Home haryana कुरुक्षेत्र सांस्कृतिक राजधानी के रूप में बना रहा है अपनी पहचान:मनोहर

कुरुक्षेत्र सांस्कृतिक राजधानी के रूप में बना रहा है अपनी पहचान:मनोहर

by ND HINDUSTAN
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अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2022 के आयोजन के लिये बनेगी समन्वय कमेटी

कुरुक्षेत्र की नहीं हरियाणा प्रदेश की संस्थाओं की भी होगी भागीदारी

अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के साथ जुड़े 10 देश कोविड के बाद फिर से महोत्सव देखने के लिये पंहुचे लाखों लोग

मुख्यमंत्री मनोहर लाल पंहुचे गीता ज्ञान संस्थानम केन्द्र में

न्यूज डेक्स संवाददाता

कुरुक्षेत्र। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि कुरुक्षेत्र सांस्कृतिक राजधानी के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। इस धरा से ही हजारों वर्ष पूर्व भगवान श्रीकृष्ण ने गीता के उपदेश देकर पूरी दुनिया को ज्ञान देने का काम किया है। इस ज्ञान को दुनिया के कोने-कोने तक पंहुचाने के लिये ही सरकार की तरफ से एक छोटे से कार्यक्रम को अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव को स्वरूप दिया गया। अहम पहलू यह है कि अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव 2022 में एक महाकुंभ की तरह आयोजन करने के लिये एक समन्वय कमेटी बनाई जायेगी। इस समन्वय कमेटी में कुरुक्षेत्र ही नहीं पूरे प्रदेश की समाज सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को शामिल किया जायेगा।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल रविवार को गीता ज्ञान संस्थानम् केन्द्र में पंहुचे। यहां पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल, गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानन्द, बाल योगी उमेश नाथ महाराज उज्जैन से मिले और काफी देर बातचीत की। इस दौरान विधायक सुभाष सुधा, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव कृष्ण कुमार बेदी, भारत स्वच्छ मिशन हरियाणा के उपाध्यक्ष सुभाष चंद्र भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने गत देर सांय अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव 2021 के दौरान पुरूषोत्तमपुरा बाग में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि गीता जयंती को एक छोटे से स्तर पर मनाया जाता था लेकिन भाजपा सरकार बनने के बाद वर्ष 2016 से इस महोत्सव को अंतर्राष्टï्रीय गीता महोत्सव का एक बड़ा स्वरूप दिया गया।

इस बार छठा अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव मनाया जा रहा है। इस महोत्सव के साथ करीब 10 देशों के लोग जुड़े हुए हैं। इस महोत्सव में सरस और शिल्प मेला 19 दिसम्बर तक लगेगा और मुख्य मंचीय कार्यक्रम 9 से 14 दिसम्बर तक चलेंगे। इस 18 दिन के महोत्सव में संत सम्मेलन, वैश्विक गीता पाठ, दीपोत्सव और संध्य कालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम आकर्षण का केन्द्र रहेंगे। पिछले महोत्सव में करीब 25 लाख लोगों ने अपनी भागीदारी सुनिश्चित की थी लेकिन कोविड के बाद इस महोत्सव में उतनी भीड़ तो नही होगी लेकिन फिर भी लाखों की संख्या में लोग पंहुचेंगे।

उन्होंने कहा कि महोत्सव में आने वाले लोग अच्छे कार्यक्रम देखकर उत्साहित हो रहे हैं और यहां से अध्यात्मिक और धार्मिक कार्यक्रमों से गीता का सार अपने साथ लेकर जा रहे हैं। इस महोत्सव को लोगों को महोत्सव बनाने के लिये आने वाले वर्ष में एक समन्वय कमेटी बनाई जायेगी। इस कमेटी में कुरुक्षेत्र के साथ-साथ हरियाणा की संस्थाओं के प्रतिनिधियों को शामिल किया जायेगा और इस महोत्सव को एक महाकुंभ की तर्ज पर मनाया जायेगा। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र के तीर्थ स्थलों को भी विकसित किया जा रहा है। इस धरा को एक तीर्थ स्थल के रूप में सरकार विकसित करने का काम कर रही है।

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