भारत सरकार द्वारा गुजरात में घोषित कॉमनवेल्थ खेल 2030 व ओलंपिक 2036 का मेजबान या सह-मेजबान राज्य हरियाणा को बनाया जाए – दीपेन्द्र हुड्डा
HPSC चेयरमैन 3 करोड़ हरियाणावासियों में से किसी काबिल व्यक्ति को बनाया जाए – दीपेन्द्र हुड्डा
चंडीगढ़ में प्रेस वार्ता के दौरान सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने किया ऐलान हरियाणा की हितों की अनदेखी पर वे तथा उनके साथी चुप नहीं बैठेंगे, इस दौरान 2 दर्जन विधायक, 4 सांसद रहे मौजूद
एनडी हिन्दुस्तान
चंडीगढ़। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने आज चंडीगढ़ में पत्रकार वार्ता को संबोधित किया और कहा कि केंद्र सरकार हरियाणा के हितों पर कुठराघात कर रही है और प्रदेश सरकार गूंगी बनी बैठी है। हमने फैसला किया है कि हम चुप नहीं रहेंगे, संसद से सड़क तक हरियाणा के हकों के लिए लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और प्रदेश की बीजेपी सरकार हरियाणा के हकों को पूरी तरह दरकिनार,नजरअंदाज करके चल रही है। उन्होंने भारत सरकार द्वारा गुजरात में घोषित कॉमनवेल्थ खेल 2030 व ओलंपिक 2036 का मेजबान या सह-मेजबान राज्य हरियाणा को बनाने की और HPSC चेयरमैन को तुरंत हटाकर 3 करोड़ हरियाणावासियों में से किसी काबिल व्यक्ति को बनाने की मांग की। दीपेन्द्र हुड्डा ने सरकार पर मुख्य रूप से 5 बड़े आरोप लगाते हुए उनका विस्तृत उदाहरण दिया। चंडीगढ़ में प्रेस वार्ता के दौरान सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने किया ऐलान हरियाणा की हितों की अनदेखी पर वे तथा उनके साथी चुप नहीं बैठेंगे, इस दौरान 2 दर्जन विधायक, 4 सांसद मौजूद रहे।उन्होंने कहा कि हरियाणा ऐसा राज्य है जो कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और ओलंपिक्स में 50% मेडल भारत माता के लिए जीतकर लाता है, लेकिन उसे नज़रअंदाज़ कर दिया गया। पिछले 4 ओलंपिक में देश को मिले कुल मेडल में से आधे से ज्यादा हरियाणा के खिलाड़ियों ने जीते। पिछले ओलंपिक में करीब 25 प्रतिशत खिलाड़ी हरियाणा से थे। हमें गर्व है कि 2006 के बाद से ओलंपिक समेत जितने भी खेल हुए उनमें 50 प्रतिशत मेडल और 25 प्रतिशत खिलाड़ियों का हिस्सा हरियाणा का है। लेकिन जब कॉमनवेल्थ खेल 2030 के आयोजन की मेजबानी का अवसर हमारे देश को मिला तो मेजबान प्रदेश के चयन में केंद्र की भाजपा सरकार ने हरियाणा को नहीं चुना। बल्कि इसके लिए गुजरात का चयन किया गया। कॉमनवेल्थ खेल 2030 के लिए लाखों करोड़ का निवेश अब अहमदाबाद में होगा, खेल का ढांचा तैयार होगा। अगर यही खेल का ढांचा, स्टेडियम और डेवलपमेंट पर लाखों करोड़ खर्चा हरियाणा में होता। उन्होंने कहा कि भारत के हर प्रदेश की अपनी विशेषताएं हैं, अपनी सफलताएं हैं, अपनी खूबियां हैं और उसके आधार पर भारत सरकार को राजधर्म निभाते हुए निर्णय लेना चाहिए। जब खनिज की बात आती है तो उड़ीसा का नाम आता है। पंजाब के गीतकार, गायकों का नाम दुनिया के अंदर लिया जाता है। साहित्य की बात आती है तो बंकिम चंद चैटर्जी से लेकर और रबीन्द्र नाथ टैगोर जैसे साहित्यकार बंगाल के माने जाते हैं। गुजरात के ट्रेडर्स की अपनी पहचान है। मगर जब खिलाड़ियों की बात आती है तो हरियाणा से आने वाले खिलाड़ियों ने भी देश के नाम रोशन करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।