Home Kurukshetra News कला सृष्टि मंच ने हरियाणवी कोथली परंपरा निभाते हुए मनाया तीज उत्सव

कला सृष्टि मंच ने हरियाणवी कोथली परंपरा निभाते हुए मनाया तीज उत्सव

by ND HINDUSTAN
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कला सृष्टि मंच ने मचाया धमाल, मनाया तीज का त्यौहार व की कार्यक्रम में सावन की बौछार

तीज उत्सव पर कला सृष्टि मंच ने हरियाणवी कोथली परम्परा के साथ किया सांस्कृतिक धमाल

एनडी हिन्दुस्तान

कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में वरिष्ठ नागरिकों एवं अनुभवी कलाकारों की प्रमुख संस्था देश प्रदेश में ही नहीं विदेश में भी अपनी विशेष पहचान बना चुकी है। अंतर्राष्ट्रीय कलाकार बृज किशोर शर्मा के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में कला सृष्टि मंच द्वारा सावन के सुहाने मौसम में पारंपरिक हरियाणवी कोथली परंपरा को निभाते हुए हर्षोल्लास के साथ तीज महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से की गई। मंच की ओर से आयोजित इस उत्सव में सभी का परिचय फैशन शो के माध्यम से किया गया, जिसमें कुलभूषण व्यास दुबई द्वारा निर्णायक की भूमिका अदा की। इस अवसर पर कला सृष्टि मंच के सभी उम्दा कलाकारों ने गायन, नृत्य, कविता पाठ एवं हरियाणवी चुटकुलों के माध्यम से सांस्कृतिक धमाल मचाया। इस अवसर पर हरियाणवी कोथली की परम्परा भी विधिवत रूप में मनाई गई। संस्था के वरिष्ठ सदस्यों रमन कान्ता शर्मा, सुदेश मदान, डा. जय भगवान सिंगला, आशा सिंगला एवं बृज किशोर शर्मा द्वारा हरियाणवी कोथली की रस्म अदा की गई। जिसमें डा. जय भगवान सिंगला, आशा सिंगला एवं बृज किशोर शर्मा अपनी बहन सुदेश मदान एवं रमन कान्ता शर्मा के घर कोथली लेकर पहुंचे तो यह भावनात्मक दृश्य सभी को भाव विभोर कर गया। गीतों की श्रृंखला में सहदेव शर्मा द्वारा हरियाणवी गीत, डा. दीपक कौशिक एवं डा. स्वरित शर्मा द्वारा सावन का महीना पवन करे सोर, विभा अग्रवाल द्वारा लौटेंगी मेरी बचपन की सहेलियां, डा. रमा शर्मा द्वारा सुनो सज्जना, मीरा गौतम द्वारा ये रातें ये मौसम, डा. जय भगवान सिंगला एवं आशा सिंगला द्वारा चल चलां बागां में गौरी, मधु मौदगिल द्वारा ये रातें ये मौसम, डा. बिंदिया द्वारा ओ सजना बरखा बहार आई, डा. सत्य भूषण एवं डा. स्वरित शर्मा द्वारा भीगी भीगी रात में, अनिल वधावन द्वारा रिमझिम गिरे सावन, हरबंस कौर द्वारा बूहे वारियां, पृथ्वी नाथ गौतम द्वारा आप को हमारी कसम, डा. शालिनी शर्मा द्वारा हाय हाय ये मजबूरी, अनिल कपूर द्वारा हाल क्या है दिलों का न पूछो, रश्मि सीकरी द्वारा कहीं ये वो तो नहीं, बृज किशोर शर्मा एवं रमा शर्मा द्वारा रिमझिम के गीत सावन गाए। डा. स्वरित शर्मा द्वारा मौसम है आशिकाना द्वारा सावन एवं प्रेम रस से सरोबार गीतों की श्रृंखला प्रस्तुति की। नृत्य प्रस्तुति में रश्मि सीकरी द्वारा मेरी पतली कमर, सपना चावला द्वारा घूमर घूमर, रेणु खुंगर द्वारा मेरी नौ डांडी का बीजना, मानवी सेतिया द्वारा प्यार की बंधन, दमन शर्मा द्वारा मोहे रंग दो लाल, सुरेखा द्वारा मत छेड़ बलम, साक्षी गौतम द्वारा झांझरा का जोड़ा, नीरज आश्री द्वारा झम झम बाजे पायल, भावना शर्मा एवं बृज किशोर शर्मा द्वारा तूं लखमी चंद की रागनी टेक लागै सै और मेरे पाछे पाछे आवन का, सुशील कुमार द्वारा बोल तेरे मीठे मीठे, संजीव रिंकू छाबड़ा ने गीतों पर मनमोहक नृत्य से झूमने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम में ओम् गोपाल द्वारा दादा पोती पर काव्य पाठ, शिव कुमार किरमच, सरिता दहिया एवं हरकेश पपोसा द्वारा हरियाणवी चुटकुले के माध्यम से खूब हंसी बटोरी। हरकेश पपोसा द्वारा सभी सदस्यों को हरियाणवी पगड़ी पहनाकर सम्मान प्रदान किया। धीरज गुलाटी द्वारा शेरो शायरी से भी खूब तालियां बटोरी। इस अवसर पर अग्रवाल वैश्य समाज हरियाणा के प्रदेश महासचिव राजेश सिंगला, सुनील शर्मा, संजीव रिंकू छाबड़ा, सुरेन्द्र जोशी, दीपक शर्मा, गोल्डी औजला, डा. सुभाष मौदगिल, पंकज दत्ता, सोनिया दत्ता, ममता सहाय, डा. सुरेन्द्र सहाय इत्यादि उपस्थित रहे।

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