आयुर्वेद भारतीय जीवनशैली और संस्कृति का अभिन्न अंग: प्रो. धीमान
एनडी हिन्दुस्तान
कुरुक्षेत्र। भारत की मूल आत्मा और प्रकृति के अनुरूप यदि कोई चिकित्सा पद्धति है,तो वह केवल आयुर्वेद है। यह न केवल ज्ञान और विज्ञान की विधा है,बल्कि यह भारतीय स्वाभिमान और सम्मान की पहचान भी है। यह विचार दिव्या प्रेम सेवा मिशन हरिद्वार के संस्थापक एवं अध्यक्ष आचार्य आशीष गौत्तम ने श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में अपने संबोधन के दौरान व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद ब्रह्मांड की सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा पद्धति है और इसके प्रति समर्पित होकर कार्य करना हमारा कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि भारत को यदि वास्तव में समझना है,तो यहां के संत-महात्माओं, ऋषि-परंपरा और सनातन ज्ञान को जानना आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे आयुर्वेद को सिर्फ चिकित्सा पद्धति नहीं,बल्कि संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का माध्यम समझकर आगे बढ़ें। इससे पहले विश्वविद्यालय पहुंचने पर कुलपति प्रो.वैद्य करतार सिंह धीमान,कुलसचिव प्रो.ब्रिजेंद्र सिंह तोमर, कार्यवाहक प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता व प्रो. दीप्ति पराशर ने आचार्य आशीष गौत्तम, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक चरणजीत सिंह, जीतेंद्र अहलावत, उत्तराखंड की आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. अर्चना एवं पूर्व सूबेदार रविंद्र कौशिक का स्वागत किया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि आयुर्वेद न केवल चिकित्सा का माध्यम है,बल्कि यह भारतीय जीवनशैली, संस्कृति और दर्शन का अभिन्न अंग है। दिव्या प्रेम सेवा मिशन जैसे संस्थानों के मार्गदर्शन और प्रेरणा से छात्र आयुर्वेद के मूल तत्वों को आत्मसात कर सकते हैं और समाज की सेवा में इसे प्रभावी रूप से लागू कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा आचार्य आशीष गौत्तम जैसे संत-समर्पित व्यक्तित्व का मार्गदर्शन मिलना विश्वविद्यालय के लिए गौरव की बात है। हमारा प्रयास है कि विद्यार्थियों को केवल शास्त्रीय ज्ञान ही नहीं,बल्कि व्यवहारिक व नैतिक दिशा भी मिले,जिससे वे आयुष प्रणाली को जन-जन तक पहुंचा सकें। इस अवसर पर प्रो.रविराज, प्रो.पीसी मंगल,डॉ.सुरेंद्र सहरावत,डॉ.नेहा लांबा,डॉ.सुखबीर सिंह एवं डॉ. ममता राणा समेत अन्य शिक्षक, कर्मचारी व विद्यार्थी उपस्थित रहे।