सरकार ने ओलंपिक 2036 को भी गुजरात में कराने के लिए आधिकारिक बोली (बिडिंग) पेश करने की घोषणा की है। अब सारा खेल बजट वहीं खर्च होगा, लेकिन अगर यह निवेश हरियाणा में किया जाता तो हमारे खिलाड़ी कितने और मेडल जीतते इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। कॉमनवेल्थ खेल 2030 व ओलंपिक 2036 में हरियाणा को कम से कम को-होस्ट राज्य बनाने से लाखों करोड़ के बजट में से हरियाणा के खेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी कुछ खर्च होता और राज्य के खेल ढांचे में सुधार होता। हरियाणा को भारत के खेलो इंडिया में सबसे कम बजट दिया गया। देश के ₹3500 करोड़ के ‘खेलो इंडिया’ बजट में ₹600 करोड़ गुजरात को और सबसे ज्यादा मेडल लाने वाले हरियाणा को सिर्फ ₹80 करोड़ ही दिए गए, जो देश के 28 प्रदेशों में सबसे कम है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में बने 481 खेल स्टेडियम, राजीव गांधी खेल स्टेडियम, अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई स्टेडियम दुर्दशा का शिकार हो गए हैं और हमारे खिलाड़ियों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। 2019 के बाद इन स्टेडियम की रिपेयर या अपग्रेड या नए स्टेडियम बनाना तो दूर इनमें स्पोर्ट्स इक्विपमेंट का भी अभाव बना हुआ है।सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि देश में सबसे ज्यादा जीएसटी कलेक्शन हरियाणा से हो रहा है, सबसे ज्यादा टोल वसूली भी हरियाणा से हो रही है। लेकिन हरियाणा को बजट आवंटन देश में सबसे कम होता है। केंद्र सरकार हरियाणा से कुल 7.10 प्रतिशत जीएसटी इकट्ठा करती है, लेकिन बदले में हरियाणा को केवल 1.009 प्रतिशत हिस्सा ही दिया जाता है। यानी केंद्र सरकार हरियाणा से 7 रुपया ले रही है और केवल 1 रुपया वापस दे रही है, जो पूरे देश में सबसे कम है। सांसद वरुण मुलाना जी ने संसद में मनरेगा कार्यों को लेकर सवाल पूछा तो उसके जवाब से चौंकाने वाली जानकारी मिली कि हरियाणा में 8 लाख से अधिक मनरेगा मज़दूर पंजीकृत व सक्रिय हैं, लेकिन 2024-25 में महज़ 2,191 परिवारों को ही 100 दिन का काम मिला। वीबी जीरामजी कानून के जो नए प्रावधान हैं उसमें तो मनरेगा के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। मनरेगा के मजदूरों की अधिकारों की रक्षा करने के लिए, उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए अब हम सड़क पर आकर, हर मजदूर तक पहुंच कर इस लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे। नये प्रावधान में मनरेगा के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। केंद्र सरकार ने नाम बदल दिया लेकिन काम खत्म कर दिया। भाजपा सरकार केवल नाम में विश्वास रखती है काम में नहीं।