न्यूज डेक्स उत्तराखंड
हरिद्वार,8 सितंबर। शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम जी महाराज,जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंदगिरी महाराज सहित देश के कई प्रमुख मठों और अखाड़ों के संतों महंतों ने श्रीजयराम संस्थाओं के संस्थापक ब्रह्मलीन देवेंद्र स्वरुप ब्रह्मचारी महाराज को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर श्रीजयराम संस्थाओं के संचालक एवं पूर्व कुलपति ब्रह्मस्वरुप ब्रह्मचारी महाराज एवं संस्था के ट्रस्टीगण एवं भक्त भी ब्रह्मलीन ब्रह्मचारी महाराज को श्रद्धांजलि देन के लिये पहुंचे थे।
वैश्विक महामारी कोरोना की वजह से कार्यक्रम को काफी सीमित संख्या में आयोजित किया गया था। श्रीजयराम आश्रम में ब्रह्मलीन ब्रह्मचारी महाराज की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अप्रित करने के उपरांत शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम जी महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन महाराजश्री ने समाज कल्याण और धर्म की पताका फहराने के साथ संस्कृत के प्रचार और प्रसार में में अहम योगदान दिया।
उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में श्रीजयराम संस्था द्वारा संचालित संस्कृत विद्यालय और महाविद्यालय चलाए जा रहे हैं। उनके शिष्य ब्रह्मस्वरुप ब्रह्मचारी महाराज ने इस पंरपरा और उद्देश्य को आगे बढ़ाने के साथ संस्था की गतिविधियों को भी आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन ब्रह्मचारी महाराज का पूरा जीवन प्रेरणादायी रहा और उन्हें पूरी उम्मीद है कि श्रीजयराम संस्था ब्रह्मलीन ब्रह्मचारी महाराज के नीति सिद्धांतों को पुण्य कार्यों को आगे बढ़ाने का काम करेगी और देशसेवा में अपना योगदान पहले की तरह भविष्य में भी देने का काम करेगी।
जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंदगिरी महाराज ने ब्रह्मलीन देवेंद्र स्वरुप ब्रह्मचारी महाराज की चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए गाय,गंगा और गीता के लिये किये गये कार्यों का स्मरण किया। इस मौके पर पहुंचे सभी संत महात्माओं ने ब्रह्मलीन ब्रह्मचारी महाराज को श्रद्धासुमन अर्पित करने के बाद उनके द्वारा लोकहित और धर्म संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में किये गये पुनीत कार्यों को याद किया।
इस अवसर पर सभी संत महात्माओं को आभार प्रकट करते हुए श्रीजयराम संस्था के संचालक ब्रह्मस्वरुप ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति और संस्कृत के संरक्षण, अतिथि सेवा, नारी रक्षा और उत्थान व गौ रक्षा को उनके गुरुदेव ने जीवनभर लक्ष्य बनाये रखा। उन्होने अपने जीवन में श्री जयराम अन्नक्षेत्र ऋषिकेष, श्री जयराम आश्रम हरिद्वार, श्री जयराम विद्यापीठ कुरुक्षेत्र जैसी 24 संस्थाओं को संचालित व संस्थापित किया और उनके शेष कार्य को पूरा करना उनके जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य है।

