एनडी हिन्दुस्तान
पंचकूला । हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को पंचकूला स्थित स्वर्ण जयंती हरियाणा वितिय प्रबंधन संस्थान, सैक्टर-3 पंचकूला में मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी (सीएमजीजीए) की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव यशपाल, स्वर्ण जयंती हरियाणा वितिय प्रबंधन संस्थान के महानिदेशक डाॅ राज नेहरू, जीवीएफ के सीईओ सुमित कुमार, ऋषिहुड यूनिवर्सिटी के सीईओ साहिल अग्रवाल तथा हेड ऑफ प्रोग्राम्स वसुंधरा उपस्थित रहीं।समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने सीएमजीजी सहयोगियों द्वारा पिछले माह दो मॉड्यूल-ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और मानव संसाधन- के अंतर्गत किए गए फील्ड कार्यों का आंकलन किया। उन्होंने अब तक सहयोगियों द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की और उन्हें राज्य के सुशासन तथा विकास संबंधी प्राथमिकताओं में सक्रिय योगदान जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया।मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि फील्ड से उभरकर सामने आए प्रमुख मुद्दों पर चर्चा के लिए उपायुक्तों के साथ एक बैठक आयोजित की जाए। उन्होंने सहयोगियों द्वारा चिन्हित चुनौतियों के प्रभावी समाधान के लिए जिला अधिकारियों के साथ अधिक सुदृढ़ समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।इस समीक्षा के दौरान सीएमजीजीए के लिए नए फोकस क्षेत्रों की भी शुरुआत की गई। स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोगी हरियाणा में आयुष्मान भारत और चिरायु योजना के क्रियान्वयन को सुदृढ़ करने पर कार्य करेंगे। शिक्षा क्षेत्र में स्कूल अवसंरचना तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। जल क्षेत्र में जल प्रबंधन, वर्षा जल संचयन तथा तालाबों के पुनर्जीवन को प्राथमिकता दी जाएगी।
अब सहयोगी अपने-अपने जिलों में लौटकर नवप्रारंभित तथा प्रचलित दोनों मॉड्यूलों पर पुनः कार्य आरंभ करेंगे, जो राज्य के विकास एजेंडा के प्रमुख स्तंभ हैं। मुख्यमंत्री ने सहयोगियों को अधिकारियों के साथ निकट समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए, विशेष रूप से जल और सीवरेज से जुड़े मुद्दों पर, तथा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद अधिकारियों से प्राप्त फीडबैक को भी शामिल करने को कहा।सीएमजीजीए फोरम 1 का आयोजन 14 मार्च से 21 मार्च, 2026 तक किया जा रहा है, जो सीएमजीजीए सहयोगियों के दस सप्ताह के फील्ड इमर्शन के उपरांत आयोजित हो रहा है। यह फोरम सहयोगियों और वरिष्ठ नेतृत्व को प्रगति की समीक्षा करने, फील्ड स्तर की चुनौतियों की पहचान करने तथा हरियाणा की सुशासन प्राथमिकताओं के अनुरूप आगामी कार्यवाही तय करने का अवसर प्रदान करता है।