य कर रहा है वह अद्वितीय है। मैंने अपने जीवन में ऐसा कभी नहीं देखा कि प्रत्येक महीने की काव्य गोष्ठी की प्रस्तुतियों की कोई पुस्तक प्रकाशित हो और अगले महीने की गोष्ठी में इसका विमोचन भी हो जाए। ऐसा केवल यहीं देखने को मिला है। मैं संस्थान के उज्जवल भविष्य के कामना करता हूं। प्रो. बाबूराम ने कहा कि अखिल भारतीय प्रेरणा साहित्य एवं संस्थान की खुशबू पूरे भारतवर्ष में फैल रही है और शीघ्र ही यहां पर एक राष्ट्रीय स्तर का प्रतिष्ठित साहित्यकारों का सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। साहित्य को संवर्धन करने के लिए अगली रूपरेखा बनाई जाएगी। मंच संचालन कलाकृति भवन के विकास शर्मा ने किया। गोष्ठी में प्रत्येक कवि की रचना मन को मोह लेने वाली थी। डा. सिंगला ने कहा कि यह स्पष्ट दृष्टिगोचर हो रहा है कि आने वाले समय में कुरुक्षेत्र न केवल धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक राजधानी ही रहेगी, बल्कि हरियाणा की साहित्यिक राजधानी भी बन जाएगी। इस अवसर पर डा. चितरंजन दयाल सिंह कौशल, डा. हरिप्रसाद, प्रेरणा संस्था की अध्यक्षा रेणु खुंगर, आशा सिंगला, डा. हरबंस कौर, डा. ममता सूद, शिव किरमच, डा. अरुण पाराशर, हरकेश पपोसा, राधा अग्रवाल, मीरा गौतम, रविंद्र कुमार, कविता रोहिल्ला, संजय मित्तल, सुदेश कुमारी, ईश्वर चंद्र गर्ग, सीमा बिरला, किरण गर्ग, वीरेंद्र राठौड़, हरीश बंसल, अनुराधा शर्मा, डा. अमित, सिया गुप्ता, वेदिता, अंजू, सौरभ, महीपाल, रचना अग्रवाल, सूर्यांश चावला, कनिका शर्मा इत्यादि भी मौजूद रहे।