उन्होंने जब हरियाणा में सबसे ज्यादा टोल वसूली पर संसद में सवाल पूछा तो सरकार ने जवाब दिया कि देश में 60 किलोमीटर पर टोल होने का नियम है लेकिन हरियाणा में दो टोल के बीच औसत दूरी सबसे कम 45 किलोमीटर है जो गुजरात में 200 किलोमीटर, केरल में 223 किलोमीटर, राजस्थान में 100 किलोमीटर है। यही नहीं प्रति वर्ष प्रति किलोमीटर कलेक्शन हरियाणा में 70, गुजरात में 30 लाख, कर्नाटक में 35 लाख, झारखंड में 19 लाख, कर्नाटक में 35 लाख, महाराष्ट्र में 21 लाख है. हरियाणा में कुल टोल गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र से भी ज्यादा है। लेकिन जब केंद्र सरकार की नीतियों से राहत देने की बात आती है तो हरियाणा को वंचित रख दिया जाता है। उत्तर भारत के बाढ़ ग्रस्त इलाके में केंद्र सरकार ने दिल्ली, उत्तराखण्ड, हिमाचल और पंजाब को फ्लड अफेक्टेड प्रदेश घोषित किया तथा उत्तराखण्ड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश को 1500 1500 करोड़ की राहत दी। हरियाणा को कुछ नहीं मिला क्योंकि यहाँ की सरकार ने मांग ही नहीं करी। इसी तरह साढ़े 5 लाख किसानों क्षतिपूर्ति पोर्टल पर पंजीकरण कराया उनमें से करीब 53,000 मात्र को ही मुआवजा मिला क्योंकि ये क्षतिपूर्ति पोर्टल नहीं किसान क्षति पोर्टल है। प्रदेश की बीजेपी सरकार भी हरियाणा के हकों की पैरवी करने के लिए कुछ कर नहीं रही। मुख्यमंत्री जी कभी कहते हैं कि बिहार से उनका गहरा नाता कभी पंजाब की राजनीति में सक्रिय हो जाते हैं, लेकिन हरियाणा के हितों की जब बात आती है, तो मौन धारण कर लेते हैं।दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि हरियाणा में एचपीएससी के माध्यम से ग्रुप ए और ग्रुप बी की जो नौकरियां लग रही हैं उसमें ज्यादातर बाहर के बच्चे लगाए जा रहे हैं। एक के बाद एक लिस्ट आती है उसमें हरियाणा के बाहर के बच्चे चयनित होते हैं। यहां तक कि एचपीएससी के चेयरमैन भी बाहर के लगे हुए हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या 3 करोड़ हरियाणावासियों में एक भी कोई ऐसा कोई नागरिक हरियाणा का नहीं मिला जो एचपीएससी चेयरमैन लग सके। जबकि यूपीएससी के चेयरमैन और यूपीएससी के सदस्य तक हरियाणा के लोग रहे हैं, मगर एचपीएससी में कोई इतना काबिल नहीं मिल पाया। हरियाणावासियों का एक साजिश के तहत हक भी मारा जा रहा है और जिन वर्गों को आरक्षण का लाभ मिलता है उनके साथ भी बड़ा धोखा हो रहा है। हरियाणा के युवा डंकी रूट से पलायन कर रहे और हरियाणा में ग्रुप ए, बी की, सी की नौकरियों का पलायन दूसरे प्रदेशों में हो रहा है। उन्होंने कहा कि जैसे हरियाणा में सरकार का रिमोट कंट्रोल दिल्ली से चल रहा है उसी तरह एचपीएससी की नौकरियों में चयन भी हरियाणा के बाहर से किया जा रहा है।इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि हरियाणा पावर यूटिलिटीज (HPU) में असिस्टेंट इंजीनियर AE/SDO भर्ती में 214 अभ्यर्थियों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाया गया जिसमें से केवल 29 हरियाणा के थे। हरियाणा के जो बच्चे यूपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा निकाल लेते हैं, वो हमारे खुद के एचपीएससी से असिस्टेंट इंजीनियर में क्यों नहीं आ पा रहे? यूपीएससी में पूरे देश में सबसे बढ़िया रिजल्ट हरियाणा का है। दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि इससे पहले सिविल जज के चयन में 110 उसमें से 60 बाहर के, सिंचाई विभाग में 49 में से 28 हरियाणा से बाहर के उम्मीदवार थे। एसडीओ इलेक्ट्रिकल में 80 में से 69 बाहर के, केवल 2 ही हरियाणा के थे। इसी तरीके से टेक्निकल एजुकेशन डिपार्टमेंट में लेक्चरर में 153 में से 106 बाहरी उम्मीदवार चयनित हुए। