कहा- मंडियों में गेहूं खरीद के लिए उचित व्यवस्था करे सरकार
नमी, रेजिस्ट्रेशन व सर्वर डाउन के नाम पर ना किया जाए किसानों को परेशान- हुड्डा
किसानों का सहयोग करे, उनपर नए-नए प्रयोग ना करे सरकार- हुड्डा
किसानों की आय नहीं लागत बढ़ा रही है सरकार, डीएपी के बढ़े रेट लिए जाएं वापिस- हुड्डा
किसान से खाद, बीज, बिजली, दवाई, पेट्रोल-डीजल व जीएसटी के नाम पर हो रही चौतरफा वसूली- हुड्डा
न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने आज बाबैन, लाडवा और थानेसर अनाज मंडियों का दौरा कर गेहूं खरीद का जायजा लिया। सबसे पहले लाडवा मंडी में पहुंचे हुड्डा ने मंडी में आए किसान और मजदूरों से बातचीत की और व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। हुड्डा ने कहा कि उन्हें लगातार प्रदेशभर से किसानों की शिकायतें मिल रही थीं। क्योंकि, 1 अप्रैल से खरीद का ऐलान करने के बावजूद सरकार ने मंडियों में उचित व्यवस्था नहीं की। कई जगहों पर अपनी फसल लेकर मंडी में पहुंच रहे किसानों को नमी ज्यादा होने, वेब पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन ना करवाने और सर्वर डाउन का बहाना बनाकर परेशान किया जा रहा है। हुड्डा ने कहा कि सरकार किसानों का सहयोग करे, ना कि उनके साथ रोज-रोज नए प्रयोग करे। जो किसान अपनी फसल लेकर मंडी में पहुंच रहे हैं, सरकार को बहानेबाजी छोड़कर फौरन उनकी खरीद करनी चाहिए।
इस मौके पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने गेहूं में नमी की मानक सीमा को 14% से घटाकर 12% करने के फैसला का भी विरोध किया। उनका कहना है कि किसानों को फसल का एमएसपी ना देना पड़े, इसलिए सरकार ने नमी की मान्य मात्रा को घटाने का फैसला लिया है। अब मंडियों में वहीं गेहूं खरीदा जाएगा जिसमें नमी 12 प्रतिशत से कम होगी। पहले 14 प्रतिशत तक नमी वाले गेहूं की भी खरीद होती थी। इतना ही नहीं पहले एक क्विंटल में 0.75 प्रतिशत मिश्रित मात्रा (राई, सरसों, भूसा आदि) होने पर गेहूं की तौल करवाई जाती थी। इस बार ये मानक घटाकर 0.50 प्रतिशत कर दिया गया है। इस बार मिश्रित मात्रा 0.50 प्रतिशत यानी एक क्विंटल में 500 ग्राम से अधिक नहीं होगी। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा। इसलिए सरकार को तुरंत इस फैसले को वापिस लेना चाहिए।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि बीजेपी सरकार का रवैया हमेशा से किसान विरोधी रहा है। इसीलिए किसानों की आय डबल करने का झूठा नारा देकर सरकार लगातार उसकी लागत बढ़ाने में लगी है। इसी के तरह सरकार ने डीएपी खाद का रेट 700 रुपये बढ़ाने का फैसला लिया है। पहले से पेट्रोल-डीजल के रेट में बेतहाशा बढ़ोत्तरी झेल रहे किसान की लागत कई हज़ार रुपये बढ़ना तय है। ये इतिहास में पहली बार हुआ है जब किसी सरकार ने डीएपी के दाम में इतनी बड़ी बढ़ोत्तरी की है। सरकार को इसे फौरन वापिस लेना चाहिए।
हुड्डा ने कहा कि मौजूदा सरकार किसान से खाद, बीज, बिजली, दवाई, पेट्रोल-डीजल और कृषि यंत्रों पर जीएसटी के नाम पर चौतरफा वसूली कर रही है। लेकिन किसान को उचित एमएसपी और एमएसपी का कानून देने के नाम पर सरकार चुप्पी साध लेती है। सरकार के इसी रवैए से आहत होकर ही आज किसान आंदोलनरत हैं और अपनी जायज मांगों को मनवाने के लिए सत्याग्रह कर रहे हैं।
मंडी में हरियाणा आढ़ती एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने भी पूर्व मुख्यमंत्री से मुलाकात की। आढ़तियों ने बताया कि सरकार ने उन्हें पेमेंट के फैसले को किसानों पर छोड़ने का आश्वासन दिया था। सरकार ने कहा था कि ये किसान की मर्जी होगी कि वो आढ़ती के जरिए पेमेंटे लेना चाहता है या सीधे अपने खाते में लेना चाहता है। लेकिन, अब सरकार अपने फैसले से मुकर रही है। आढ़तियों की मांग है कि सरकार अपने आश्वासन पर कायम रहे और पेमेंट को लेकर मनमानी ना करे। इस मौके पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप शर्मा,पूर्व मंत्री अशोक अरोड़ा,विधायक मेवा सिंह सहित कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।