एनडी हिन्दुस्तान
यमुनानगर। इंडियन नोलेज सिस्टम के सौजन्य से डीएवी कॉलेज फॉर गर्ल्स यमुनानगर के हिंदी विभाग द्वारा आनलाइन वेबिनार कम ओपन हाउस डायलॉग का आयोजन किया गया। जिसमें काउंसिल फॉर हिस्टोरिकल रिसर्च एंड कंपरेटिव स्टडीज पंचकूला के निदेशक नीरज अत्री मुख्य वक्ता रहे। उन्होंने संवैधानिक इंडिया में हिंदू अस्मिता की चुनौतियों का संस्कृत शास्त्रीय समलोचन विषय पर विचार व्यक्त किए।
उन्होंने भारतीय संविधान की वास्तविकता का मूल्यांकन करते हुए कहा कि भारतीय संविधान जो कि स्वतंत्रता के पश्चात भारतीयों के लिए बनाया गया है, वास्तव में उसमें दिए गए अधिकार भारतीयों के लिए नहीं, अपितु शासकों के लिए हैं। जैसे अलंकार चाहे काव्य में हो या मानव शरीर पर वे वास्तविकता को छुपाते हैं, उसी प्रकार संविधान की वास्तविकता कुछ और है। वास्तव में वैदिकता का ज्ञान रखने वालों के आधार पर संविधान की सुरक्षा संभव है। भारतीयों को सच में उनके अधिकार प्रदान करने हैं तो संविधान का निर्माण हमारे वैदिक धर्म एवं संस्कृति के आधार पर किया जाना चाहिए। उन्होंने भारतीय प्रजा की दुर्दशा एवं उनके अधिकारों का हनन, शासकों की मनमानी जैसी वास्तविकता को उजागर किया। कार्यक्रम संचालक आशुतोष अंगीरस ने कहा कि संविधान, धर्म जाति के आधार पर भारतीयों के लिए नहीं है, बल्कि इंडियन के लिए है। नए आयाम जुडने से जिम्मेदारियां बढ रही है। इंडियन इंस्टीट्युशन का निर्माण भारतीय संविधान में करने की आवश्यकता है। भारतीय संविधान का निर्माण आर्य समाज में बताए गए दस नियमों के आधार पर होना चाहिए। इस अवसर पर जयप्रकाश गुप्ता, रविंद्र गुप्ता, डॉ अखिलेश चंद्र ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता कनवीनर डॉ किरण व मनोविज्ञान अध्यक्ष शालिनी छाबडा ने की। इस दौरान डॉ रीटा सिंह, डॉ दीपिका घई, डॉ रंजना व मंजीत कौर मौजूद रहीं।