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि जिन वर्गों को आरक्षण से लाभ मिलना चाहिए था, उन वर्गों के साथ भी बैकडोर से बड़ा धोखा किया जा रहा है। इसका भी उदाहरण देते हुए बताया पिछले हफ्ते असिस्टेंट प्रोफेसर, इंग्लिश। 613 में से कुल 151 अभ्यर्थियों का चयन हुआ, बाकी पद खाली रहे। डीएससी वर्ग के साथ बड़ा अन्याय करते हुए 60 रिजर्व सीट्स में से केवल 1 का चयन किया गया, 35% और कई कंडीशंस की आड़ में बाकी खाली छोड़ दी गई। इसी तरह बीसीए वर्ग 85 में से मात्र 5 का चयन, बाकी सीटें खाली। बीसीबी वर्ग 36 में से केवल 3 का चयन, बाकी सीटें खाली। ओएससी वर्ग 60 में से केवल 2 का चयन, 58 सीटें खाली। जिन वर्गों को आरक्षण से लाभ मिलना चाहिए था, उन वर्गों के साथ भी बड़ा धोखा किया जा रहा है। एचपीएससी चेयरमैन जो खुद हरियाणा से नहीं हैं वो हरियाणा की शिक्षा प्रणाली पर ही प्रश्नचिन्ह उठा रहे हैं।पानी को लेकर और राजधानी को लेकर हरियाणा के हकों पर प्रहार हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट से एसवाईएल पर फैसला हरियाणा के हक में है, लेकिन उसका भी काम नहीं बढ़ाया, केंद्र सरकार से कोई पैरवी नहीं की गई न प्रधानमंत्री जी से मिलने का समय भी नहीं लिया गया। इतना ही नहीं पहली बार पंजाब ने गर्मी के पीक सीजन में भाखड़ा बाँध के हमारे हिस्से के पानी को आधा कर दिया। तब भी हरियाणा के किसी भाजपा के नेता ने केंद्र सरकार से कोई पैरवी नहीं की। लेकिन हम उस समय भी हरियाणा के हक की बात उठाने गए थे। जहां तक राजधानी चंडीगढ़ की बात है तो विधानसभा बनाने के लिए जगह के प्रस्ताव को भी अभी केंद्र सरकार ने मंजूरी नहीं दी। हम चंडीगढ़ में अपनी विधानसभा भी नहीं बना सकते। चंडीगढ़ में जो रहता है आज वो हरियाणा की डोमिसाइल को क्लेम नहीं कर सकता।पिछले 11-12 साल में हरियाणा में राष्ट्रीय महत्व के बड़े बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स जैसे महम का इंटरनेशनल एअरपोर्ट, सोनीपत की रेल कोच फैक्ट्री, गुरुग्राम के बिनोला गांव की नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी कांग्रेस सरकार के समय 88 किलोमीटर मेट्रो बनी थी, लेकिन जब से बीजेपी सरकार आई है, एक इंच भी मेट्रो नहीं बनी। हिसार का एकमात्र दूरदर्शन केंद्र बंद हो गया। एम्स बाढ़सा में राष्ट्रीय महत्व के 10 और राष्ट्रीय संस्थान आने थे, वो ठंडे बस्ते में चले गए। प्रदेश की भाजपा सरकार ने हरियाणा के हितों को रक्षा करना तो दूर ये भी नहीं कहा गलत हो रहा है।पत्रकार वार्ता के दौरान सांसद जय प्रकाश जेपी, सांसद वरुण मुलाना, सांसद सतपाल ब्रह्मचारी, पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष उदयभान, 2 दर्जन विधायक, पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।