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भारतीय स्वाधीनता महासंग्राम के महायज्ञ में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने प्रमुख पुरोहित की भूमिका निभायी-डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र

by ND HINDUSTAN
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मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा माँ भारती के वीर सपूत नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती के उपलक्ष्य में राष्ट्र संवाद कार्यक्रम संपन्न

मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा माँ भारती के वीर सपूत नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती के उपलक्ष्य में श्रीश्री 1008 स्वामी विप्रदास महाराज की अध्यक्षता में कार्यक्रम संपन्न।

कुरुक्षेत्र । किसी राष्ट्र के लिए स्वाधीनता सर्वोपरि है इस महान मूलमंत्र को शैशव और नवयुवाओं की नसों में प्रवाहित करने, तरुणों की सोई आत्मा को जगाकर देशव्यापी आंदोलन देने और युवा वर्ग की शौर्य शक्ति उद्भासित कर राष्ट्र के युवकों के लिए आजादी को आत्मप्रतिष्ठा का प्रश्न बना देने वाले नेताजी सुभाष चंद बोस स्वाधीनता महासंग्राम के आंदोलन के महानायक थे। भारतीय स्वाधीनता महासंग्राम के महायज्ञ में नेताजी सुभाष चंद बोस ने प्रमुख पुरोहित की भूमिका निभायी। यह विचार मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने माँ भारती के वीर सपूत नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती के उपलक्ष्य में मातृभूमि शिक्षा मंदिर परिसर में आयोजित राष्ट्र संवाद कार्यक्रम में व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारंभ कार्यक्रम के अध्यक्ष श्रीश्री 1008 स्वामी विप्रदास महाराज, अदिति वन सूर्यकुण्ड एवं मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र, कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि धर्मपाल सैनी एवं चौधरी हूक्कूम सिंह चौहान ने संयुक्त रूप से नेताजी सुभाष चन्द्र बोस एवं भारतमाता के चित्र पर माल्यार्पण, पुष्पार्चन एवं दीप्रज्जवलन कर किया।

मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा कि नेताजी के लिए स्वाधीनता जीवन-मरण का प्रश्न बन गया था। नेताजी ने पूर्ण स्वाधीनता को राष्ट्र के युवाओं के सामने एक मिशन के रूप में प्रस्तुत किया। नेताजी ने युवाओं से आह्वान किया कि जो इस मिशन में आस्था रखता है वह सच्चा भारतवासी है। बस, उनके इसी आह्वान पर ध्वजा उठाए आजादी के दीवानों की आजाद हिन्द फौज बन गई। ऐसी मान्यता है कि नेताजी की बाल्यकाल में बंगाल की आत्मा अतिष्ठात्री माँ काली ने स्वयं अपने आशीर्वाद से भारत को उसके तत्कालीन भविष्य से परिचित करवाया था, जो आज की पीढ़ी-युग के लिये प्रेरणास्रोत है। डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा कि आज युवा वर्ग में विचारों की कमी नहीं है। लेकिन इस विचार जगत में क्रांति के लिए एक ऐसे आदर्श को सामने रखना ही होगा, जो विद्युत की भांति हमारी शक्ति, आदर्श और कार्ययोजना को मूर्तरूप दे सकें। नेताजी ने युवाओं में स्वाधीनता का अर्थ केवल राष्ट्रीय बंधन से मुक्ति नहीं, बल्कि आर्थिक समानता, जाति, भेद, सामाजिक अविचार का निराकरण, सांप्रदायिक संकीर्णता त्यागने का विचार मंत्र भी दिया

       कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्रीश्री 1008 स्वामी विप्रदास महाराज ने कहा कि नेताजी स्वामी राम कृष्ण परमहंस की आभा से प्रभावित थे, जिसके कारण सुभाष का वात्सल्य भारतीय धार्मिक विश्वास की अवधारणा की विरासत के मजबूत आधार पर हुआ। इसके कारण सुभाष ने बचपन से ही आत्म और आत्मा की वास्तविकता से परिचित दृढ़ मजबूत इरादों का युवा ओज व्यक्ति व्यक्तित्व बनकर भारत को चमत्कृत किया।

राष्ट्र संवाद कार्यक्रम को धर्मपाल सैनी एवं चौधरी हूक्कूम सिंह चौहान ने बतौर संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन शिक्षक बाबू राम एवं आभार ज्ञापन छात्रवास अधीक्षक हरि कृष्ण व्यास ने किया। मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों ने अपने विचार व्यक्त किए एवं नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के जीवन से संबंधित अनेक प्रसंग सुनाए। मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा संचालित मातृभूमि शिक्षा मंदिर के विद्यार्थियों को इस अवसर पर श्रीश्री 1008 स्वामी विप्रदास महाराज एवं उनके साधक समुह ने शीतकाल के लिए कम्बल एवं गद्दे वितरित किए। कार्यक्रम में मिशन के सदस्य सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे।

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