Home Karnal news स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति के पर्याय हैं महाराणा प्रताप : डॉ. चौहान

स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति के पर्याय हैं महाराणा प्रताप : डॉ. चौहान

by ND HINDUSTAN
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तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न

एनडी हिन्दुस्तान

नीलोखेड़ी/ करनाल। आजीवन विदेशी आक्रांताओं से संघर्षरत रहने के बावजूद वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप ने अपने शासनकाल में बागवानी और जल संरक्षण के क्षेत्र में सुनियोजित और व्यवस्थित कार्य किया। भारत माता के इसी अद्भुत सपूत के नाम पर हरियाणा सरकार ने राज्य बागवानी विश्वविद्यालय का नामकरण कर अतुलित योद्धा महाराणा प्रताप को सच्ची श्रद्धांजलि दी है। हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने आज संस्थान में तीन दिवसीय युक्तधारा प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन सत्र में प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की। समापन सत्र के प्रारंभ में उन्होंने सभी प्रतिभागियों और प्रशिक्षकों के साथ महाराणा प्रताप के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।डॉ. चौहान ने कहा कि आज महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर हमें उनके जीवन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। उन्होंने हल्दीघाटी के युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने स्वाभिमान, स्वतंत्रता और राष्ट्रहित के मूल्यों से कभी समझौता नहीं किया। उनका जीवन हमें संघर्ष, साहस, आत्मसम्मान, कर्तव्यनिष्ठा और मातृभूमि के प्रति समर्पण की सीख देता है। उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों को अपने कार्यक्षेत्र में इन्हीं आदर्शों का अनुसरण करते हुए ईमानदारी एवं समर्पण के साथ दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि युक्तधारा पोर्टल ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की वैज्ञानिक एवं तकनीकी निगरानी का सशक्त माध्यम है। इसके माध्यम से योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा विकास कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान का उपयोग अपने-अपने क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से करने का आह्वान किया।कार्यक्रम के समन्वयक कमलदीप सांगवान ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को युक्तधारा पोर्टल तथा जीआईएस आधारित निगरानी प्रणाली के विभिन्न पहलुओं की व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई, जिससे ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की बेहतर मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जा सके।राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान से आए अनिल कुमार ने कहा कि आधुनिक तकनीक और भू-स्थानिक आंकड़ों का प्रभावी उपयोग ग्रामीण विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों द्वारा दिखाई गई सक्रिय भागीदारी की सराहना की।इस अवसर पर संस्थान के सहायक आचार्य संदीप कुमार, सहायक आचार्य वजीर सिंह, सौरभ अरोड़ा, मोहित शर्मा तथा विभिन्न जिलों से आए अतिरिक्त खंड कार्यक्रम अधिकारी एवं अन्य प्रतिभागी उपस्थित रहे।

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