‘हर चिप, हर कोड अब मेड इन इंडिया होगा’ लिसियंथस टेक ने CERT-In, HCL टेक, IIIT-H के साथ किए मेगा समझौते
गुरुग्राम की साइबर सुरक्षा कंपनी लिसियनथस टेक ने किया अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन
एनडी हिन्दुस्तान
दिल्ली । भारत अब साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में सिर्फ़ उपभोक्ता नहीं, निर्माता बनेगा। यह हुंकार बुधवार को नई दिल्ली के न्यू महाराष्ट्र सदन में गूँजी जब पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने “साइबर शिक्षित भारत : क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा” विषयक अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया।
दीप प्रज्वलन के बाद अपने संबोधन में श्री कोविंद ने कहा, “भारत जब विकसित राष्ट्र और डिजिटल महाशक्ति बनने की राह पर है, तब साइबर सुरक्षा राष्ट्रीय कर्तव्य बन गई है। साइबर शिक्षित भारत जैसे अभियान ही हमें मजबूत कवच देंगे।”
मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इसे डिजिटल आत्मनिर्भरता से जोड़ा। उन्होंने कहा, “बिना साइबर कवच के डिजिटल प्रदेश या डिजिटल इंडिया का सपना अधूरा है।”
कार्यशाला में सबसे बड़ा धमाका तब हुआ जब लिसियंथस टेक के संस्थापक-सीईओ खुशहाल कौशिक ने एक के बाद एक चार ऐतिहासिक घोषणाएँ कीं:
1. CERT-In के साथ देशव्यापी साइबर जागरूकता अभियान, ट्रेनिंग प्रोग्राम और साइबर ड्रिल की साझेदारी।
2. HCL टेक के साथ स्वदेशी क्लाउड, सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर (SOC), डेटा सेंटर, नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर और क्वांटम-सुरक्षित हार्डवेयर के लिए सेंटर्स ऑफ़ एक्सीलेंस की स्थापना।
3. IIIT-हैदराबाद के साथ भारत-विशिष्ट AI आधारित साइबर थ्रेट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म, OT-IoT सिक्योरिटी सॉल्यूशन और रिसर्च प्रोजेक्ट।
4. ग्रामैक्स साइबर टेक के साथ क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर (बिजली, बैंकिंग, स्वास्थ्य) के लिए स्वदेशी थ्रेट डिटेक्शन टूल।
खुशहाल कौशिक ने मंच से ऐलान किया, “अब बहुत हुआ। आज से हर लाइन कोड, हर चिप, हर एल्गोरिदम भारतीय इंजीनियर डिज़ाइन करेंगे, भारतीय कंपनी बनाएगी और भारतीय नागरिक की सुरक्षा करेगी।”
MeitY के अतिरिक्त सचिव अभिषेक सिंह ने बताया कि सरकार ऊर्जा, वित्त, स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील सेक्टरों को साइबर हमलों से बचाने के लिए नई नीति और जागरूकता अभियान पर काम कर रही है।
पूर्व राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वयक लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) राजेश पंत और लिसियंथस टेक के चेयरमैन डॉ. एसके वर्मा ने भी साइबर सुरक्षा को “सभ्यतागत चुनौती” बताया।
कार्यशाला में रैंसमवेयर, AI हमले, डीपफ़ेक जैसे नए खतरों पर पैनल चर्चा हुई और छात्रों-प्रोफेशनल्स के लिए हैंड्स-ऑन सेशन भी रखे गए।
आँकड़ा चौंकाने वाला हैः भारत पर हर साल 15 लाख से ज़्यादा साइबर हमले हो रहे हैं। ऐसे में यह कार्यशाला सिर्फ़ एक इवेंट नहीं, बल्कि डिजिटल भारत के किले की नींव साबित होने जा रही है।
साइबर शिक्षित भारत का नारा अब सिर्फ़ सपना नहीं, हक़ीक़त बनने की राह पर है। जय हिंद, जय डिजिटल भारत!