स्वतंत्रता सेनानी महाकवि सुब्रह्मण्यम् भारती की जयंती पर भारतीय भाषा उत्सव का आयोजन
समारोह में तमिल, तेलगु, मराठी, बंगाली, गुजराती , कन्नड़,संस्कृत इत्यादि 15 भारतीय भाषाओं में मनमोहक प्रस्तुतियां हुई
एनडी हिन्दुस्तान
कुरुक्षेत्र। आज गीता निकेतन आवासीय विद्यालय में महान् स्वतंत्रता सेनानी महाकवि सुब्रह्मण्यम् भारती की जयंती के उपलक्ष में भारतीय भाषा उत्सव का भव्य समारोह आयोजित किया गया। समारोह का शुभारंभ दीप स्तुति और सरस्वती वन्दना के साथ हुआ।समारोह में सप्तम कक्षा के विद्यार्थी आदित्य एवं रूहानी ने सुब्रह्मण्यम् भारती का जीवन परिचय, साहित्य में उनका योगदान एवं स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।इसके उपरांत सर्वप्रथम अष्टम कक्षा के विद्यार्थियों ने तमिल भाषा में देशभक्ति पर एक सुंदर नाटक प्रस्तुत किया,गायत्री ने तमिल भाषा में द्रविड़ संस्कृति, परम्परा और महान् सन्त तिरुवल्लु के विषय में जानकारी दी।मराठी में विट्ठल महाराज की शिक्षाओं पर मयूरेश और आर्यन ने सुंदर संवाद प्रस्तुत कर सभी को चकित कर दिया। बंगाली भाषा में आनन्द मठ पर सुन्दर चर्चा में मयंक,मेहनाज और रूहिना ने भूमिका निभाई।दक्षिण भारत की प्रसिद्ध भाषा कन्नड़ में विनायक ,गर्विश और युवराज ने विकसित भारत विषय पर रोचक नाटक प्रस्तुत किया।इसके बाद बारी थी उत्तर भारत की सुमधुर भाषाओं के अद्भुत प्रदर्शन की, इसमें सर्वप्रथम विधि,रक्षिता,क्षिप्रा और तनिष्का ने राजस्थानी भाषा में अतिथिसत्कार को एक लघु नाटिका के माध्यम से दिखाया। उन्होंने राजस्थानी भोजन, वेशभूषा, त्योहार और परम्पराओं को दिखाने का सुन्दर प्रयत्न किया।अर्णव,काम्या और मेघा ने पहाड़ी भाषा में पर्वतीय जीवन और पर्यटन पर आधारित एक नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। याशी और माही ने पंजाबी भाषा में वर्तमान शिक्षा पर एक शिक्षाप्रद नाटक प्रस्तुत किया।राष्ट्र भाषा हिंदी में छात्रों ने अनेकता में एकता पर आधारित समूह गान प्रस्तुत कर एकता का सन्देश दिया।अन्तिम चरण में सभी भाषाओं की जननी देव भाषा संस्कृत का क्रम आया।संस्कृत में यथार्थ,माहिरा और अक्षिता ने सुंदर वार्तालाप प्रस्तुत कर यह सिद्ध कर दिया संस्कृत अत्यंत मधुर और सरल भाषा है।विविध भाषाई वातावरण में विद्यालय के वरिष्ठ आचार्य डॉ सन्तोष देवांगन ने छत्तीसगढ़ी में मधुर लोक गीत प्रस्तुत कर वातावरण को रमणीय बना दिया।प्राचार्य श्री नारायण सिंह ने अनेक भाषाओं की प्रसिद्ध सूक्तियों से प्रतिभागियों का उत्साह वर्धन किया।उन्होंने कहा कि आज इस कार्यक्रम में अखण्ड भारत और विकसित भारत की झलक दिखाई दी,हम भारतीय एक दूसरे की भाषा का सम्मान करते हुए भारतीय भाषाओं को सीखेंगे तो भारतीय ज्ञान परंपरा सुसमृद्ध होगी।कार्यक्रम के अन्त में सभी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया।