योग हमारी सभ्यता की अमूल्य धरोहर, सभी को अपनाना चाहिए: चेयरपर्सन माफी ढांडा
-“योग अब एक विकल्प नहीं,जीवनशैली बनना चाहिए: उमा सुधा
-योग केवल शरीर का व्यायाम नहीं बल्कि आत्मा, मन और चेतना का संयोजन: प्रो. धीमान
एनडी हिन्दुस्तान
कुरुक्षेत्र। धर्म, सेवा और योग की पावन भूमि कुरुक्षेत्र से आज श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय ने पूरे विश्व को स्वास्थ्य, संतुलन और समरसता का संदेश दिया। मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (आयुष मंत्रालय भारत सरकार) के तत्वावधान में ब्रह्मसरोवर तीर्थ के पुरुषोत्तमपुरा बाग में आयोजित 43वें काउंटडाउन योगोत्सव कार्यक्रम में एक हजार से अधिक साधकों ने सामूहिक योगाभ्यास कर भारत की सांस्कृतिक और आयुष परंपरा को जीवित किया।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 7 बजे कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान के नेतृत्व में हुई। मुख्य मंच पर नगर परिषद थानेसर की चेयरपर्सन माफी ढांडा, पूर्व चेयरपर्सन उमा सुधा, आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य देवेंद्र खुराना समेत अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में 15 से अधिक योग संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। प्रो. शीतल सिंगला के निर्देशन में योग शिक्षक योगेंद्र कुमार ने योग प्रोटोकॉल का अभ्यास करवाया, जबकि संचालन की जिम्मेदारी सहायक कुलसचिव अतुल गोयल ने निभाई।
योग केवल व्यायाम नहीं, जीवन जीने की कला: ढांडा
इस अवसर पर नगर परिषद की चेयरपर्सन माफी ढांडा ने कहा कि “योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित करने की भारतीय कला है,जिसे पूरी दुनिया अपनाने लगी है। यह हमारी सभ्यता की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने खास तौर पर महिलाओं व युवाओं से योग अपनाने की अपील की।
योग से मानसिक शांति व ऊर्जा मिलती है: उमा सुधा
नगर परिषद की पूर्व चेयरपर्सन उमा सुधा ने अपने निजी अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे प्रतिदिन योग करती हैं, जिससे उन्हें मानसिक शांति और ऊर्जा मिलती है। उन्होंने कहा कि “योग अब एक विकल्प नहीं,जीवनशैली बनना चाहिए।
योग से पूरी दुनिया को शांति और स्वास्थ्य का संदेश दे रहे: प्रो. धीमान
कुलपति प्रो. धीमान ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि “यह वही पावन भूमि है जहां श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया था। आज उसी भूमि से हम योग के माध्यम से पूरी दुनिया को शांति और स्वास्थ्य का संदेश दे रहे हैं। यह कार्यक्रम भारत की शक्तिशाली और आत्मनिर्भर संस्कृति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि योग केवल शरीर का व्यायाम नहीं बल्कि आत्मा, मन और चेतना का संयोजन है। कुलपति ने व्यायाम और योग के अंतर को भी साधकों को समझाया। उन्होंने कहा कि“धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र से दिया गया योग का यह संदेश शांति, एकता और मानव कल्याण की भावना को सशक्त करता है। हमारा उद्देश्य केवल योग सिखाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों व समाज को इसके माध्यम से एक संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देना है।
इन संस्थाओं का रहा सहयोग
इस सफल आयोजन में हरियाणा योग आयोग,जिला आयुष विभाग,जिला शिक्षा विभाग, कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड,स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, भारत विकास परिषद,विद्या भारती, भारतीय योग संस्थान, योग भारती,आर्ट ऑफ लिविंग,पतंजलि योग समिति, स्वदेशी जागरण मंच, आरोग्य भारती, जयराम गुरुकुल, गीता निकेतन, श्रीमद भगवद गीता स्कूल, संस्कृति मॉडल स्कूल थानेसर, राजकीय कन्या विद्यालय व नाथ पब्लिक स्कूल समेत कई संस्थाओं ने सहयोग किया।
ये रहे मौजूद
इस अवसर पर केडीबी के मानद सचिव उपेंद्र सिंघल, हरियाणा योग आयोग के मेंबर मनीष कुकरेजा, विद्या भारती से अशोक रोशा,भारती योग संस्थान से ओमप्रकाश व गुलशन ग्रोवर, पतंजलि महिला समिति से डॉ. निरुपमा भट्टी, योग भारती से जगतार सिंह,रणजीत, जयराम, ऋषिपाल मथाना, एमके मुदगिल, गुरुकुल से आचार्य दीपक व संजय, शिक्षा विभाग से हरीश कुमार व जसबीर सिंह, भारत विकास परिषद से विजयंत बिंदल, आर्ट ऑफ लिविंग से अक्षय समेत अन्य मौजूद रहे।