Home Kurukshetra News टीबी मुक्त भारत की ओर बढ़ा कुरुक्षेत्र, श्री कृष्ण आयुष विवि ने संभाली कमान  

टीबी मुक्त भारत की ओर बढ़ा कुरुक्षेत्र, श्री कृष्ण आयुष विवि ने संभाली कमान  

by ND HINDUSTAN
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घर-घर दस्तक देंगे 300 आयुर्वेदिक चिकित्सक, टीबी रोगियों की होगी पहचान

एनडी हिन्दुस्तान

कुरुक्षेत्र। जब इरादे नेक हों और सेवा का भाव हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। इसी सोच को साकार करते हुए श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय ने ‘टीबी मुक्त भारत’ के संकल्प को धरातल पर उतारने की ऐतिहासिक पहल की है। अब आयुष विश्वविद्यालय के 300 चिकित्सक डोर-टू-डोर दस्तक देकर स्क्रीनिंग करेंगे, ताकि समय पर न केवल रोग की पहचान हो सके,बल्कि रोगियों की जरूरी जांच होने के बाद उपचार मिल सके। आयुष विवि का यह कदम न केवल चिकित्सा के क्षेत्र में बदलाव का प्रतीक है,बल्कि सेवा,करुणा और समर्पण की मिसाल भी है।

दरअसल,सरकार द्वारा टीबी को जड़ से खत्म करने के संकल्प के तहत स्वास्थ्य विभाग कुरुक्षेत्र को जिलेभर में घर-घर जाकर स्क्रीनिंग करने के निर्देश मिले हैं,लेकिन शहरी क्षेत्र में संसाधनों और स्वास्थ्य कर्मियों की कमी के कारण यह कार्य स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती था। ऐसे कठिन समय में श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय ने आगे आकर न सिर्फ इस जिम्मेदारी को साझा किया,बल्कि टीबी उन्मूलन की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण भी पेश किया है। आयुष विवि के आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता ने बताया कि स्क्रीनिंग अभियान में विश्वविद्यालय के यूजी और पीजी पाठ्यक्रमों के लगभग 300 विद्यार्थी फील्ड में उतरेंगे। आयुष विश्वविद्यालय के इस सहयोग के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने आभार जताया है।  इस मौके पर आयुष विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह तोमर, प्रो. जीतेश कुमार पंडा, आयुर्वेदिक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. राजेंद्र सिंह चौधरी, प्रो. रविराज,  प्रो. कृष्ण कुमार, उप चिकित्सा अधीक्षक सुरेंद्र सिंह सहरावत, प्रो. दीप्ति पराशर, प्रो. मनोज तंवर, प्रो. पीसी मंगल, प्रो. सचिन, एसोसिएट प्रो. नेहा लाम्बा, डॉ. ममता राणा, डॉ. मोहित शर्मा व डॉ. प्रीति अहलावत समेत अन्य उपस्थित रहे।        

कुलपति प्रो. धीमान ने 100 रोगियों को लिया गोद
श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि आयुष विश्वविद्यालय न केवल चिकित्सकीय शिक्षा का केंद्र है,बल्कि समाजसेवा के प्रति भी समर्पित है। इसलिए हमारा इस दिशा में टीबी रोगियों की मदद एक मानवीय और नैतिक कर्तव्य है। कुलपति ने स्वास्थ्य विभाग के आग्रह पर क्षय रोग के 100 रोगियों को गोद लिया है। वे उपचार की अवधि तक उन्हें पौष्टिक आहार मुहैया कराएंगे।      

टीबी पीड़ितों को मिल रही एक हजार की राशि
स्वास्थ्य विभाग से टीबी नोडल अधिकारी डॉ.संदीप अग्रवाल,डिप्टी सिविल सर्जन डॉ.जगमिंद्र सिंह,डॉ.सतविंद्र कुमार व डॉ.सौरभ कौशल की टीम शुक्रवार को आयुष विश्वविद्यालय पहुंची और आयुर्वेदिक चिकित्सकों को टीबी रोगियों की स्क्रीनिंग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि वर्तमान में कुरुक्षेत्र जिले में 1347 क्षय रोगी उपचाराधीन हैं। सरकार द्वारा टीबी मरीज को 500 रुपए दिए जा रहे थे,लेकिन अब रोगियों को एक हजार रुपए की राशि मिलनी शुरू हो गई है। 
मौके पर होगी जरूरी जांच: डॉ.अग्रवाल  

डॉ.अग्रवाल ने बताया कि टीबी की पहचान उसके लक्षणों से भी की जा सकती है। इसमें मरीज को 15 दिन तक खांसी, हल्का बुखार,भूख कम लगना व वजन कम होना मुख्य हैं। जहां टीबी के मरीज मिलने की संभावना ज्यादा है वहां स्पेशल मोबाइल मेडिकल वैन जा रही है। जांच के दौरान जो भी सर्दी खांसी के मरीज मिलेंगे,उनकी स्पेशल जांच की जाएगी। जो मरीज स्वस्थ हो चुके हैं, उनके संपर्क में आने वाले लोगों की भी स्क्रीनिंग होगी। यही नहीं,तीन सप्ताह से ज्यादा समय से खांसी वाले मरीजों की स्पेशल स्क्रीनिंग की जाएगी। मौके पर ही एक्स-रे किए जाएंगे। अगर मरीज को टीबी की संभावना हो सकती है तो मौके पर ही बलगम का सैंपल लेकर सीबी नेट मशीन से जांच कराई जाएगी।

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