गत 21 मार्च को भेजा गया था पहला पत्र, कोई कार्यवाही न होने पर एडवोकेट ने भेजा रिमाइंडर
न्यूज डेक्स संवाददाता
चंडीगढ़। अम्बाला जिले के डीसी (उपायुक्त ) कार्यालय की एल.एफ.ए. शाखा के अधीक्षक (सुपरिन्टेन्डेन्ट) द्वारा अम्बाला नगरं निगम के कमिश्नर को बीते 10 दिनों में दूसरी बार पत्र भेजकर उनसे स्थानीय निवासी पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार द्वारा इसी माह भेजी गयी एक याचिका पर नियमानुसार आगामी आवश्यक कार्यवाही करने हेतु लिखा गया है. अब यह देखने लायक होगा कि नगर निगम कमिश्नर (प्रशासन) द्वारा इस सम्बन्ध में क्या कार्यवाही की जाती है ?
हेमंत ने 15 मार्च को डीसी अम्बाला के अतिरिक्त अम्बाला मंडल की आयुक्त और प्रदेश सरकार के शहरी स्थानीय निकाय विभाग के प्रशासनिक सचिव और निदेशक एवं राज्य निर्वाचन आयोग को अलग अलग पत्र भेजकर हरियाणा के शहरी क्षेत्रों में स्थापित तीनों प्रकार की नगर निकायों ( नगर निगमों, नगर परिषदों, नगर पालिकाओं) के वार्डो से निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा उनके निवास स्थान आदि पर एवं उनके सम्बंधित वार्ड क्षेत्र में पड़ने वाली गलियों/मोहल्लों/चौराहों आदि में उनका नाम दर्शाने वाली नेमप्लेट/साइनबोर्ड/होर्डिंग्स इत्यादि एवं उनके पदनाम से बनाये जाने वाली रबड़ स्टाम्प /मुहर आदि में नगर निगम/परिषद/पालिका पार्षद (कौंसलर) शब्द का प्रयोग किये जाने पर आपत्ति उठाई है.
उनका कानूनी मत है कि हरियाणा में पार्षद शब्द का प्रयोग करना हरियाणा के मौजूदा नगर निगम कानून, 1994 में, जो हरियाणा में सभी नगर निगमों पर लागू होता है, और हरियाणा नगर पालिका कानून, 1973, जो प्रदेश की सभी नगर परिषदों और नगर पालिकाओं पर लागू होता है, का स्पष्ट उलंघन है क्योंकि उक्त दोनों कानूनों में कहीं भी पार्षद (कौंसलर) शब्द का उल्लेख ही नहीं है एवं उसके स्थान पर सदस्य, नगर निगम/परिषद/पालिका शब्द का उल्लेख किया गया है.
इसी तरह हरियाणा नगर निगम निर्वाचन नियमावली, 1994 और हरियाणा नगर पालिका निर्वाचन नियमावली, 1978 जिसके अंतर्गत सभी नगर निकायों के चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा करवाए जाते हैं और सभी नगर निकाय के वार्डों से स्थानीय मतदाताओं द्वारा प्रतिनिधियों को मतदान से चुनकर निर्वाचित किया जाता है जिसके बाद निर्वाचन आयोग द्वारा विजयी उम्मीदवारों की निर्वाचन नोटिफिकेशन्स जारी कर उनके नाम सरकारी गजट में अधिसूचित किया जाता है, उसमें भी पार्षद/ (कौंसलर) शब्द का उल्लेख नहीं होता बल्कि सदस्य शब्द का प्रयोग होता है.
नगर निकायों के चुनावों में वार्डों से निर्वाचित प्रतिनिधियों को जो निर्वाचन प्रमाण-पत्र (इलेक्शन सर्टिफिकेट ) चुनाव जीतने के बाद संबंधित रिटर्निंग अफसर (आर.ओ.) द्वारा प्रदान किया जाता है, उस में भी सदस्य शब्द का ही उल्लेख होता है न कि पार्षद शब्द का एवं इसी प्रकार निर्वाचित प्रतिनिधियों को पद और निष्ठा की शपथ भी संबंधित नगर निकाय के सदस्य के तौर पर ही दिलवाई जाती है न कि सम्बंधित नगर निकाय पार्षद (कौंसलर) के तौर पर.
यही नहीं हरियाणा सरकार के शहरी स्थानीय निकाय विभाग द्वारा नगर निगमों में उक्त 1994 कानून की धारा 4 के अंतर्गत और उपरोक्त 1973 कानून की धारा 9 में गजट नोटिफिकेशन्स जारी कर नगर निगमों/परिषदों/पालिकाओं में जो तीन/दो व्यक्तियों को राज्य सरकार द्वारा सम्बंधित नगर निकाय में मनोनीत किये जाते हैं, उन नोटिफिकेशन्स में भी पार्षद (कौंसलर) शब्द का प्रयोग नहीं किया जाता है बल्कि सदस्य शब्द का ही उल्लेख होता है.
हेमंत का कहना है कि अगर नगर निगम कमिश्नर और जिला प्रशासन इस सम्बन्ध में कार्यवाही नहीं करेंगे, तो मजबूरन उन्हें इस मुद्दे पर हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर करनी पड़ेगी,क्योंकि अगर पार्षद (कौंसलर) शब्द हरियाणा विधानसभा द्वारा बनाये गए दोनों नगर निकाय कानूनों में हैं ही नहीं, तो फिर नगर निगम/परिषद/पालिका के वार्डो से निर्वाचित प्रतिनिधि उसका प्रयोग कैसे कर सकते हैं ?