न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र,23 अगस्त। जय ओंकार आश्रम श्री ब्रह्मा मंदिर के प्रांगण में स्थापित महर्षि अत्रि ऋषि जी के चरणों में ऋषि पंचमी धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर महर्षि जी को स्नान करा कर उनके नाम से हवन कर स्वामी श्री संदीप ओंकार जी द्वारा ओंकार महामंत्र के साथ पूर्णाहुति डाली गई। सप्त ऋषियों में महर्षि अत्रि ऋषि, वशिष्ठ ,गौतम ऋषि ,भारद्वाज कश्यप ऋषि, जमदग्नि, विश्वामित्र मुख्य रूप से थे।
स्वामी जी ने कहा कि ऋषियों के चरणों में हाजिरी लगाने से कभी भी जीवन में अकाल कष्ट नहीं आता और जीवन सुख समृद्धि से भरपूर रहता है। आज के दिन सप्तऋषियों का पूर्ण विधि-विधान से पूजन कर कथा श्रवण करने का महत्व है। यह व्रत पापों का नाश करने वाला व श्रेष्ठ फलदायी है। प्रत्येक काल में सप्तऋषि अलग अलग हुए हैं। वेदों का अध्ययन करने पर जिन सात ऋषियों या ऋषि कुल के नामों का पता चलता है। महाभारत में सप्तर्षियों की दो नामावलियां मिलती हैं। एक नामावली में कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ के नाम आते हैं तो दूसरी नामावली में पांच नाम बदल जाते हैं।
उन्होंने कहा कि कश्यप और वशिष्ठ वहीं रहते हैं पर बाकी के बदले मरीचि, अंगिरस, पुलस्त्य, पुलह और क्रतु नाम आ जाते हैं। कुछ पुराणों में कश्यप और मरीचि को एक माना गया है तो कहीं कश्यप और कण्व को पर्यायवाची माना गया है। इस अवसर पर पंडित अभिषेक शर्मा संघ संचालक पंडित श्री पं शिव नारायण दीक्षित, पंडित मांगेराम, हरिराम शर्मा ,अतुल शर्मा मौजूद थे