Home haryana किसान आंदोलन केवल किसान यूनियन का बन कर रह गया है : पवन सैनी

किसान आंदोलन केवल किसान यूनियन का बन कर रह गया है : पवन सैनी

by ND HINDUSTAN
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गुरनाम चढूनी व राकेश टिकैत पर पलटवार करते हुए पवन सैनी ने कहा कि चुनाव लड़ने पर तो इनकी जमानत तक जब्त हो गई

किसान नेता अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहे है

न्यूज डेक्स संवाददाता

पिहोवा। भाजपा के प्रदेश महामंत्री एवं लाडवा के पूर्व विधायक डा. पवन सैनी ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा जो किसानों के हित में कृषि कानून लेकर आई है ये स्वयं कांग्रेस भी लाना चाहती थी लेकिन उन्होंने कारणवश इसे लागू नही किया। उन्होंने कहा कि जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश की आजादी के 75वीं वर्षगांठ पर सन 2022 में किसानों की आमदन दोगुनी करूंगा। जिसको लेकर प्रधानमंत्री मोदी देश के तीन कृषि कानून लेकर आए जिसमें किसानो की आय दोगुनी तो होगी। जिसमें किसानों को किसी प्रकार का कोई नुक्सान नही होगा। बल्कि उन्हें कृषि कानूनों के माध्यम से ओर भी नई सुविधाएं मिलेगी।

प्रदेश महामंत्री पवन सैनी ने कहा कि आंदोलनरत किसानो का कहना है कि एमएसपी व प्रदेश की मंडिया बंद हो जाएगी इसके साथ किसानो की आढ़त मर जाएगी व लिफ्टिंग भी नही मिलेगी। अब प्रदेश सरकार ने नया इतिहास रचते हुए इस बार किसानों के खाते में फसल की पेमेंट डाली ओर न ही आढ़तियों की आढ़त मरी । उन्होंने कहा कि ये आंदोलनरत किसान एवं विपक्ष केवल लोगों को गुमराह करने का काम कर रहे है बोलने के लिए उनके पास कोई शब्द नही है। उन्होंने प्रधानमंत्री ने मंडिया को सशक्त करने के लिए एक लाख करोड़ रूपए खर्च किए हैं।

इसके साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने गन्नौर में 537 एकड़ में 7 हजार करोड़े की लागत से होर्टी कल्चर मंडी, 75 एकड़ में पौने 200 करोड़ की लाग से सेब एवं सब्जी पिजोंर में, 15-16 एकड़ में 35 करोड़ की लाग से गुरूग्राम में फूल मंडी, इसके साथ सोनीपत के गांव शेरशाह गांव में करोड़ो की लागत से मसाला मंडी बनाने का काम प्रगति पर चल रहा है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल किसान यूनियन का बन कर रह गया है। किसान नेता गुरनाम चढूनी व राकेश टिकैत पर पलटवार करते हुए पवन सैनी ने कहा कि चुनाव लडऩे पर तो इनकी जमानत तक जब्त हो गई ओर अब ये अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहे है। उन्होंने किसानों से आग्रह करते हुए कहा कि भ्रमित होने की बजाय अपना काम धंधा व खेती करें क्योंकि ये तीनो कृषि कानून किसानों के हक में है ओर उनकी खुशहाली के लिए है। 

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