Home haryana पंचायती जमीन की बोली कम रेट पर,ग्राम सचिव सस्पेंड,अनियमितताएं पाए जाने पर डीसी ने दिए आदेश

पंचायती जमीन की बोली कम रेट पर,ग्राम सचिव सस्पेंड,अनियमितताएं पाए जाने पर डीसी ने दिए आदेश

by ND HINDUSTAN
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उपायुक्त ने बोली प्रति एकड़ 50 हजार रुपये से कम करने पर पंचायती जमीन की दोबारा बोली करने के दिए निर्देश

न्यूज डेक्स संवाददाता

इंद्री/करनाल। उपायुक्त अनीश यादव वीरवार को पंचायती जमीन की बोली कम दर पर पाए जाने को लेकर इंद्री क्षेत्र के गांव गढ़ीबीरबल, मुस्सेपुर तथा कलसौरा का औचक दौरा किया और संबंधित ग्राम सचिवों व सरपंचों से इसके कारणों के बारे में जानकारी ली। उपायुक्त सबसे पहले गढ़ीबीरबल गांव पहुंचे, जहां पर उन्होंने पंचायती जमीन की बोली के बारे में ग्राम सचिव से पूछा कि यह पंचायती जमीन मार्किट वैल्यु से इतनी कम रेट पर क्यों दी गई है? ग्राम सचिव हरीश का संतोषजनक जवाब नहीं मिलने और अनियमितताएं पाए जाने पर उपायुक्त ने उन्हें तुरंत प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने गांव के सरपंच व एसईपीओ को इस पंचायती जमीन की दोबारा से बोली करवाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने मौके पर उपस्थित एसईपीओ को यह भी निर्देश दिए कि वे इंद्री ब्लॉक में जिस भी गांव में पंचायती जमीन की बोली प्रति एकड़ 50 हजार रुपये से कम है उन गांवों में दोबारा से पंचायती जमीन की बोली करवाएं। उपायुक्त इसके उपरांत गांव मुस्सेपुर पहुंचे और इस गांव में भी पंचायती जमीन में से कुछ एकड़ की बोली कम रेट पर पाई गई। इस पर उपायुक्त ने संबंधित ग्राम सचिव व सरपंच को चेतावनी देते हुए कहा कि अबकी बार तो छोड़ा जा रहा है, भविष्य में ऐसी गलती मत करना और इस जमीन की दोबारा से खुली बोली करवाएं। पंचायती जमीन से ग्राम पंचायत की जितनी अधिक आमदनी होगी, उतने ही अधिक विकास कार्य ग्राम पंचायत गांव में करवा सकेगी। 

उपायुक्त ने मुस्सेपुर गांव के उपरांत कलसौरा गांव पहुंचे और पंचायती जमीन को कम रेट पर दिए जाने बारे ग्राम सचिव से जानकारी ली। इस पर ग्राम सचिव ने बताया कि यह जमीन यमुना से सटी हुई है, सिंचाई के पानी के लिए ट्यूबवैल का कनैक्शन भी नहीं है और यह क्षेत्र बाढ़ प्रभावित भी है। इसलिए यह जमीन कम रेट पर ही जाती है। ग्राम पंचायत की मांग पर उपायुक्त ने पंचायती जमीन के लिए ट्यूबवैल का कनैक्शन जारी करवाने का आश्वासन दिया। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जब पानी का बोर हुआ है, तो ऐसे में ग्राम पंचायत अपने खर्चे पर पट्टेदार को डीजल इंजन उपलब्ध करवाएं ताकि पंचायती जमीन की बोली अधिक रेट पर जा सके।

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