Home Kurukshetra News देश को एकता के सूत्र में बांधने की भाषा है हिंदीः प्रो. सोमनाथ सचदेवा

देश को एकता के सूत्र में बांधने की भाषा है हिंदीः प्रो. सोमनाथ सचदेवा

by ND HINDUSTAN
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हरियाणवी बोली को भाषा का दर्जा मिलेः डॉ. धर्मदेव विद्यार्थी

कुवि में राज्य स्तरीय कविता पाठ प्रतियोगिता

एनडी हिन्दुस्तान

कुरुक्षेत्र। हिंदी भाषा देश को एकता के सूत्र में बांधने की भाषा है। हिंदी केवल एक भाषा नहीं है, बल्कि यह हमारी ’’संस्कृति, इतिहास और भावनाओं’’ की अभिव्यक्ति का माध्यम है। हमारे देश में केवल हिंदी ही राजभाषा है इसलिए हमें हिंदी भाषा पर गौरवान्वित अनुभव करना चाहिए । देश की कोई भी राष्ट्रभाषा नहीं है। हमारे देश में 22 अनुसूचित भाषाएं हैं। उन 22 भाषाओं में भी हिंदी है और उसमें अंग्रेजी नहीं है। यह उद्गार कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग, इंस्टीट्यूट ऑफ इंटिग्रेटिड एंड ऑनर्स स्टडीज तथा जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में सीनेट हॉल में देश भक्ति पर आधारित राज्य स्तरीय कविता पाठ प्रतियोगिता के अवसर पर बतौर मुख्यातिथि व्यक्त किए। युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक प्रो. विवेक चावला ने सभी अतिथियों का स्वागत व अभिनंदन करते हुए कहा कि हिंदी भाषा भारत की बिंदी है।
कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि हमारी ऑफिशियल भाषा हिंदी है। अंग्रेजी को सह-राजभाषा का दर्जा 1949 में 15 वर्ष के लिए दिया गया था जो बाद में असीमित समय के लिए बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि हिंदी पूरे देश में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है जिसे मातृभाषा के रूप में 44 प्रतिशत लोग प्रयोग करते हैं, दूसरे स्थान पर बंगाली 8 प्रतिशत, तीसरे स्थान पर मराठी 7 प्रतिशत तथा अंग्रेजी भाषा का प्रयोग पहली सहायक भाषा के रूप में 0.02 प्रतिशत लोग करते हैं। हिंदी बहुत मजबूत, सशक्त व ताकतवर भाषा है क्योकि 150 देशों के अंदर हिंदी का प्रयोग किया जाता है। पूरे विश्व में 175 यूनिवर्सिटी में हिंदी को विषय के रूप में पढ़ाया जा रहा है। वर्तमान में विश्व के लिए हिंदी बाजार के व्यवहार की भाषा बन चुकी है। एनईपी की आत्मा हिंदी केन्द्रित रखी गई है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने एनईपी -2020 को सर्वप्रथम पूरे देश में इसके सभी प्रावधानों के साथ लागू किया है। उन्होंने कहा कि हिंदी भारत का स्वाभिमान है। ओटीटी प्लेटफार्म, टीवी चैनल्स, यूट्यूब आदि में हिंदी का प्रयोग किया जा रहा है।  