Home Kurukshetra News कार्यकाल खत्म होने के बाद भी कैसे बैठकों में भाग ले रहे हैं केडीबी के पूर्व सदस्य-पवन गर्ग 

कार्यकाल खत्म होने के बाद भी कैसे बैठकों में भाग ले रहे हैं केडीबी के पूर्व सदस्य-पवन गर्ग 

by ND HINDUSTAN
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गर्ग ने कहा कि आमंत्रित करना है तो सभी पुराने केडीबी मेंबरों आमंत्रित करे प्रशासन

राजभवन में राज्यपाल को भेजा जाएगा पत्र,केडीबी किसी सत्तारुढ़ दल की नहीं है

हरियाणा कांग्रेस के प्रदेश महासचिव पवन गर्ग ने उठाये तीन सवाल

न्यूज डेक्स संवाददाता

कुरुक्षेत्र,18 दिसंबर। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश महासचिव एवं केडीबी के पूर्व सदस्य पवन गर्ग ने गीता महोत्सव नाम,केडीबी के पूर्व सदस्यों और गीता जन्मस्थली का मुद्दा उठाते हुए सरकार,प्रशासन और केडीबी से सवाल किये हैं। प्रेस विज्ञप्ति में गर्ग ने कहा कि गीता जयंती उत्सव को किसी एक सत्ता पक्ष का प्लेटफार्म नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड पिछले कुछ वर्षों से मनमानी कर रही है। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के गैर सरकारी सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो चुका है। इसके बाद भी इन्हें जिला प्रशासन और कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की बैठकों में आमंत्रित किया जा रहा है।

गर्ग ने कहा कि यदि सरकार,प्रशासन और केडीबी अपनी बैठकों में कार्यकाल खत्म होने के बावजूद भी इन पूर्व सदस्यों को अपनी बैठकों में मुख्य तौर पर आमंत्रित कर रही है तो उन्हें चाहिये कि बगैर भेदभाव के उन सभी पूर्व केडीबी सदस्यों को आमंत्रित करे,जो पहले मेंबर रह चुके हैं। गर्ग ने आरोप लगाया कि सरकार,प्रशासन और केडीबी कुछ चहेतों को खुश करने और गीता जयंती उत्सव को सत्तारूढ़ दल का कार्यक्रम बनाने पर तुली है,जबकि इनसे पहले उनके अलावा श्रीजयराम संस्थाओं के अध्यक्ष ब्रह्मस्वरुप ब्रह्मचारी महाराज,ब्राह्मण सभा के नेता श्रीप्रकाश मिश्रा और पंडित जयनारायण शर्मा,राजेंद्र भारद्वाज और वरिष्ठ पंजाबी नेता परीक्षित मदान के अलावा आरएसएस के ही डा.हिम्मत सिंह सिन्हा जैसी हस्तियां केडीबी की मेंबर रह चुकी हैं।

उन्होंने कहा कि औरों की तो बाद ही दूर है,जब आरएसएस से जुड़े डा.सिन्हा को भी ऐसी बैठक में नहीं बुलाया जाता। क्योंकि वह कई बार सच्चाई केसाथ इनकी कारगुजारियों की पोल खोल चुके हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि सबसे पहले तो इस उत्सव का नाम गलत है,क्योंकि यह कार्यक्रम गीता जयंती के मौके पर होता है और इसमें से जयंती शब्द को अलग कर इसे सिर्फ एक महोत्सव का नाम देकर की गीता जी की जयंती को गीता जन्मस्थली ज्योतिसर की तरह भुला दिया गया है।

उन्होंने कहा कि पिछले उत्सवों में यह तर्क दिया जाता रहा है कि गीता जन्मस्थली ज्योतिसर में इस उत्सव को इसलिये बड़े स्तर पर करने की जगह ब्रह्मसरोवर पर इसलिये किया जाता है,क्योंकि वहां इतने बड़े आयोजन के लिये स्थान पर्याप्त नहीं है,जबकि इस बार कोविड के कारण जबकि चंद लोग ही इस उत्सव में शामिल हो रहे हैं तो भी गीता जन्मस्थली की जगह मेन इवेंट ब्रह्मसरोवर को ही बनाया गया। उन्होंने कहा कि ब्रह्मसरोवर विशेष महत्व है,लेकिन गीता के नाम पर गीता जन्मस्थली को अलग थलग नहीं किया जा सकता।

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