न्यूज डेक्स संवाददाता
कुरुक्षेत्र, 24 सितंबर। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में चल रहे आनलाइन द्विसप्ताहिक अंतविषय रिफ्रेशर कोर्स के चैथे दिन विषय विशेषज्ञ डाॅ. श्रीनुरयान्ति, भूतपूर्व निर्वाचन आयुक्त इण्डोनेशिया ने प्रतिभागियों के साथ विधिक नियम व सामाजिक रूपातरंण का तुलनात्मक परिपेक्ष्य पर अपने विचार सांझा किए।
उन्होंने बताया कि जब वो पहली बार भारत यात्रा पर आई तो उन्होंने भारत व इण्डोनेशिया में बहुत सी समानताएं अनुभव की, परन्तु समानताओं के साथ-साथ कुछ अन्तर भी है जो शायद दोनों देशों में अलग-अलग स्थानीय कानूनों की वजह से है। यदि सभी देश एक कानून को अपनाए तो सामाजिक रूपांतरण भी एक जैसा होगा, जैसे सभी देशों में महामारी कोविड-19 के दिशा-निर्देश अपनाने से हुआ।
दूसरे सत्र में वार्तालाप करते हुए पंजाब विश्वविद्यालय चण्डीगढ़ के प्रो. ललन बगेल ने बताया कि मानव अधिकार और सामाजिक न्याय, सामाजिक रूपांतरण का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि धार्मिक ग्रन्थ जैसे रामायण, महाभारत, गीता आदि सामाजिक रूपातंरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। डाॅ. किरण गुप्ता, दिल्ली विश्वविद्यालय के अपने वक्तव्य में महिलाओं का सम्पत्ति में अधिकार पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि अब बेटी को पिता की सम्पत्ति में बेटे के बराबर अधिकार प्राप्त है।
सर्वोच्च न्यायालय की अधिवक्ता मनप्रीत खुराना ने अपने अभिभाषण में महिला सशक्तिकरण और सामाजिक बदलाव में कानून के महत्व के बारे में बताया।
डाॅ. नीरज बातिश, कोर्स संचालक ने बताया कि माननीय कुलपति डाॅ. नीता खन्ना, के दिशा-निर्देशन में विश्वविद्यालय बहुत-सी आॅनलाइन गतिविधियों अग्रसर है। डाॅ. नीरा वर्मा, निदेशक मानव संसाधन विकास केन्द्र ने सभी का विषय विशेषज्ञों का धन्यवाद किया और उन्हें कोविड-19 महामारी के पश्चात विश्वविद्यालय के भ्रमण के लिए आमंत्रित किया। रिफ्रेशर कोर्स का उद्घाटन की बलदेव महाजन, एडवोकेट जनरल हरियाणा ने किया था।
—