मुख्य वक्ता हरियाणा साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. धर्मदेव विद्यार्थी ने कहा कि हिंदी बहुत महत्वपूर्ण भाषा है। हिंदी भाषा को देश के 140 करोड़ लोग समझ व बोल सकते हैं। हिंदुस्तान का कोई कोना ऐसा नहीं जहां हिंदी बोली न जाती हो। उन्होंने कहा कि अरबी भाषा बोली भी जाती है और खाई भी जाती है। चीनी भाषा खाई भी जाती है और बोली भी जाती है। अंग्रेजी जिसके हम सब दिवाने रहते हैं वो बोली जाती है और पी भी जाती है। हिंदी सबसे ज्यादा शक्तिशाली भाषा है। हिंदी भाषा जैसी बोली जाती है वैसे ही लिखी भी जाती है। हिंदी हमारे माथे की बिंदी है और इस बिंदी की बहुत बड़ी ताकत है। हिंदी भारत का गौरव है। भारत बोलते हुए हमें गर्व की अनुभूति होती है। उन्होंने कहा कि ‘‘हिंदी मेरी मां का नाम, बाप का नाम हिंदुस्तान, अब तुम ही यह फैसला कर दो किसकी मैं हूं संतान।’’ उन्होंने कहा कि हरियाणवी को भाषा का दर्जा दिलाने में विशेष मुहिम का साथ दे युवा क्योंकि निज भाषा से ही हरियाणा का विकास ओर अधिक आगे बढ़ेगा।
कुलसचिव डॉ. वीरेन्द्र पाल ने कहा कि हिंदी पर हमें अभिमान है। हिंदी भाषा में जैसा अक्षर लिखा जाता है वैसा ही पढ़ा जाता है। हिंदी बड़े दिलवाली भाषा है। 8वीं शताब्दी में हिंदी की उत्पत्ति हुई। हिंदी भाषा को किसी भी भाषा से खतरा नहीं है जबकि हिंदी अन्य भाषाओं को संग्रहित कर आगे बढ़ रही है।
जनसंचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी संस्थान के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने कार्यक्रम की विषय वस्तु बताते हुए कहा कि हिंदी ने पिछले 20 सालों में रिकॉर्ड तोड दिए हैं। आज 100 से ज्यादा टीवी चैनल हिंदी का प्रयोग कर रहे हैं। यूएनओ व विदेश मंत्रालय में हिंदी में कार्य किया जा रहा है। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने विदेशों दौरों के मंचों पर हिंदी में बात कर रहे हैं जिससे वैश्विक स्तर पर हिंदी का प्रचार-प्रसार पहले से ज्यादा बढ़ा है। इसी कारण हिंदी बाजार के व्यवहार के भाषा बन चुकी है। अंत में प्राचार्या प्रो. रीटा ने सभी अतिथियों का धन्यवाद प्रकट किया। इस कार्यक्रम के मंच का संचालन असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. वंदना ने किया। निर्णायक मंडल के रूप में प्रो. दिनेश दधीचि, प्रो. सीडीएस कौशल व डॉ. रेनू दहिया मौजूद रही।
इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. वीरेन्द्र पाल, प्रो. रीटा, प्रो. विवेक चावला, प्रो. अनिल मित्तल, प्रो. परमेश कुमार, प्रो. विवेक गौड़, डॉ. हरिओम फुलिया, प्रो. कुसुमलता,  डॉ. अजायब सिंह, डॉ. रामचन्द्र, डॉ. मधुदीप, डॉ. रोमा, डॉ. अभिनव, डॉ. तपेश किरण, डॉ. रोशन मस्ताना, डॉ. प्रदीप राय, सचिन, सुनीता, राहुल अरोड़ा, राकेश भोरिया सहित शिक्षक व विद्यार्थी मौजूद थे।

स्वदेशी हमारी आत्मनिर्भरता की पहचान

हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित राज्य स्तरीय कविता पाठ प्रतियोगिता में कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि स्वदेशी हमारी आत्मनिर्भरता की पहचान है। हिंदी ही हमारे स्वदेशी होने का प्रमाण है। हमारी भाषा, भूषा, भजन, भोजन, भ्रमण व भवन में स्वदेशी का होना जरूरी है। इसे अपने जीवन में उतारकर, हिंदी का प्रयोग कर व विदेशी वस्तुओं का जीवन में कम उपयोग कर हम विकसित व समृद्ध भारत 2047 का स्वप्न साकार करने में सफल हो सकेंगे।

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